100 मीटर के दायरे में क्यों रहे संत त्यागी जी महाराज? जानिए कहानी
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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में गोमती नदी किनारे त्यागी जी महाराज का आश्रम आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है. कहा जाता है कि उन्होंने करीब साढ़े तीन साल तक खुद को 100 मीटर के दायरे में सीमित रखा. गुरु के आदेश पर यहां पहुंचे महाराज की तपस्या और सादगी की कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है.
सुल्तानपुर के कादीपुर खुर्द गांव में गोमती नदी किनारे त्यागी जी महाराज का आश्रम है. बताया जाता है कि उन्होंने करीब साढ़े तीन साल तक आश्रम की लगभग 100 मीटर की परिधि के बाहर कदम नहीं रखा.
मंदिर के पुजारी राजकुमार पांडे उर्फ रिंकू के मुताबिक, त्यागी जी महाराज अपने गुरु वनखंडी जी के आदेश पर जयसिंहपुर आश्रम से निकले थे. इसके बाद वे कादीपुर खुर्द पहुंचे और गोमती नदी के किनारे तपस्या शुरू की.
महाराज नदी किनारे बेहद साधारण जीवन जीते थे. उनका अधिकतर समय साधना और तपस्या में बीतता था. उनकी जीवनशैली ने आसपास के लोगों को प्रभावित किया.
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बताया जाता है कि गांव के लोग उनके लिए दाना-पानी और जरूरत का सामान लेकर आते थे. इन्हीं चीजों से वे अपना भोजन तैयार करते और आश्रम में रहते थे.
त्यागी जी महाराज के आश्रम की पहचान यहां बने हनुमान मंदिर से भी है. आसपास के श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
सुल्तानपुर के ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर आने वाले कुछ श्रद्धालु नाव से गोमती नदी पार कर आश्रम पहुंचते हैं. यहां हनुमान जी के दर्शन के साथ वार्षिक भंडारे में भी लोग शामिल होते हैं.