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Dehradun Jenny case : पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढती नजर आ रही है. असम की रहने वाली जेनी का मुद्दा एक बार फिर से गर्म है. जेनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है. जिसमें वह कह रही हैं कि वह असम की रहने वाली हैं। साल 2003 के एक मामले को लेकर आज भी उत्तराखंड के नेता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जब जैनी मामले पर टिप्पणी की, तब से मामला दोबारा गर्म है.
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देहरादून: पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढती नजर आ रही है. असम की रहने वाली जेनी का मुद्दा एक बार फिर से गर्म है. जेनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है. जिसमें वह कह रही हैं कि वह असम की रहने वाली हैं। साल 2003 के एक मामले को लेकर आज भी उत्तराखंड के नेता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जब जैनी मामले पर टिप्पणी की, तब से मामला दोबारा गर्म है.
दरअसल, मार्च 2003 में असम की जिस अनब्याही युवा लड़की इंद्राणी देवड़ी उर्फ जेनी ने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दी थी. उस जैनी का एक ताजा वीडियो फिर से सामने आया है. 23 साल पहले जेनी के बच्चे के कथित पिता होने का आरोप तब ND तिवारी सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत पर लगा था. जिसके चलते उनको राजनीतिक वनवास के साथ CBI जाँच का सामना करना पड़ा था. कुछ दिनों पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जब जेनी मामले पर टिप्पणी की, तब से मामला दोबारा गर्म है. जेनी ने अपने वीडियो में कहा है कि कौन क्या है, उसका खुलासा वो जल्द करेगी.
नेता नाम का कर रहे इस्तेमाल
हरक सिंह चूंकि विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मैनेजमेंट टीम के मुखिया है, लिहाजा पार्टी के लिए मामला फूंक फूंक कर लस्सी पीने जैसा हो गया है. वहीं बीजेपी को मुखर होने का मौका मिला है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जेनी कह रही हैं कि वह असम की रहने वाली हैं. साल 2003 के एक मामले को लेकर आज भी उत्तराखंड के नेता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे कहती नजर आ रही है कि एक-दूसरे पर आरोप लगाकर गंदी राजनीति हो रही है. इतने साल बाद भी उनके नाम पर बातें चल रही हैं. किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि उस समय उनके साथ क्या हुआ था.
अपनी जुबान से बताएंगी मामले की सच्चाई
उनके बारे में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. बदनाम किया जा रहा है. उनके पास सबूत है. किसने क्या किया और क्या नहीं किया, इसकी जानकारी उन्हें है. वे अपनी बात सबूतों के साथ लोगों के सामने रखेंगी और बताएंगी कि साल 2003 में क्या हुआ था. उन्होंने नेताओं से अपील की है कि उनके नाम पर एक-दूसरे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप न करें. वे अपनी जुबान से पूरे मामले की सच्चाई बताएंगी. इसके लिए उन्हें वक्त चाहिए. बतातें चले कि जेनी के बच्चे के DNA टेस्ट कराने के सवाल को लेकर हरक सिंह और बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बयानबाजी कर चुके हैं. बरहाल कांग्रेस की चिंता ये है कि चुनावी मौसम में ये मसला कहीं उनकी लड़ाई को कुंद न कर दे, वहीं बीजेपी तेल और तेल की धार देख रही है.