मसूरी की भीड़ से दूर घूमने पहुंचें बार्लोगंज, दून घाटी और विंटर लाइन का अद्भुत नजारा बना देगा आपका दिन

मसूरी की भीड़ से दूर घूमने पहुंचें बार्लोगंज, दून घाटी और विंटर लाइन का अद्भुत नजारा बना देगा आपका दिन


मसूरी: मसूरी घूमने आने वाले ज्यादातर पर्यटक मॉल रोड की ओर जाते हैं, लेकिन यहां की भीड़, जाम और शोर से दूर भी एक ऐसी जगह है, जहां पहाड़ों का असली सुकून महसूस किया जा सकता है. इस जगह का नाम है बार्लोगंज. यहां चीड़ के जंगल, हरियाली से घिरे रास्ते और शांत माहौल लोगों को अपनी ओर खींचते हैं. साथ ही यहां से दून घाटी का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है.

बार्लोगंज में घूमने के साथ-साथ यहां के पुराने इतिहास और मशहूर स्कूलों को भी करीब से जानने का मौका मिलता है. ब्रिटिश दौर की इमारतें, पुराने एस्टेट और ऐतिहासिक बोर्डिंग स्कूल इस जगह को खास बनाते हैं. यही वजह है कि अब मसूरी आने वाले पर्यटक बार्लोगंज की ओर भी रुख कर रहे हैं.

कर्नल बार्लो के नाम पर पड़ा बार्लोगंज का नाम

इतिहासकार अजय शर्मा बताते हैं कि बार्लोगंज का नाम कर्नल चार्ल्स ग्रांट बार्लो के नाम पर पड़ा है. यहां आज भी ब्रिटिश काल की कई पुरानी इमारतें, बड़े एस्टेट और पत्थरों से बनी इमारतें देखने को मिलती हैं. ये इमारतें उस दौर के इतिहास की याद दिलाती हैं. इतिहास के अनुसार, 1867 में स्थापित मशहूर क्राउन ब्रेवरी भी यहीं स्थित थी. अजय शर्मा बताते हैं कि ब्रिटिश काल में देहरादून से मसूरी पहुंचने के लिए झड़ीपानी वाला रास्ता इस्तेमाल किया जाता था. इसी रास्ते पर बार्लोगंज पड़ता है. उस समय देहरादून से मसूरी तक रेलवे ट्रैक बनाने की योजना भी थी. बार्लोगंज में इसका एक स्टेशन बनाया जाना था, लेकिन एक हादसे के कारण यह परियोजना बीच में ही रुक गई और ट्रेन यहां तक नहीं पहुंच पाई. बार्लोगंज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सेंट जॉर्ज कॉलेज, हिल बर्ड स्कूल और ओक ग्रोव स्कूल जैसे संस्थान भी बनाए गए.

ऐतिहासिक बोर्डिंग स्कूलों के लिए भी मशहूर है बार्लोगंज

बार्लोगंज की पहचान सिर्फ इसके खूबसूरत नजारों तक सीमित नहीं है. यह अपने पुराने और प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूलों के लिए भी जाना जाता है. यहां 1888 में स्थापित सेंट जॉर्ज कॉलेज और 1870 में स्थापित ओक ग्रोव स्कूल स्थित हैं. ओक ग्रोव स्कूल को देश का पहला रेलवे हिल स्कूल बताया जाता है. इन स्कूलों की पुरानी इमारतें, लाल छतें, हरे-भरे मैदान और शांत माहौल बार्लोगंज को एक अलग पहचान देते हैं. यहां आने वाले पर्यटक इन ऐतिहासिक इमारतों को भी देख सकते हैं.

पर्यटकों को पसंद आ रहा यहां का शांत माहौल

नोएडा से मसूरी घूमने आईं पर्यटक हिमानी शर्मा बताती हैं कि वह तीन दिन तक मॉल रोड पर रुकी थीं, लेकिन वहां उन्हें काफी भीड़ मिली. बार्लोगंज पहुंचने के बाद उन्हें लगा कि वह सच में पहाड़ों के बीच आई हैं. हिमानी के मुताबिक, यहां का मौसम नोएडा के मुकाबले काफी अच्छा है. उन्हें यहां के रास्तों पर फैली हरियाली भी पसंद आई. रास्ते में उन्होंने पहाड़ों वाली मैगी का स्वाद लिया. उनका कहना है कि शाम के समय यहां घूमने का अलग ही मजा है. यहां से दून घाटी का साफ और सुंदर नजारा दिखाई देता है, जिसे घंटों बैठकर देखा जा सकता है. बार्लोगंज के कैफे में बैठकर चाय पीना भी उनके लिए अच्छा अनुभव रहा. अब स्थानीय गाइड भी पर्यटकों को बार्लोगंज घुमाने लेकर आ रहे हैं.

शाम के समय दिखती है खूबसूरत विंटर लाइन

बार्लोगंज आने वाले पर्यटकों के लिए यहां की विंटर लाइन भी खास आकर्षण है. शाम ढलने के साथ आसमान में नारंगी और लाल रंग की एक खूबसूरत लकीर दिखाई देती है. यह नजारा पर्यटकों और फोटोग्राफी पसंद करने वालों को खूब आकर्षित करता है. अगर आप मसूरी घूमने जा रहे हैं और मॉल रोड की भीड़ से अलग कुछ समय शांति में बिताना चाहते हैं, तो बार्लोगंज की सैर कर सकते हैं. यहां की हरियाली, पुराने रास्ते और दून घाटी का नजारा आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं.



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