अमरूद के पेड़ों में आ गए हैं फल? तुरंत करें ये उपाय वरना खराब हो सकती है फसल
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अमरूद की बागवानी करने वाले किसानों को फल आने के बाद खास सावधानी बरतने की जरूरत है. कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह के अनुसार, फल के नींबू के आकार का होते ही उसे फ्रूट बैग से ढक देना चाहिए. इससे फल मक्खी के हमले से बचाव में मदद मिलती है. जानें अमरूद के पौधों के बीच कितनी दूरी रखें, कितनी गोबर की खाद डालें और अच्छी पैदावार के लिए कौन से उपाय अपनाएं.
गोंडा: अगर आप भी अमरूद की बागवानी कर रहे हैं और आपके पेड़ों में फल आने लगे हैं, तो इस समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है. थोड़ी सी लापरवाही से अमरूद के फल खराब हो सकते हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में समय रहते कुछ जरूरी उपाय अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.
8 फीट की दूरी पर लगाएं अमरूद के पौधे
कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह बताते हैं कि अमरूद की बागवानी में पौधे से पौधे और लाइन से लाइन की दूरी लगभग 8 फीट रखनी चाहिए. इस दूरी पर एक एकड़ में करीब 670 पौधे लगाए जा सकते हैं. दूरी कम रखने पर अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उचित देखभाल जरूरी है. एक विकसित पौधे से करीब 50 किलो तक अमरूद का उत्पादन हो सकता है.
फल मक्खी से बचाने के लिए करें ये उपाय
डॉ. राम लखन सिंह बताते हैं कि जब अमरूद का फल नींबू के आकार का हो जाए, तो उसे फ्रूट बैग से ढक देना चाहिए. यह बैग पॉलीएथिलीन से बना होता है. इसके इस्तेमाल से फल मक्खी के हमले से बचाव होता है और फल की गुणवत्ता भी अच्छी बनी रहती है. इसके अलावा बाग में फ्रूट ट्रैप भी लगाए जा सकते हैं, जिससे कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
खाद और बोरॉन का करें प्रयोग: वैज्ञानिक बताते हैं कि अमरूद की प्रत्येक फसल की तुड़ाई के बाद पौधों में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए. एक साल पुराने पौधे में 10 किलो और दो साल पुराने पौधे में 20 किलो गोबर की खाद प्रति पौधा डालें. इसके अलावा बोरॉन का छिड़काव भी किया जा सकता है. इसके लिए 4 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. एक एकड़ में करीब 200 लीटर पानी की जरूरत होती है, जिसमें लगभग 800 ग्राम बोरॉन मिलाया जा सकता है.
सिंचाई और देखभाल भी जरूरी
प्रगतिशील किसान प्रवीण सिंह बताते हैं कि फल आने के बाद पेड़ों में जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और खेत में जलभराव न होने दें. समय-समय पर देसी खाद डालें और कीटों से बचाव के उपाय अपनाएं. बाग की नियमित निगरानी करने से फल खराब होने से बचाए जा सकते हैं और अच्छी गुणवत्ता की उपज प्राप्त हो सकती है. उन्होंने बताया कि हम अपने अमरूद के बागवानी में सहफसली करते हैं और किसान भाइयों से अपील करते हैं कि यदि अमरूद की बागवानी कर रहे हैं तो उसमें कुछ और जरूर लगाए ताकि उनका जगह का पूरा प्रयोग हो सके.