NEET PG में आएगा रैंक बेस्ड सिस्टम, हटेगा पर्सेंटाइल, NMC ने सुप्रीम कोर्ट में दिया प्रस्ताव


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NEET PG 2026 काउंसलिंग के बीच मेडिकल पीजी एडमिशन प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी है. NBEMS ने NEET PG और NEET SS के लिए पर्सेंटाइल आधारित एलिजिबिलिटी सिस्टम की जगह रैंक बेस्ड मेरिट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव दिया है.

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NEET PG : नीट पीजी राउंड-2 रजिस्ट्रेशन 6 नवंबर से होगा.

NEET PG : मेडिकल के पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट पीजी 2026 काउंसलिंग प्रोसस चल रहा है. पहले राउंड में सीट पाने वाले उम्मीदवारों के लिए 2 नवंबर तक रिपोर्टिंग की तारीख तय की गई थी. वहीं दूसरे राउंड का रजिस्ट्रेशन 6 नवंबर से 11 नवंबर तक होगा. इसी बीच 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि NBEMS ने नीट पीजी और नीट SS के लिए रैंक बेस्ड मेरिट सिस्टम अपनाने का प्रस्ताव दिया है. इससे फिलहाल जारी पर्सेंटाइल फॉर्मेट को हटा दिया जाएगा.

NBEMS ने यह जानकारी जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को एक याचिका के दौरान दी. इस याचिका में नीट पीजी 2025-26 के लिए कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम करने को चैलेंज किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए यह कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट की स्टडी करने और पक्षों को समिति के सुझावों पर अपना जवाब दाखिल करने का मौका देने के लिए ये फैसला लिया है.

NMC ने दी रैंक बेस्ड सिस्टम अपनाने की मंजूरी

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पर्सेंटाइल बेस्ड एलिजिबिलिटी लिमिट हटाकर रैंक-बेस्ड मेरिट सिस्टम अपनाने को भी मंजूरी दे दी है. इसके लिए स्टेकहोल्डर्स की राय मिलने के बाद, इस संबंध में एक ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया जाएगा. NMC के सेक्रेटरी ने इस प्रस्ताव के बारे में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज को एक लेटर लिखकर जानकारी भी दी है. NMC के सेक्रेटरी ने अपने बयान में यह भी कहा कि रैंक बेस्ड मेरिट सिस्टम लागू होने से पीजी काउंसलिंग के राउंड 2 और राउंड 3 के बीच का टाइम गैप कम हो जाएगा.

काउंसलिंग प्रक्रिया को डिजिटल करने की तैयारी

प्रस्ताव में मेडिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया है. इसके अलावा, NEET में परसेंटाइल कटऑफ में बहुत ज्यादा छूट न देने की सिफारिश की गई है, ताकि परीक्षा की अहमियत बनी रहे. प्रस्ताव के मुताबिक, बेहद खराब प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए. वहीं, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की दिशा में काम कर रही है.

उम्मीदवारों के लिए फ्रीज और फ्लोट के विकल्प

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के पोर्टल में किए जा रहे बदलावों के तहत, इस शैक्षणिक सत्र से उम्मीदवारों को ‘फ्रीज’ और ‘फ्लोट’ की दो श्रेणियों में रखा जाएगा. फ्रीज विकल्प चुनने वाले उम्मीदवारों को आवंटित सीट पर प्रवेश लेने या अपग्रेडेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा. वहीं, फ्लोट विकल्प चुनने वाले उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से अपनी आवंटित सीट स्वीकार कर सकेंगे.

यदि किसी उम्मीदवार को अपग्रेडेशन के तहत दूसरी सीट मिलती है, तो उसकी पुरानी सीट से रिलीव होने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन पूरी की जाएगी. इसके अलावा, उम्मीदवारों को फीस का भुगतान तभी करना होगा, जब उनका एडमिशन अंतिम रूप से सुनिश्चित हो जाएगा.



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