अग्निवीरों को लेकर नया अपडेट, जनरल पांडे ने गिनाए फायदे, बोले- मिला दूसरा मौका
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पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने केंद्र सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसके तहत 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जा रहा है. News18 India से खास बातचीत में जनरल पांडे ने कहा कि यह कदम सेना की ऑपरेशनल और संगठनात्मक जरूरतों को मजबूती देने की दिशा में बेहद अहम है. उन्होंने कहा कि चार साल की सेवा के बाद मिलने वाला यह अतिरिक्त अवसर सैनिकों को अपनी योग्यता और पेशेवर दक्षता साबित करने का एक बेहतरीन मौका प्रदान करेगा. साथ ही, इससे तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल तैयारी और कार्यक्षमता भी बेहतर होगी.
पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिए जाने के फैसले का स्वागत किया है. (File Photo / Source: PTI)
नई दिल्ली: अग्निपथ योजना के तहत बाकी बचे 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने के केंद्र सरकार के फैसले का पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला सेना की ऑपरेशनल और संगठनात्मक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम कदम है. इससे सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारियों और क्षमता को मजबूती मिलेगी.
News18 India से बातचीत में जनरल मनोज पांडे ने कहा कि चार साल की शुरुआती सेवा के बाद अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त मौका देना और इसके बाद नियमित सैनिक बनने का विकल्प उपलब्ध कराना सेना की एक अहम जरूरत को पूरा करता है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल एफिशिएंसी और संगठनात्मक दक्षता के लिहाज से सशस्त्र बलों की यह मांग थी, जो इस फैसले से काफी हद तक पूरी हुई है. मेरे विचार से यह एक सकारात्मक और अच्छा कदम है.
अनुभव के आधार पर बदलाव और सुधार
- पूर्व सेना प्रमुख मनोज पांडे ने बताया कि जब चार साल पहले अग्निपथ योजना लाई गई थी, तब यह स्पष्ट था कि अनुभव के आधार पर भविष्य में इसमें बदलाव और सुधार किए जा सकते हैं.
- उन्होंने कहा कि शुरुआत में 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान किया गया था. लेकिन समय के साथ तीनों सेनाओं ने अग्निवीरों के प्रदर्शन का आकलन किया.
- इस आकलन में अग्निवीरों की शारीरिक क्षमता, प्रेरणा और पेशेवर दक्षता जैसे क्षेत्रों में उनका प्रदर्शन अच्छा पाया गया.
- जनरल पांडे के मुताबिक, तीनों सेनाओं से मिले सकारात्मक फीडबैक और अनुभव के आधार पर ही यह बदलाव किया गया है.
औसत उम्र को कम करना है मकसद
यह पूछे जाने पर कि क्या इस फैसले से भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूती मिलेगी. इस सवाल के जवाब में जनरल पांडे ने कहा कि अग्निपथ योजना का एक प्रमुख उद्देश्य सेना की औसत उम्र कम करना और उसे युवा बनाना था. हालांकि, उन्होंने कहा कि सेना के लिए प्रशिक्षित जवानों को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि ऑपरेशनल तैयारी और कार्यक्षमता बरकरार रहे.
काबिलियत साबित करने का नया मौका
उन्होंने कहा कि इस बदलाव के जरिए मुझे लगता है कि सेना की इस जरूरत का एक अच्छा समाधान निकाला गया है. जनरल पांडे ने यह भी कहा कि दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल अग्निवीरों को अपनी काबिलियत साबित करने का एक और अवसर देगा. इससे उन्हें नियमित सैनिक बनने की दावेदारी मजबूत करने का मौका मिलेगा. उन्होंने कहा कि जब आप अग्निवीरों को दो साल और देते हैं, तो उन्हें अपनी योग्यता साबित करने का अतिरिक्त अवसर मिलता है. सीडीएस ने भी कहा है कि अग्निवीरों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है और वे काफी प्रतिस्पर्धी हैं.
अग्निवीरों को 2 साल के अतिरिक्त कार्यकाल
गौरतलब है कि सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने हाल ही में बताया था कि कैबिनेट ने बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए दो साल के दूसरे कार्यकाल को मंजूरी दी है. इस अवधि के दौरान उन्हें बेहतर पारिश्रमिक और अतिरिक्त सेवा निधि का लाभ भी मिलेगा. इसके बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने पर निर्भर करेगा.