दिवाली के दीयों से पहले जल गए घर, श्रीनगर में राख हुए 80 आशियाने, दो लोगों की मौत

दिवाली के दीयों से पहले जल गए घर, श्रीनगर में राख हुए 80 आशियाने, दो लोगों की मौत


दिवाली से पहले जम्मू-कश्मीर में आग का तांडव देखने को मिला है. श्रीनगर में दिवाली के दीयों के जलने से पहले 80 लोगों के आशियाने जलकर राख हो गए. इतना ही नहीं भीषण आग में दो कबाड़ इकट्ठा करने वाले लोगों की भी मौत हो गई है. ये सभी घर अस्थायी शेल्टर थे जो जलकर खत्म हो गए. अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर के बेमिना के दुर्बल में सुबह-सुबह अस्थायी शेल्टर में लगी भीषण आग में दो कबाड़ इकट्ठा करने वालों की मौत से इलाके में कोहराम मचा हुआ है.

अधिकारियों ने बताया, “आग रात करीब 12:23 बजे लगी, जिसने तिरपाल और लकड़ी से बने करीब 80 अस्थायी शेल्टरों को अपनी चपेट में ले लिया. आग में एक खाली पोल्ट्री फार्म और एक टिपर को भी नुकसान हुआ है.”

अधिकारियों ने बताया, “फायर स्टेशन जेवीसी और रावलपोरा से फायर टेंडर, साथ ही फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज हेडक्वार्टर बटमालू से अतिरिक्त मदद के लिए बुलाए गए, ताकि आग पर काबू पाया जा सके.”

चश्मदीदों ने बताया कि आग बुझाने के लिए फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज को बुलाने से पहले ही आग पूरे इलाके में फैल चुकी थी. आग पर काबू पाने के बाद मलबे से दो लाशें मिलीं. मरने वाले दोनों लोग दिल्ली के रहने वाले थे. उनकी पहचान मोहम्मद नूर आलम (27) और अल अमीन (16) के तौर पर हुई. दोनों बेमिना के दुर्बल में स्क्रैप इकट्ठा करने का काम करते थे.

अधिकारियों ने कहा, “एफएसएल की कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों शव स्थानीय पुलिस को सौंप दिए गए. आग लगने की वजह का अभी पता नहीं चला है. पुलिस ने इस घटना में केस दर्ज कर लिया है.”

इन दिनों घाटी में सूखे मौसम की वजह से आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती हैं. अधिकारियों ने कहा है कि लगभग 80 से 95 प्रतिशत आग लगने की वजह इंसानी गतिविधियां होती हैं.

बिना देखरेख के या ठीक से न बुझाए गए कैंपफायर आग लगने का एक मुख्य कारण हैं. गाड़ियों से या चलते समय लापरवाही से फेंके गए सिगरेट के टुकड़े, यार्ड का कचरा, कूड़ा, या खेती/काट-छांट कर जलाए गए खेत जो काबू से बाहर हो जाते हैं, चेनसॉ, गाड़ियों, या सूखी सड़कों पर टो चेन खींचने से निकलने वाली चिंगारी, और गिरी हुई बिजली की लाइनें, ये सभी अचानक आग लगने के बड़े कारण हैं.



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