Ishaq Dar Pakistan Gangrape Case : पाकिस्तान ‘गैंगरेप’ केस में डिप्टी पीएम इशाक डार का रिश्तेदार बरी, 3 छोटे कर्मचारियों को फंसा दिया

Ishaq Dar Pakistan Gangrape Case : पाकिस्तान ‘गैंगरेप’ केस में डिप्टी पीएम इशाक डार का रिश्तेदार बरी, 3 छोटे कर्मचारियों को फंसा दिया


पाकिस्तान के लाहौर में दो विदेशी महिलाओं के साथ हुए हाई-प्रोफाइल गैंगरेप और रंगदारी केस में एक चौंकाने वाला ट्विस्ट आया है. स्थानीय अधिकारियों द्वारा अदालत में पेश की गई एक जांच रिपोर्ट में मामले के 5 मुख्य आरोपियों को यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से मुक्त कर दिया गया है. दावा किया जा रहा है कि अजीब तरह से आरोपियों को छोड़े जाने के पीछे पॉलिटिकल प्रेशर भी हो सकता है. बता दें कि जिन लोगों को रेप के आरोपों से बरी किया गया है, उनमें पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार का एक रिश्तेदार भी शामिल है.

क्या है विदेश महिलाओं से गैंगरेप का पूरा मामला?

अदालत में जमा की गई इस चालान रिपोर्ट के सामने आते ही पाकिस्तान के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में भूचाल आ गया है. जहां एक तरफ रसूखदार आरोपियों को रेप केस में क्लीन चिट दे दी गई है, वहीं दूसरी तरफ पूरे मामले का ठीकरा तीन छोटे कर्मचारियों के सिर फोड़ दिया गया है.

इस खौफनाक वारदात की शुरुआत साल 2025 में हुई थी. दोनों विदेशी महिलाओं की मुलाकात सिंगापुर में इस मामले के मुख्य आरोपी से हुई थी. आरोपी ने महिलाओं को एक क्रिप्टो करेंसी इन्वेस्टमेंट स्कीम में भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया.

शुरुआती दिनों में जब महिलाओं को निवेश पर अच्छा रिटर्न मिला, तो उनका भरोसा बढ़ गया. इसके बाद एक पीड़िता ने इस स्कीम में लगभग 4 करोड़ रुपए से ज्यादा का बड़ा निवेश कर दिया. जब तय समय बीतने के बाद भी रिटर्न नहीं मिला, तो महिलाओं ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए. आरोपी ने पैसे लौटाने या एक बड़े निवेशक से मुलाकात कराने के बहाने दोनों विदेशी महिलाओं को जून में पाकिस्तान आने का झांसा दिया.

लाहौर में बंधक बनाकर पिस्टल की नोक पर वसूली

झांसे में आकर जब दोनों विदेशी महिलाएं पाकिस्तान पहुंचीं, तो उनके साथ जो हुआ उसने रोंगटे खड़े कर दिए. 29 जून को दोनों महिलाओं को लाहौर के पॉश इलाके डिफेंस फेज-VII स्थित एक मकान में ले जाया गया. वहां पहुंचते ही माहौल बदल गया. दोनों महिलाओं को पिस्टल की नोक पर अवैध रूप से बंधक बना लिया गया. आरोपियों ने हथियार दिखाकर महिलाओं को डराया-धमकाया और उनसे लगभग 19,500 डॉलर जबरन ट्रांसफर करवा लिए.

1 जुलाई को जब महिलाओं को ले जाया जा रहा था, तब भाटा चौक के पास उनकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो गया. इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर दोनों महिलाएं आरोपियों के चंगुल से भाग निकलने में सफल रहीं. इसके बाद उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई. मामला दर्ज कराने के बाद दोनों महिलाएं 3 जुलाई को पाकिस्तान छोड़कर अपने देश लौट गईं.

क्या है पुलिस चालान का सच? बड़े नाम बरी, छोटे कर्मचारी फंसे

पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के पास से रंगदारी के 43 लाख रुपये नकद, एक गाड़ी, मोबाइल फोन, पिस्टल और एक राइफल जब्त की. लेकिन जब जांच रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में पेश हुई तो उसने सबको हैरान कर दिया.

मुख्य 5 आरोपी रेप के आरोपों से बरी: डिप्टी पीएम इशाक डार के रिश्तेदार और इस पूरे नेटवर्क के सरगना समेत 5 मुख्य आरोपियों को यौन उत्पीड़न के आरोपों से मुक्त कर दिया गया. पुलिस का कहना है कि इनके खिलाफ रेप के ‘पुख्ता सबूत’ नहीं मिले हैं. हालांकि, इन पर अवैध रूप से बंधक बनाने और रंगदारी वसूलने का केस चलता रहेगा.

तीन छोटे कर्मचारी बनाए गए मुख्य आरोपी: चालान में यौन उत्पीड़न का पूरा आरोप मुख्य आरोपी के यहां काम करने वाले 3 बेहद कम वेतन पाने वाले छोटे कर्मचारियों पर डाल दिया गया है.

कवर-अप का आरोप: क्या रसूखदारों को बचाने के लिए बने ‘बलि का बकरा’?

जांच रिपोर्ट में किए गए इस फेरबदल के बाद आरोपी कर्मचारियों के वकीलों ने पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. बचाव पक्ष के वकीलों का आरोप है कि ये कोई सामान्य जांच रिपोर्ट नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से पावरफुल लोगों को बचाने के लिए किया गया एक सुव्यवस्थित ‘कवर-अप’ यानी मामला दबाने का खेल है.

वकीलों का तर्क है कि सत्ता और शासन में बैठे रसूखदार लोगों और नेता के रिश्तेदार को साफ-सुथरा निकालने के लिए बेकसूर और गरीब कर्मचारियों को ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है.

फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार: अधूरा चालान क्यों हुआ पेश?

अधिकारियों ने अदालत को बताया कि मामले की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है.

  • डीएनए (DNA) एनालिसिस रिपोर्ट
  • फिंगरप्रिंट (अंगुलियों के निशान) मैचिंग
  • पॉलिग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट का रिजल्ट
  • कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR)
  • धारा 164 के तहत दर्ज अदालती बयान

इन सभी महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स के पेंडिंग होने के कारण पुलिस को अदालत के समक्ष ‘अधूरा चालान’ दाखिल करना पड़ा.

पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

इस केस ने पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक दबाव में काम करने वाली जांच एजेंसियों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या वाकई सबूतों की कमी के कारण डिप्टी पीएम के रिश्तेदार को क्लीन चिट मिली है या फिर सत्ता के दबाव में जांच की दिशा मोड़ दी गई?

ट्रायल कोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली औपचारिक सुनवाई के लिए 11 नवंबर की तारीख तय की है. अब देखना ये होगा कि आने वाली फोरेंसिक रिपोर्ट्स और अगली सुनवाई में इस हाई-प्रोफाइल केस का क्या रुख होता है.



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