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Bhuj Badi Recipe: देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में पारंपरिक खानपान केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की समृद्ध संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है. सर्दियों की दस्तक के साथ ही पहाड़ों में सदियों पुरानी विधियों से पारंपरिक पकवान और खाद्य सामग्री सहेजने का दौर शुरू हो जाता है. इन्हीं में सबसे खास पहचान रखती है सफेद पेठे और उड़द की दाल से तैयार होने वाली पारंपरिक ‘भुज की बड़ी’. बागेश्वर सहित समूचे कुमाऊं मंडल में सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पहाड़ी रसोई की शान बनी हुई है.
Bhuj Badi Recipe: उत्तराखंड के पहाड़ों में पारंपरिक खानपान की अपनी अलग पहचान है. यहां कई ऐसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जो स्वाद के साथ पहाड़ी जीवनशैली और पुरानी परंपराओं को भी दर्शाते हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है, सफेद पेठे और उड़द की दाल से बनने वाली भुज की बड़ी. पहाड़ों में इसे सर्दियों के लिए तैयार किया जाता है. धूप में सुखाकर बनाई जाने वाली ये बड़ियां लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती हैं, और जरूरत के अनुसार सब्जी के रूप में उपयोग की जाती हैं.
पेठे को तैयार करने की शुरुआती विधि
स्थानीय जानकार दिया टम्टा बताती हैं कि भुज की बड़ी बनाने की प्रक्रिया में स्थानीय सामग्री का उपयोग किया जाता है. इसके लिए सबसे पहले सफेद पेठे को अच्छी तरह धोकर छील लिया जाता है. इसके बाद उसे कद्दूकस किया जाता है, और उसका अतिरिक्त पानी निचोड़कर अलग कर दिया जाता है. पेठे से पानी निकालना जरूरी होता है, ताकि मिश्रण में नमी कम रहे और बड़ियां अच्छी तरह सूख सकें.
उड़द दाल का पेस्ट और सामग्री का मिश्रण
इसके बाद उड़द की दाल को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोया जाता है. भीगी हुई दाल को पीसकर उसका गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. फिर इस पेस्ट को कद्दूकस किए हुए पेठे में मिलाया जाता है. मिश्रण में स्वाद के अनुसार नमक, हींग और जीरा डाला जाता है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर एक समान मिश्रण तैयार किया जाता है.
धूप में सुखाने से बढ़ती है सुरक्षित रखने की अवधि
मिश्रण तैयार होने के बाद साफ कपड़े, थाली या किसी समतल सतह पर छोटी-छोटी बड़ियां बनाई जाती हैं. इन्हें कुछ दूरी पर रखा जाता है, ताकि हवा और धूप अच्छी तरह लग सके. इसके बाद बड़ियों को तीन से चार दिन तक तेज धूप में सुखाया जाता है. बड़ियां पूरी तरह सूख जाने के बाद इन्हें नमी से बचाकर साफ और सूखे डिब्बे या बर्तन में रखा जाता है. इस तरह तैयार की गई बड़ी जरूरत के समय उपयोग की जाती है. पहाड़ों में पहले से बड़ी बनाकर रखने की परंपरा रही है, जिससे सर्दियों में सब्जी तैयार करने में आसानी हो जाती है.
सब्जी के रूप में किया जाता है उपयोग
भुज की बड़ी को पकाने से पहले पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद इसे मसालों के साथ सब्जी के रूप में तैयार किया जाता है. इसका स्वाद सामान्य दाल या सब्जी से अलग होता है. पेठे की हल्की मिठास और उड़द की दाल का स्वाद इसे खास बनाता है. भुज की बड़ी आज भी कई परिवारों में बनाई जाती है. यह केवल एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और खानपान की विरासत का हिस्सा भी है.