Grow Potato At Home: घर की बालकनी या छत पर सब्जियां उगाने का शौक है, तो आलू का पौधा लगाना एक अच्छा एक्सपेरिमेंट हो सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए आपको बाजार से बीज खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में रखा एक स्वस्थ आलू भी नया पौधा उगाने के काम आ सकता है. आलू की आंखों यानी छोटे-छोटे उभरे हुए हिस्सों से नई कोंपलें निकलती हैं, जिनसे पौधा तैयार होता है.
हालांकि, सिर्फ आलू को मिट्टी में दबा देने से अच्छी फसल मिलने की गारंटी नहीं होती. सही आलू चुनने, गमले का साइज, मिट्टी और पानी का ध्यान रखना भी जरूरी है.
एक आलू से कैसे तैयार करें नया पौधा?
आलू को बीज की तरह इस्तेमाल करने का तरीका थोड़ा अलग है. इसके लिए आलू की सतह पर मौजूद छोटी-छोटी आंखों का होना जरूरी है. इन्हीं जगहों से अंकुर निकलते हैं और आगे चलकर पौधा बनता है. आप ऐसा आलू चुनें जिसमें कम से कम 2-3 स्वस्थ अंकुर निकल रहे हों.
ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा सड़ा हुआ, सिकुड़ा या नरम आलू न लें. बेहतर नतीजों के लिए बीमारी से मुक्त और खेती के लिए तैयार किया गया सीड पोटैटो इस्तेमाल करना अच्छा रहता है. बाजार में खाने के लिए मिलने वाले आलू में अंकुर निकलने से रोकने वाली दवा हो सकती है और उसमें बीमारी का खतरा भी हो सकता है.
गमले में आलू लगाने के लिए क्या चाहिए?
1. एक स्वस्थ अंकुर निकला आलू
2. कम से कम 12 इंच चौड़ा और गहरा गमला
3. अच्छी क्वालिटी की गार्डनिंग मिट्टी
4. वर्मी कंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई खाद
5. कोकोपीट
6. पानी देने के लिए स्प्रे बोतल या मग
गमले में नीचे की तरफ पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए. आलू की जड़ों को बढ़ने और नए आलू बनने के लिए जगह चाहिए, इसलिए छोटा गमला लेने से बचें.
गमले में आलू उगाने का सही तरीका
स्टेप 1: आलू में अंकुर निकलने दें
सबसे पहले आलू को ऐसी जगह रखें जहां उसे हल्की रोशनी मिलती रहे. कुछ समय बाद उसकी आंखों से छोटे अंकुर निकलने लगेंगे. जब अंकुर करीब 2-5 सेंटीमीटर के हो जाएं, तो आलू लगाने के लिए तैयार है.
स्टेप 2: गमले में मिट्टी तैयार करें
गमले में मिट्टी, कोकोपीट और वर्मी कंपोस्ट मिलाकर भरें. मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी आसानी से निकल सके और हवा भी पहुंचती रहे. गमले को ऊपर तक न भरें, बल्कि शुरुआती तौर पर आधा या थोड़ा ज्यादा भरें.
स्टेप 3: आलू को मिट्टी में लगाएं
अब अंकुर वाले आलू को गमले में रखें. ध्यान दें कि अंकुर ऊपर की तरफ रहें. इसके बाद आलू को करीब 5-7 सेंटीमीटर मिट्टी से ढक दें. हल्का पानी दें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे.
स्टेप 4: पौधा बढ़ने पर मिट्टी डालें
कुछ दिनों बाद मिट्टी से हरे अंकुर बाहर आने लगेंगे. जब पौधा करीब 5-6 इंच बड़ा हो जाए, तो उसके तने के आसपास थोड़ी और मिट्टी डालें. ध्यान रखें कि पौधे की ऊपरी पत्तियां मिट्टी से बाहर रहें.
इस तरीके को अर्थिंग अप (Earthing Up) कहते हैं. पौधा बढ़ने के साथ यह काम दोहराएं. इससे नए आलू धूप के संपर्क में आने से बचते हैं और मिट्टी के अंदर सुरक्षित रहते हैं.
आलू के पौधे की देखभाल कैसे करें?
आलू के पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे रोजाना अच्छी धूप मिले. मिट्टी में नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए. मिट्टी की ऊपरी परत सूखने लगे, तभी पानी दें.
पौधे की पत्तियों को समय-समय पर चेक करते रहें. अगर पत्तियों पर कीड़े या धब्बे दिखाई दें, तो उनकी वजह पहचानकर सही उपाय करें. जरूरत से ज्यादा खाद डालने से भी बचें.
एक जरूरी बात यह है कि मिट्टी के ऊपर दिखाई देने वाले हरे आलू को कभी खाने के लिए इस्तेमाल न करें. धूप के संपर्क में आने से आलू हरे हो सकते हैं और उनमें नुकसान पहुंचाने वाले तत्व बढ़ सकते हैं.
कितने दिन में तैयार होंगे आलू?
आलू की फसल तैयार होने का समय उसकी किस्म और मौसम पर निर्भर करता है. आमतौर पर शुरुआती किस्मों में करीब 10-12 हफ्ते लग सकते हैं, जबकि कुछ किस्मों को तैयार होने में 4-5 महीने भी लगते हैं.
जब पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगें और तना सूखने लगे, तो यह आलू की खुदाई का संकेत हो सकता है. ऐसे में पानी देना बंद कर दें और कुछ दिन बाद गमले की मिट्टी को धीरे-धीरे हटाकर आलू निकालें.
भारत में कब लगाएं आलू?
मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आलू की रबी फसल लगाने का समय आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच रहता है. इसलिए नवंबर का महीना गमले में आलू उगाने की शुरुआत के लिए अच्छा हो सकता है. हालांकि, बहुत ज्यादा गर्मी या पाला पड़ने की स्थिति में पौधे की खास देखभाल करनी होगी.