नई दिल्ली: एयरपोर्ट सहित देश के सभी संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभाल रहे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों को बड़ी राहत देने की तैयारी है. अब छुट्टी की अर्जी देने, शिकायत करने या ड्यूटी में बदलाव के लिए अलग-अलग दफ्तरों में सीनियर ऑफिसर्स के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. जवानों के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों को आसान बनाने के लिए सीआईएसएफ अब अपने सभी डिजिटल सिस्टम को इंट्रीगेट करने जा रहा है.
इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 3 नवंबर 2026 को सीआईएसएफ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के साथ एक अहम समझौता किया है. इस समझौते का मकसद बल के आईटी सिस्टम को अपग्रेड करना और जवानों के प्रशासनिक जरूरतों को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी करना है. साथ ही, इन सभी सुविधाओं को मोबाइल फ्रेडली बनाना है, जिससे जवान अपनी छुट्टियों सहित दूसरी जरूरतों को मोबाइल फोन से ही अप्लाई कर सकें.
55 हजार से ज्यादा शिकायतें, लाखों डिजिटल ट्रांजैक्शन
सीआईएसएफ के सीनियर ऑफिसर के अनुसार, सीआईएसएफ पहले से ही अपने डिजिटल सिस्टम पर काफी काम कर चुका है. बल ने जवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 40 से ज्यादा इन-हाउस ऐप्स और 30 से ज्यादा मॉड्यूल तैयार किए हैं. इनकी मदद से जवानों और अधिकारियों के कई काम ऑनलाइन हो रहे हैं. मिसाल के तौर पर, ई-ग्रीवांस पोर्टल पर सितंबर 2016 से अब तक 55046 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 53043 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है. यानी शिकायतों को दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए अभी भी एक डिजिटल सिस्टम मौजूद है.
इसी तरह ई-रिक्वेस्ट और ई-सर्विस बुक के जरिए जवान छुट्टी, वीकली ऑफ और ड्यूटी में बदलाव समेत 40 से 50 तरह की एप्लीकेशंस मोबाइल से भेज सकते हैं. सीआईएसएफ के ई-ऑफिस सिस्टम से ऑफिसर्स कहीं से भी फाइलें और डाक निपटा सकते हैं. वहीं, आयुष्मान, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे पोर्टल भी जवानों की जिंदगी को काफी हद तक डिजिटल कर दिया है. इस डिजिटल बदलाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले लीव मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए अब तक 95 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन पूरे हो चुके हैं.
फिर नए समझौते की जरूरत क्यों पड़ी?
अब सवाल यह है कि जब सीआईएसएफ के पास पहले से इतने सारे ऐप्स और पोर्टल हैं, तो फिर इस नए समझौते की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, ये डिजिटल सिस्टम अलग-अलग समय पर तैयार किए गए थे. इनका काम तो चल रहा था, लेकिन सभी सिस्टम आपस में पूरी तरह जुड़े हुए नहीं थे. ऐसे में जवानों को अलग-अलग सेवाओं पर अपनी जानकारी बार-बार भरनी पड़ सकती थी. अधिकारियों के सामने भी अलग-अलग सिस्टम से जानकारी जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती थी. अब सीआईएसएफ का मकसद इन सभी डिजिटल सेवाओं को एक साथ जोड़कर एक इंटीग्रेटेड, क्लाउड-रेडी और सेफ सिस्टम तैयार करना है.
बल की इन-हाउस टीमों ने ऐसे डिजिटल सिस्टम तैयार किए हैं, जिनका इस्तेमाल हर दिन जवान करते हैं. अब अगला कदम इन सभी सिस्टम को आपस में जोड़ना है, ताकि जवानों का समय कागजी काम में बर्बाद न हो और अधिकारियों को सही समय पर सटीक जानकारी मिल सके.
प्रवीर रंजन
महानिदेशक, सीआईएसएफ
लाइव ट्रैकिंग से लेकर मोबाइल अलर्ट तक क्या-क्या बदलेगा?
- अगले दो साल में तीन चरणों में होने वाले इस अपग्रेडेशन के बाद जवानों के लिए कई सुविधाएं आसान हो सकती हैं.
- अलग-अलग पोर्टल पर एक ही जानकारी दोबारा भरने की जरूरत कम होगी. जवान अपनी एप्लीकेशंस और रिक्वेस्ट के स्टेटस को ट्रैक कर सकेंगे. जरूरी अपडेट और नोटिफिकेशन ऑटोमेटेड तरीके से मिल सकेंगे.
- सीनियर ऑफिसर्स को मैनपावर, ट्रेनिंग और रिसोर्सेज से जुड़ी जानकारी डैशबोर्ड पर मिलेगी. अपडेटेड डेटा के आधार पर ड्यूटी, ट्रेनिंग और रिसोर्सेज की प्लानिंग करना आसान होगा.
- समझौते के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन सिस्टम को सुरक्षित बनाने और साइबर हमलों से बचाने के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता देगा. लेकिन डेटा का कंट्रोल पूरी तरह सीआईएसएफ के पास ही रहेगा.
- इस प्रोजेक्ट में सीआईसएफ की अपनी टेक्निकल टीम काम करेगी. डीआईसी उसे आधुनिक तकनीक, ट्रेनिंग और टेक्निकल गाइडेंस भी देगा.
सीआईएसएफ ने अपने दम पर एक मजबूत डिजिटल नींव तैयार की है, जो हर साल लाखों ट्रांजैक्शन संभालती है. डीआईसी इन सिस्टम को जोड़ने, उनकी साइबर सुरक्षा बढ़ाने और उन्हें भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने में मदद करेगा.
अखिल कुमार
एमडी एण्ड सीईओ, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन
किसने किए समझौते से हस्ताक्षर
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के एमडी अखिल कुमार भी मौजूद थे. समझौते पर सीआईएसएफ की ओर से आईजी (टेक्नोलॉजी) सोनिया नारंग और डीईसी की ओर से चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर देवव्रत नायक ने हस्ताक्षर किए.