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Pakistan News: अमेरिका से आर्थिक मदद की उम्मीद टूटने के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर के कर्ज की अवधि बढ़ा दी है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि देश विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए सऊदी से मिली ये राहत बहुत अहम है. पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की सहायता मांगी थी लेकिन उस पर फैसला होते नहीं दिख रहा है.
अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब. (IMAGE: X)
अमेरिका में हुए मिड टर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन की बुरी हार के बीच पाकिस्तान को भी बड़ा लगा है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि अब अमेरिका से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. दरअसल, पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर के आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी. लेकिन यह गुहार अब तक अटकी हुई है. इस बीच मिड टर्म चुनाव में ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. उनके फैसलों पर डेमोक्रेट्स के बहुमत वाली कांग्रेस नकेल कसेगी. ऐसे में वे अब मनमाने फैसले नहीं ले पाएंगे.
इस बीच संकट की इस घड़ी में पाकिस्तान को एक बार फिर सऊदी अरब का सहारा मिला है. उसने पाकिस्तान को दिए गए तीन अरब डॉलर के कर्ज की अवधि बढ़ा दी है. इससे पाकिस्तान को फिलहाल विदेशी मुद्रा भुगतान के मोर्चे पर राहत मिल गई है. मुहम्मद औरंगजेब का कहना है कि अगर अमेरिका से यह सुविधा मिलती है तो अच्छी बात है, लेकिन पाकिस्तान इसके बिना भी अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी करने की तैयारी कर रहा है.
सऊदी अरब ने क्यों दी मदद?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बुधवार को पुष्टि की कि सऊदी अरब ने अप्रैल में दिए गए 3 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को आगे बढ़ा दिया है. यह रकम 31 अक्टूबर को चुकाई जानी थी. शुरुआत में यह कर्ज तीन महीने के लिए दिया गया था. पाकिस्तान को इस रकम से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के करीब 3.5 अरब डॉलर के भुगतान का दबाव संभालने में मदद मिली थी.
औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब से कोई अतिरिक्त आर्थिक मदद नहीं मांगी है. उनके मुताबिक देश के पास इतना विदेशी मुद्रा भंडार है कि तीन महीने से ज्यादा के आयात का खर्च उठाया जा सकता है. सरकार की योजना इस साल के अंत तक इसे बढ़ाकर चार महीने के आयात के बराबर करने की है. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से पैसा जुटाया जाएगा.
अमेरिका से क्यों उम्मीद नहीं
पाकिस्तान ने जुलाई में अमेरिका से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी (ESSF) मांगी थी. इसका मकसद सरकार को जरूरत के समय विदेशी मुद्रा की अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराना था. लेकिन अब इस प्रस्ताव पर सहमति की उम्मीद कमजोर दिखाई दे रही है. वित्त मंत्री औरंगजेब ने कहा कि जुलाई में अमेरिका से बातचीत का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान की दोबारा पहुंच बनाना था. यह लक्ष्य पूरा हो चुका है. सितंबर में पाकिस्तान ने 3 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे, जिनके लिए करीब 6 अरब डॉलर के आवेदन मिले. यानी निवेशकों ने पाकिस्तान के बॉन्ड में जारी रकम से दोगुनी दिलचस्पी दिखाई. औरंगजेब के मुताबिक अमेरिका की प्रस्तावित सुविधा मंजूर होती है तो पाकिस्तान को अतिरिक्त वित्तीय सहारा मिलेगा. लेकिन सरकार इसकी मंजूरी पर निर्भर नहीं है. उसने आगे यूरोबॉन्ड, चीन के बाजार में पांडा बॉन्ड और रुपये से जुड़े डॉलर भुगतान वाले बॉन्ड जारी करने की तैयारी की है.
विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 21.5 अरब डॉलर
पाकिस्तान सरकार का दावा है कि वित्तीय अनुशासन के कारण बजट घाटे और चालू खाते के घाटे पर नियंत्रण रखने में मदद मिली है. वित्त मंत्री के मुताबिक तेल और गेहूं के आयात पर ज्यादा खर्च के बावजूद चालू खाते का घाटा इस साल GDP के एक फीसदी के भीतर रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बाढ़ और क्षेत्रीय युद्ध के बावजूद देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21.5 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है.
वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने सीनेट समिति को बताया कि जून 2026 के अंत में पाकिस्तान का सार्वजनिक कर्ज GDP के 68.6 फीसदी पर आ गया, जो 2022-23 में 75.1 फीसदी था. पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक कर्ज की सालाना वृद्धि दर 7.7 फीसदी रही, जो 20 वर्षों में सबसे कम बताई गई है. अगस्त के अंत में पाकिस्तान का घरेलू कर्ज 58.8 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये था, जबकि विदेशी कर्ज करीब 98.2 अरब डॉलर पर स्थिर रहा. सरकार के मुताबिक, रोलओवर और पुराने कर्ज के पुनर्वित्त के बाद भी पाकिस्तान की शुद्ध वित्तीय जरूरत करीब 11 अरब डॉलर है. इसमें से 5 अरब डॉलर का भुगतान चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में किया जा चुका है. बाकी 6 अरब डॉलर अगले सात महीनों में चुकाने हैं.