Last Updated:
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सोमवार को हुई बैठक में शहर के भीतर चार मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का फैसला किया है. इस मल्टीलेवल पार्किंग को बनाने में 431 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बताया जा रहा है कि इन चारों मल्टीलेवल पार्किंग में 15000 के करीब गाड़ियां पार्क हो सकती हैं. इसके अलावा एलडीए ने चालू वित्त वर्ष का बजट भी बढ़ा दिया है.
लखनऊ विकास प्राधिकरण का बड़ा फैसला.
लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोगों को सड़कों पर लगने वाले जाम से जल्द राहत मिलेगी. साथ ही पार्किंग की किल्लत भी दूर हो जाएगी. क्योंकि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में चार प्रमुख जगहों पर मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कराएगा. बीते सोमवार को एलडीए की 188वीं बोर्ड बैठक में 431 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे गई.
कहां-कहां बनेगी मल्टीलेवल पार्किंग
लखनऊ के विवेक खंड में एक मल्टीलेवल पार्किंग बनेगी. इससे गोमतीनगर के बाजार और शोरूम के बाहर सड़क पर लगने वाली बेतरतीब गाड़ियों से मुक्ति मिलेगी.
इकाना के पास मल्टीलेवल पार्किंग बनेगा. इससे मैच या बड़े आयोजनों के दौरान जुटने वाली गाड़ियों के लिए पार्किंग स्पेस मिलेगा और जाम थमेगा.
अंबेडकर पार्क के पास मल्टीलेवल पार्किंग तैयार की जाएगी. रोजाना आने वाले हजारों पर्यटकों को वाहन सड़क पर नहीं खड़ा करने पड़ेंगे.
इसके अलावा पत्रकारपुरम में भी मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएगी. इससे चिनहट और गोमती नगर विस्तार की बढ़ती आबादी के मद्देनजर स्थानीय बाजार की भीड़ को कंट्रोल किया जा सकेगा.
एलडीए का बढ़ाया गया बजट
बता दें कि एलडीए ने चालू वित्त वर्ष का बजट बढ़ाकर 10,185.52 करोड़ रुपये कर दिया है. मूल बजट में 9,186.87 करोड़ रुपये का प्रावधान था. लेकिन अक्तूबर 2026 तक ही एलडीए 9,210.51 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. वहीं वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए 3570.54 करोड़ रुपये का बजट भी पास किया गया है. इसमें से जमीन खरीद के लिए 3500 करोड़ रुपये रखे गए थे. पुनरीक्षित बजट में फिर 3500 करोड़ रुपये रखे गए हैं.
बैठक में 12 से अधिक परियोजनाओं को दी गई मंजूरी
बैठक में एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार, सचिव एसपी सिंह, अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा और सीपी त्रिपाठी समेत नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन के अफसर मौजूद रहे. सचिव ने बताया कि चारों पार्किंग में 15000 से अधिक वाहनों को पार्क करने की क्षमता होगी. इसके अलावा बोर्ड ने 12 से अधिक विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई.