अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत, क्या बदलेगी ट्रंप की भारत नीति? थरूर ने बताया
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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप की भारत नीति बदलेगी? कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस पर बेबाक जवाब दिया है. उनका कहना है कि अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ने के बावजूद विदेश नीति के मामले में ट्रंप के अधिकार काफी हद तक बने रहेंगे. भारत को उसी डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत जारी रखनी होगी. थरूर के मुताबिक संसद कुछ फैसलों और खर्चों पर रोक लगा सकती है लेकिन राष्ट्रपति की ताकत पूरी तरह सीमित करना आसान नहीं होगा.
शशि थरूर ने बताया अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद ट्रंप की भारत नीति पर क्या असर होगा. (फाइल फोटो)
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में बड़ा झटका लगा है. डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. ट्रंप और उनकी पार्टी रिपब्लिकन मिडटर्म इलेक्शन हार गई है. इस नतीजे को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान युद्ध से लेकर बढ़ती तेल कीमतों और महंगाई तक कई मुद्दों ने राष्ट्रपति की मुश्किलें बढ़ाई हैं. अब सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका में डेमोक्रेट्स की इस जीत का असर भारत के साथ रिश्तों पर भी पड़ेगा? क्या ट्रंप अब भारत पर टैरिफ लगाने या व्यापार समझौते को लेकर पहले की तरह सख्त रुख नहीं अपना पाएंगे? कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस सवाल पर बेबाक जवाब दिया है. उनका मानना है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजे से ट्रंप की विदेश नीति चलाने की ताकत पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.
थरूर से पूछा गया कि क्या डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करने के बाद ट्रंप की भारत नीति बदल सकती है. क्या अमेरिकी संसद अब उनके फैसलों की ज्यादा निगरानी करेगी? इस पर थरूर ने कहा कि इसकी संभावना बहुत कम है. उन्होंने समझाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अपनी ओर से टैरिफ लगाने के काफी अधिकार हैं. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद भी ट्रंप दूसरे कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाने या उनकी धमकी देने की स्थिति में रह सकते हैं.
थरूर की टिप्पणी का सबसे अहम हिस्सा भारत के लिए उनकी सलाह है. उन्होंने कहा, ‘मूल रूप से विदेश नीति के मामले में ट्रंप काफी हद तक स्वतंत्र हैं. इसलिए भारत को उसी डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत जारी रखनी होगी जिसे हम जानते हैं.’ उनका जवाब बताता है कि अमेरिकी चुनाव में सत्ता का संतुलन बदलने के बावजूद भारत को अपनी रणनीति में ट्रंप के मौजूदा रुख को ध्यान में रखना होगा. व्यापार समझौते और टैरिफ जैसे मुद्दों पर बातचीत की चुनौती बनी रह सकती है.
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार को भारत में भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है. कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे इस बात की मिसाल बता रहे हैं कि मजबूत से मजबूत नेता को भी चुनाव में जनता के सवालों का सामना करना पड़ता है. हालांकि थरूर ने अमेरिकी चुनावी नतीजों की तुलना भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से करने के बजाय भारत-अमेरिका संबंधों पर उसके व्यावहारिक असर को अहम बताया है. उनका संदेश साफ है. वॉशिंगटन में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं लेकिन नई दिल्ली को ट्रंप के साथ बातचीत और कूटनीति जारी रखनी होगी.
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