छठ पर क्यों याद की जाती हैं माता सीता? भगवान राम के दोष निवारण से जुड़ी है मुंगेर के इस घाट की मान्यता


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Mata Sita Chhath Vrat: जमुई के कलाकार देवेंद्र सिंह ने माता सीता द्वारा मुंगेर में किए गए छठ व्रत की पौराणिक कथा पर एक नया गीत लिखा है. भगवान राम पर लगे ब्रह्म हत्या के दोष के निवारण के लिए माता सीता ने यह व्रत किया था. यहां माता सीता का चरण मंदिर है और वह घाट भी मौजूद है.

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 छठ पर क्यों याद आती हैं माता सीता? भगवान राम के दोष से है इस घाट की मान्यताZoom

जमुई: छठ को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. बिहार में जितने आस्था के साथ छठ का व्रत किया जाता है, उतनी ही आस्था के साथ छठ व्रत की कथा भी सुनाई जाती है. इनमें से एक कथा माता सीता के छठ करने को लेकर भी है. कहा जाता है कि माता सीता ने मुंगेर के कष्टहरनी घाट पर छठ का व्रत किया था. उन्होंने भगवान राम के ऊपर लगे एक दोष के निवारण के लिए यह व्रत किया था.

इस पूरी कथा पर जमुई के कलाकार देवेंद्र सिंह ने एक पूरा गीत लिखा है, जिसमें उन्होंने इस कथा का वर्णन किया है. उन्होंने अपने गीत के माध्यम से माता सीता के व्रत करने तथा छठ की पूरी महत्ता को दर्शाया है. बता दें कि देवेंद्र सिंह पिछले 40 सालों से शास्त्रीय संगीत से जुड़े हैं और लोकगीतों को बढ़ावा देते हैं. इसी कड़ी में उन्होंने माता सीता के छठ व्रत करने की इस कथा का जिक्र गीत के माध्यम से किया है.

जानिए माता सीता ने क्यों किया था छठ का व्रत

देवेंद्र सिंह बताते हैं कि पौराणिक कथाओं में ऐसा कहा जाता है कि माता सीता ने मुंगेर में आकर छठ व्रत किया था. आज भी यहां सीता का चरण मंदिर है. वह घाट भी मौजूद है, जहां माता सीता के चरण पड़े थे और जहां उन्होंने छठ का व्रत किया था. उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम जब लंका विजय करके अयोध्या लौटे, तो उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि उन्हें एक बहुत बड़ा दोष लग गया है.

उन्होंने बताया कि लंका में भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और रावण ब्राह्मण था. शास्त्रों में ब्रह्म हत्या को पाप माना जाता है और इसका दोष लगता है. भगवान श्री राम पर भी ब्रह्म हत्या का दोष लगा था. फिर जब वह अयोध्या लौटे तब उन्हें इस बात की जानकारी हुई. तब माता सीता ने भगवान राम के ऊपर लगे इस दोष के निवारण के लिए छठ का व्रत किया था. उन्होंने कहा कि वह मुंगेर आई थी और आज भी यहां लोग इस पौराणिक कथा को बड़े ही भाव के साथ छठ के दौरान सुनते हैं.

इसी कथा पर लिख दिया है गीत

देवेंद्र सिंह ने कहा कि आज की वर्तमान पीढ़ी छठ को लेकर भले ही जागरुक है. पर वह पौराणिक कथाओं से दूर होते जा रहे हैं. लोग छठ का महत्व तो समझते हैं और छठ के प्रति आदर का भाव भी रखते हैं, लेकिन उन्हें इन कथाओं को भी जानना जरूरी है. इसी उद्देश्य से उन्होंने इस गीत की रचना की है. जिसमें उन्होंने इस पूरी कथा का वर्णन किया है.

उन्होंने बताया कि छठ के दौरान इन कथाओं का महत्व होता है और लोगों को यह कथाएं सुननी भी चाहिए. उन्होंने इस तरीके के कई सारे गीत लिखे हैं. जिसमें यह गीत बहुत लोकप्रिय है और लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं. देवेंद्र सिंह का कहना है कि छठ के दौरान लोकगीतों का बहुत महत्व है. पारंपरिक छठ गीत लोग बड़े ही भाव के साथ सुनते हैं, और छठ के दौरान यह गीत बजते भी हैं. इसे लेकर उन्होंने इस गीत के रचना की है तथा इसे यूट्यूब पर लॉन्च किया है.



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