समुद्र में संकट : 5500 किलो खाना खाने वाली ब्लू व्हेल अचानक कहां गायब हो गईं?
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प्रशांत महासागर में स्थित गैलापागोस द्वीप समूह के आसपास से दुनिया की सबसे विशालकाय जीव नीली व्हेल अचानक गायब हो गई हैं. वैज्ञानिकों की एक टीम ने 9 महीने तक समंदर का चप्पा-चप्पा छाना, लेकिन उन्हें एक भी व्हेल नहीं मिली. रिसर्चर्स का मानना है कि अल नीनो के कारण समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ गया है. इसी वजह से व्हेल अपने पसंदीदा भोजन की तलाश में ठंडे पानी की ओर चली गई हैं.
गैलापागोस द्वीप से गायब हुईं विशालकाय ब्लू व्हेल, वैज्ञानिकों ने अल नीनो को बताया जिम्मेदार. (AI Generated Image)
प्रशांत महासागर में स्थित इक्वाडोर के मशहूर गैलापागोस द्वीप समूह से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. समंदर के सबसे विशालकाय जीव यानी नीली व्हेल इस पूरे इलाके से पूरी तरह गायब हो चुकी हैं. वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम ने लगातार नौ महीने तक समुद्र की खाक छानी. अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच चले इस बड़े अभियान में रिसर्चर्स एक भी नीली व्हेल को ढूंढने में कामयाब नहीं हो सके. यह वह इलाका है जहां दशकों से नीली व्हेल का बसेरा रहा है. वैज्ञानिक इन दैत्याकार जीवों पर सैटेलाइट टैग लगाकर उनके माइग्रेशन रूट को समझना चाहते थे. लेकिन महीनों की दिन-रात की तलाश के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा. इस रहस्यमय गैर-मौजूदगी ने मरीन बायोलॉजिस्ट्स की चिंता बढ़ा दी है. अब सामने आ रहा है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो ने इस पूरे इलाके का मिजाज बिगाड़ दिया है.
9 महीने तक समंदर में भटकने के बावजूद एक भी व्हेल क्यों नहीं मिली?
यूनिवर्सिटी सैन फ्रांसिस्को डी क्विटो के गैलापागोस साइंस सेंटर की रिसर्चर डेनिएला अलारकोन इस अभियान का नेतृत्व कर रही थीं. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने उन सभी इलाकों का सर्वे किया जहां ऐतिहासिक रूप से नीली व्हेल दर्ज की गई थीं. टीम को उम्मीद थी कि ज्यादा कोशिश करने पर कम से कम कुछ व्हेल तो जरूर नजर आ जाएंगी.
अलारकोन ने कहा, ‘हमने बहुत खोजा, बार-बार खोजा, लेकिन हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ.’ दरअसल अगस्त और सितंबर 2025 से ही लोकल नेटवर्क के जरिए मिलने वाली जानकारी कम होने लगी थी. मई और जून 2026 में दो बार व्हेल दिखने की अपुष्ट खबरें आई थीं. इसके बाद वैज्ञानिकों ने अपनी गश्त काफी तेज कर दी थी. इसके बावजूद किसी भी वैज्ञानिक को एक भी नीली व्हेल की झलक तक देखने को नहीं मिली. हंपबैक व्हेल की तरह नीली व्हेल तट के करीब नहीं आती हैं. वे इंसानी आबादी से बहुत दूर गहरे समंदर में रहना पसंद करती हैं.
अल नीनो के गर्म पानी ने समंदर में खड़ी कर दी है अदृश्य दीवार!
वैज्ञानिकों के अनुसार इस रहस्यमय गुमशुदगी का ताल्लुक अल नीनो से जुड़ा है. इस दौरान समुद्र की ऊपरी सतह का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस यानी 82 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था. वहीं 100 मीटर की गहराई पर भी पानी का तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. पानी का यह तापमान साल के इस समय के सामान्य स्तर से काफी ज्यादा गर्म था.
अलारकोन ने बताया कि यह असामान्य गर्म पानी व्हेल्स के लिए एक तरह से ‘टेंपरेचर बैरियर’ बन गया. तापमान की यह अदृश्य दीवार उन्हें गैलापागोस के पानी में आने और रुकने से रोक रही है. नीली व्हेल एक दिन में करीब 5,500 किलोग्राम क्रिल खा जाती हैं. क्रिल छोटे झींगा जैसे जीव होते हैं, जो व्हेल का मुख्य भोजन हैं. इतने विशाल शरीर को जिंदा रखने के लिए उन्हें भारी मात्रा में भोजन चाहिए होता है. गर्म पानी के चलते उनके पसंदीदा खाने का संकट खड़ा हो गया है.
भोजन की तलाश में आखिर किस दिशा की तरफ मुड़ गईं विशालकाय व्हेल?
मरीन बायोलॉजिस्ट जुआन पाब्लो मुनोज ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में समुद्र में ऐसी असामान्य स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी.
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