BULLET TRAIN Image: मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन कैसे बन रही आप खुद देख‍िए, 280KM की होगी रफ्तार, बॉडी की मजबूती का भी हुआ टेस्ट

BULLET TRAIN Image: मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन कैसे बन रही आप खुद देख‍िए, 280KM की होगी रफ्तार, बॉडी की मजबूती का भी हुआ टेस्ट


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जिस बुलेट ट्रेन को हम अब तक सिर्फ जापान या यूरोप के वीडियो में देखकर अचंभित होते थे, वह अब हमारे अपने देश में, हमारे अपने इंजीनियरों के हाथों आकार ले रही है. पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक और भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से डिजाइन की जा रही इस हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन का निर्माण जोरों पर है. 280 क‍िलोमीटर प्रत‍ि घंटे की रफ्तार वाली इस ट्रेन का हाल ही में स्क्वीज टेस्ट क‍िया गया. यानी इसकी बॉडी की मजबूती का टेस्‍ट क‍िया गया. आप खुद देख‍िए कैसे इसे बनाया जा रहा.

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आत्मनिर्भर भारत की यह गौरवशाली कहानी बेंगलुरु स्थित बीईएमएल (BEML) के कारखाने में लिखी जा रही है. विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय, देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण पूरी तरह से यहीं हो रहा है. यही वो ट्रेन है जो आने वाले समय में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर भारत की रफ्तार का नया अध्याय लिखेगी.

यह सिर्फ पुर्जों को जोड़ने का काम नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण स्वदेशी निर्माण है. ट्रेन का ढांचा यानी अंडरफ्रेम, उसकी मजबूत साइड वॉल और छत (रूफ) को भारत में ही अत्याधुनिक मशीनों से गढ़ा जा रहा है. इन सभी हिस्सों को एक साथ जोड़कर जो ‘कार बॉडी’ तैयार की जा रही है, वह भारतीय इंजीनियरिंग का लोहा मनवाने के लिए काफी है.

300 किलोमीटर प्रति घंटे के करीब दौड़ने वाली ट्रेन का ढांचा किसी फौलाद से कम नहीं होना चाहिए. इसी बात को साबित करने के लिए हमारी बुलेट ट्रेन की कार बॉडी का महा-परीक्षण यानी ‘स्क्वीज़ टेस्ट’ किया गया. विशेष मशीनों से ढांचे पर भयानक दबाव डालकर यह परखा गया कि मुश्किल से मुश्किल हालात और तेज़ रफ्तार में भी इसका सुरक्षा कवच टूटेगा नहीं. हमारी ट्रेन इस कड़े इम्तिहान में भी अव्वल दर्जे की साबित हो रही है.

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देश की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जायजा लेने खुद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बेंगलुरु के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पहुंचे. उन्होंने भारत में बन रही इस ‘बुलेट ट्रेन B28’ के निर्माण कार्य को अपनी आंखों से देखा. रेल मंत्री ने स्क्वीज़ टेस्ट का शानदार प्रदर्शन देखने के साथ-साथ, ट्रेन को जोड़े जाने की फाइनल असेंबली और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग सिस्टम की भी बारीकी से समीक्षा की.

अगर इस भव्य बुलेट ट्रेन की क्षमता की बात करें, तो यह किसी चलते-फिरते महल से कम नहीं होगी. इसमें कुल 8 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें 4 मोटर कोच और 4 ट्रेलर कोच होंगे. 557 यात्रियों के सफर करने की क्षमता वाली इस ट्रेन में 7 कोच स्टैंडर्ड क्लास के होंगे, जबकि एक कोच एक्ज़ीक्यूटिव क्लास का होगा, जो विश्वस्तरीय लग्ज़री का एहसास कराएगा.

रफ्तार के मामले में यह हवा से बातें करेगी. इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन की अधिकतम टेस्ट स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. वहीं, पटरियों पर यात्रियों को लेकर यह 249 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ेगी. करीब 202 मीटर लंबी यह ट्रेन भारतीय रेल के इतिहास का सबसे तेज़ और शानदार सफर तय करेगी.

इस ट्रेन को सिर्फ तेज़ नहीं, बल्कि बेजोड़ आरामदायक बनाया गया है. हवाई जहाज़ को मात देने वाली कुशन सीटें, पैर फैलाने के लिए भरपूर जगह (लेगरूम), हर सीट पर मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट, बेहतरीन लगेज रैक और अत्याधुनिक बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट, ये सब सुविधाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अपने नागरिकों को अब दुनिया की सबसे बेहतरीन यात्रा का अनुभव देने जा रहा है.

इस ट्रेन में हर भारतीय का ख्याल रखा गया है. दिव्यांग भाई-बहनों के लिए यह ट्रेन पूरी तरह से अनुकूल है. उनके लिए अंदर व्हीलचेयर ले जाने की आसान व्यवस्था, उनके हिसाब से विशेष रूप से डिज़ाइन की गई सीटें और एक्सेसिबल टॉयलेट बनाए जा रहे हैं. यह एक ऐसा कदम है जो इसे सही मायनों में सबकी ट्रेन बनाता है.

इसमें एक बेहद स्मार्ट पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम होगा, जो हिंदी, अंग्रेजी और हमारी अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में यात्रियों से बात करेगा. सफर को मजेदार बनाने के लिए वाई-फाई आधारित एंटरटेनमेंट, एलसीडी स्क्रीन, ऑटोमेटिक अनाउंसमेंट और भारत के हर मौसम को मात देने वाला शानदार एयर कंडीशनिंग सिस्टम मौजूद रहेगा.

हवा का सीना चीरकर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने के लिए इसकी बॉडी को विश्वस्तरीय एयरोडायनामिक तकनीक से डिजाइन किया गया है. इतना ही नहीं, इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम जैसी स्मार्ट तकनीक है, जो ब्रेक लगाने पर पैदा होने वाली ऊर्जा को वापस इस्तेमाल कर लेगी. बेंगलुरु की फैक्ट्री में बन रही यह ट्रेन दुनिया को बता रही है कि भारत अब तकनीक खरीदता नहीं है, बल्कि अपनी हाई-स्पीड तकनीक खुद बनाता है.



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