अंगोला की राजधानी लुआंडा में उन देशों की मीटिंग हुई है, जिनकी जमीन के नीचे डायमंड का खजाना छिपा है. भारत इस मीटिंग की अध्यक्षता कर रहा था. बात सप्लाई चेन की हुई. हीरों को तराशने पर हुई. भारत की ताकत हीरे निकालने में नहीं, बल्कि उन्हें तराशकर चमकाने में है. दुनिया के 10 में से करीब 9 हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग भारत में होती है. गुजरात के सूरत में हजारों कारीगर छोटे-छोटे हीरों को तराशकर उन्हें दुनिया के बाजार तक पहुंचाते हैं. भारत चाहता है कि इस खेल में वह सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरे. इसलिए वह अफ्रीका से लेकर पूरी दुनिया में टॉप क्वालिटी हीरा उत्पादक देशों के साथ डील कर रहा है.
अफ्रीका में हुई इस मीटिंग को किम्बर्ली प्रोसेस का नाम दिया गया था. इसी के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में कच्चे हीरों का प्रोडक्शन 2024 में करीब 10.79 करोड़ कैरेट रहा. रूस ने सबसे ज्यादा हीरे निकाले. इसके बोत्सवाना, अंगोला और कनाडा का नंबर आया. ये पांच देश मिलकर दुनिया के कच्चे हीरों के उत्पादन का करीब 86% हिस्सा देते हैं. रूस अकेले दुनिया का लगभग एक-तिहाई कच्चा हीरा निकालता है. ज्यादा हीरा निकालने वाला देश जरूरी नहीं कि सबसे महंगे या सबसे अच्छी गुणवत्ता के हीरे भी निकालता हो. हीरे की कीमत उसकी चमक, रंग, आकार, पारदर्शिता और कटिंग की गुणवत्ता से तय होती है. इसलिए भारत के लिए केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किस तरह के हीरे मिल रहे हैं, यह भी अहम है.
भारत को सबसे ज्यादा कच्चा हीरा कहां से मिलता है?
भारत के लिए हीरों की सप्लाई सबसे ज्यादा संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE करता है. जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल यानी GJEPC की 2024-25 की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने UAE से करीब 68.77 करोड़ कैरेट इंपोर्ट किए. इनकी कीमत करीब 7.003 अरब डॉलर रही. यूएई में दुबई जैसे बड़े डायमंड ट्रेडिंग सेंटर हैं. वहां दुनिया के अलग-अलग देशों से हीरे आते हैं, उनकी खरीद-बिक्री होती है और फिर दूसरे देशों को भेजे जाते हैं.
रूस, बोत्सवाना और अंगोला भारत के लिए क्यों अहम?
भारत के हीरा कारोबार के लिए रूस, बोत्सवाना, अंगोला और कनाडा भी उतने ही अहम हैं, क्योंकि वहां से कच्चे हीरों की सप्लाई मिलती है. भारत में इन हीरों को काटा और तराशा जाता है. इसके बाद पॉलिश किए हुए हीरे अमेरिका, UAE, हांगकांग, बेल्जियम और दूसरे बाजारों में भेजे जाते हैं.
- रूस दुनिया का सबसे बड़ा हीरा उत्पादक है. यहां की कंपनी अलरोसा (ALROSA) दुनिया की प्रमुख हीरा खनन कंपनियों में शामिल है. रूस से मिलने वाले छोटे आकार के हीरे सूरत के कारीगरों के लिए खास होते हैं. हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से रूस के हीरों का कारोबार प्रभावित हुआ है. भारत का रूस से कच्चे हीरों का सीधा आयात भी घटा है.
- अफ्रीकी देश बोत्सवाना दुनिया के बड़े हीरा उत्पादकों में शामिल है. यहां से निकलने वाले हीरे की कीमत के लिहाज से भी बोत्सवाना अहम है. भारत ने 2024-25 में बोत्सवाना से करीब 49.58 करोड़ डॉलर के कच्चे हीरे आयात किए.
- अंगोला दुनिया के प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में शामिल है. 2024 में यहां करीब 1.40 करोड़ कैरेट कच्चे हीरे निकले. भारत अब इस देश के साथ कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है.
- कनाडा भी हीरे की बड़ी खान वाला देश है. 2024 में यहां करीब 1.33 करोड़ कैरेट कच्चे हीरे का उत्पादन हुआ. भारत ने 2024-25 में कनाडा से 41.26 करोड़ डॉलर के कच्चे हीरे आयात किए.
भारत हीरा मंगाता कितना है और बेचता कितना है?
भारत हीरे की खान वाला बड़ा देश नहीं है, लेकिन हीरे को तराशने और पॉलिश करने में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है. यानी भारत कच्चे हीरे विदेश से खरीदता है, उन्हें तैयार करता है और फिर दूसरे देशों को बेचता है. GJEPC की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कच्चे हीरे करीब 10.8 अरब डॉलर के आयात किए. वहीं, कटे और पॉलिश किए हुए हीरों का निर्यात करीब 13.29 अरब डॉलर रहा.
हालांकि हीरा कारोबार के लिए यह समय आसान नहीं है. फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में भारत के कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात में सालाना आधार पर 16.78% की गिरावट आई. निर्यात की कीमत करीब 15.97 अरब डॉलर से घटकर 13.29 अरब डॉलर रह गई. अमेरिका और चीन में मांग कमजोर रहने का असर पड़ा.
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच क्या हुआ समझौता?
भारत के जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और अफ्रीकी डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (ADPA) के बीच समझौता हुआ है. इसके तहत भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग और अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा. इस समझौते में हीरों की छंटाई, मूल्यांकन और निर्माण के काम में प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी साझा करने और कारोबार व निवेश के नए रास्ते खोलने पर जोर है. ADPA के सदस्य देश दुनिया के कुल हीरा उत्पादन में 60% से ज्यादा हिस्सेदारी रखते हैं. भारत को इस संगठन में पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है.
डायमंड कारोबार फिर चमकेगा
भारत की डायमंड इंडस्ट्री के सामने दो बड़े मौके हैं. पहला, अफ्रीका के हीरा उत्पादक देशों के साथ बेहतर रिश्ते बनाकर कच्चे हीरों की सप्लाई मजबूत करना. दूसरा, सूरत जैसे केंद्रों में हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग के काम को बढ़ावा देना. लेकिन इस कारोबार में चुनौती भी कम नहीं है. अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में मांग कमजोर रहने, रूस के हीरों पर प्रतिबंधों और लैब में तैयार होने वाले हीरों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कारोबार पर दबाव है. भारत के पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात में आई गिरावट इसी मुश्किल की ओर इशारा करती है.