Ants Build City : चीटियों ने बना डाला पूरा शहर, रानी के लिए खास इंतजाम, यहां किसानी भी करती हैं चीटियां

Ants Build City : चीटियों ने बना डाला पूरा शहर, रानी के लिए खास इंतजाम, यहां किसानी भी करती हैं चीटियां


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ब्राजील के सेराडो क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने चींटियों द्वारा जमीन के नीचे बनाई गई एक विशाल और अनोखी ‘अंडरग्राउंड सिटी’ की खोज की है. प्रोफेसर लुइज कार्लोस फोर्टी और उनकी टीम ने चींटियों के एक विशाल, खाली पड़े घोंसले में 10 टन लिक्विड सीमेंट भरा, जिससे 26 फीट गहरी एक हैरान कर देने वाली भयानक संरचना का खाका सामने आया.

10 टन सीमेंट भरकर खोला गया चींटियों की ‘सिटी’ का राज : ब्राजील के शोधकर्ताओं ने ‘अट्टा लेविगाटा’ प्रजाति की चींटियों के एक विशाल घोंसले में लगभग 10 टन तरल सीमेंट डाला. सीमेंट को घोंसले के छोटे-से-छोटे रास्तों और सुरंगों तक पहुंचने में करीब 10 दिनों का समय लगा. जब ये सीमेंट अंदर जाकर जम गया, तो वैज्ञानिकों ने आसपास की मिट्टी हटाकर पूरी संरचना को बाहर निकाला. पारंपरिक खुदाई के बजाय सीमेंट कास्टिंग की इस तकनीक से घोंसले का एक-एक रास्ता और कमरा बिल्कुल सुरक्षित बाहर आ गया. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तरीके से चींटियों की बनाई पूरी ‘अंडरग्राउंड सिटी’ का नक्शा पहली बार इतने साफ रूप में सामने आया है. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

500 वर्ग फीट में फैली और 26 फीट गहरी दुनिया : ये अंडरग्राउंड संरचना लगभग 500 वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी और जमीन के अंदर 8 मीटर गहरी थी. ये पूरा परिसर लाखों-करोड़ों चींटियों के रहने और उनके काम करने के लिए बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बनाया गया था. घोंसले के सबसे निचले और सबसे सुरक्षित हिस्सों में रानी चींटी और उसके अंडों-बच्चों के रहने का खास इंतजाम था. इतनी गहराई में बने होने के बावजूद यहां का पूरा ढांचा जमीन के दबाव को आसानी से झेल सकता था. वैज्ञानिकों ने इस विशालकाय निर्माण की तुलना इंसानों द्वारा बनाई गई चीन की महान दीवार से की है. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

चींटियों ने उठाई 40 टन मिट्टी: इस विशाल शहर के निर्माण के दौरान चींटियों की कॉलोनी ने मिलकर लगभग 40 टन मिट्टी को खोदकर जमीन से बाहर निकाला. मिट्टी की ताकत और उसकी बनावट की चींटियों को इतनी गजब समझ थी कि सुरंगें कभी धंसती नहीं थीं. उन्होंने अपनी सुरंगों को इस तरह डिजाइन किया था कि ऊपर की भारी मिट्टी का वजन आसानी से बंट जाए. ये ढांचा साबित करता है कि चींटियों में एक कलेक्टिव इंटेलीजेंस पाई जाती है. इंसानी सिविल इंजीनियरिंग के बेहतरीन ढांचों की तरह ही चींटियों का ये शहर भी बेहद मजबूत और टिकाऊ था. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

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भोजन उगाने के लिए बनाए गए थे ‘फंगस चेंबर्स’ : चींटियों ने इस शहर में सिर्फ रहने के रास्ते ही नहीं बनाए थे, बल्कि भोजन के लिए खास ‘फंगस चेंबर्स’ भी तैयार किए थे. इन अंडाकार कमरों में चींटियां पत्तियां जमा करती थीं और उन पर अपनी मुख्य खुराक यानी फंगस उगाती थीं. इन कमरों का तापमान और नमी का संतुलन ऐसा रखा जाता था जिससे फंगस की खेती में कोई रुकावट न आए. चींटियों का पूरा समुदाय अपनी मुख्य खाद्य आपूर्ति के लिए इन्हीं विशेष कमरों पर निर्भर रहता था. ये दिखाता है कि चींटियां इंसानों की तरह ही व्यवस्थित ढंग से खेती और भोजन का प्रबंधन करना जानती हैं. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

कचरे के निपटारे के लिए बनाए अलग ‘रिफ्यूज चेंबर्स’ : घोंसले को बीमारियों और परजीवियों से बचाने के लिए चींटियों ने कचरा फेंकने की अलग जगह बनाई थी. इन कमरों को ‘रिफ्यूज चेंबर्स’ कहा जाता है, जो मुख्य कॉलोनी से काफी दूर या एकदम नीचे बनाए गए थे. सड़ी-गली पत्तियों, मृत चींटियों और पुराने फंगस को इसी कचरा घर में डालकर बंद कर दिया जाता था. कचरे को दूर रखने की इस समझदार रणनीति से पूरी कॉलोनी में संक्रमण और खतरनाक बीमारियां नहीं फैलती थीं. चींटियों का ये सैनिटेशन और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम वाकई इंसानों के आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम जैसा था. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

हाईवे जैसी सुरंगें और नेचुरल ‘चिमनी इफ़ेक्ट’ से वेंटिलेशन : चींटियों द्वारा खोदी गई सुरंगें कोई बेतरतीब रास्ते नहीं थीं, बल्कि वे किसी हाई-स्पीड हाईवे की तरह सीधी और चौड़ी थीं. इन सुरंगों का मुख्य काम पत्तियों को आसानी से ढोना और पूरे घोंसले में ऑक्सीजन का बहाव बनाए रखना था. लाखों चींटियों और फंगस खेती से पैदा होने वाली गर्मी को बाहर निकालने के लिए एक प्राकृतिक ‘चिमनी इफ़ेक्ट’ काम करता था. गर्म हवा ऊपर की तरफ मुख्य रास्तों से बाहर निकल जाती थी, जिससे बाहर की ताज़ा और ठंडी हवा अपने आप अंदर खिंच आती थी. इस नेचुरल थर्मो-रेगुलेटरी वेंटिलेशन की बदौलत जमीन के 26 फीट नीचे भी तापमान हमेशा ठंडा और सुहावना बना रहता था. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

इंसानी इंजीनियरिंग के लिए प्रेरणा बनी चींटियों की कलाकारी : इस सीमेंट कास्ट की मदद से वैज्ञानिकों को चींटियों की जटिल जीवनशैली और उनके आर्किटेक्चर को समझने में बड़ी मदद मिली है. चींटियों का ये ढांचा दिखाता है कि बिना किसी नक्शे या मशीनों के भी एक विशाल, सुरक्षित और स्मार्ट शहर कैसे बसाया जा सकता है. शोधकर्ता अब इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि चींटियों की मिट्टी इंजीनियरिंग की ये तकनीक इंसानी निर्माण में कैसे काम आ सकती है. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

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