दिवाली पर आ गई खुशखबरी, 4 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान, 675 बस्तियों की बदलेगी तस्वीर

दिवाली पर आ गई खुशखबरी, 4 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान, 675 बस्तियों की बदलेगी तस्वीर


दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी जल्द बदल सकती है. दिल्ली में झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. अब उन्हें टीन की छत और तंग गलियों वाली झुग्गियों की जगह कमरा, किचन, बाथरूम और बालकनी वाला पक्का मकान मिल सकता है. दिल्ली सरकार ने राजधानी की करीब 675 झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए नई नीति लागू की है. इसके तहत करीब 4 लाख परिवारों को पक्के मकान देने का लक्ष्य रखा गया है.

जी हां, राजधानी की करीब 675 झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास के लिए नई नीति लागू की गई है. खास बात यह है कि पात्र परिवारों को मकान के लिए 1.50 लाख रुपये देने होंगे. ऐसे में सवाल है कि इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा, मकान कितना बड़ा होगा और इसके लिए क्या शर्तें तय की गई हैं?

नई नीति के तहत पात्र परिवारों को झुग्गी के बदले कम से कम 25 वर्गमीटर का पक्का मकान दिया जाएगा. इसमें कमरा, किचन, बाथरूम, शौचालय और बालकनी जैसी सुविधाएं होंगी.

उसी इलाके में मकान देने को प्राथमिकता

पुनर्वास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि लोगों को उनके मौजूदा इलाके के आसपास ही आवास मिल सके. इसका उद्देश्य यह है कि झुग्गियों में रहने वाले परिवारों का रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो.

महज 1.50 लाख रुपये होगी मकान की लागत

नीति के तहत पात्र परिवारों के लिए मकान की निर्धारित लागत 1.50 लाख रुपये रखी गई है. इसके अलावा 50 हजार रुपये का मेंटेनेंस कॉर्पस भी अलग से होगा.

कौन होगा मकान पाने का पात्र?

* झुग्गी 1 जनवरी 2025 से पहले अस्तित्व में होनी चाहिए.
* परिवार के पास देश के किसी भी हिस्से में अपना पक्का मकान नहीं होना चाहिए.
* आवास का लाभ निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करने वाले परिवारों को ही मिलेगा.

तीन इलाकों से पुनर्विकास की शुरुआत

इस योजना के पहले चरण में सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 झुग्गी बस्तियों में 4,870 झुग्गियों के पुनर्विकास की योजना बनाई गई है. इसके तहत तीन हाईराइज आवासीय कॉलोनियां विकसित करने का प्रस्ताव है. यह योजना न सिर्फ दिल्ली की झुग्गी बस्तियों की तस्वीर बदल सकती है, बल्कि निर्माण क्षेत्र, रियल एस्टेट, सीमेंट, स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए भी बड़े अवसर पैदा कर सकती है.



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