दो महीने में 125 नवजातों की मौत, पूर्व विधायक ने बांका सदर अस्पताल पर उठाया सवाल


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सरकारी स्वास्थ व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है. अब बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी के ही एक पूर्व विधायक ने बड़ा सवाल उठाया है. उन्होंने जो खुलासा किया है उसे सुनकर लोग स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत जानकार हिल जाएंगे. विधायक ने दावा किया है कि बांका सदर अस्पताल में पिछले दो महीने में 125 से अधिक स्वस्थ नवजात बच्चों की मौत हुई है.

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दो महीने में 125 बच्चों की मौत, पूर्व विधायक ने बांका सदर अस्पताल पर किया सवालZoom

कटोरिया के पूर्व विधायक राज किशोर उर्फ पप्पू यादव

बांका: बिहार के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर वहां के लोग सवाल उठाते रहे हैं. खबरों में भी यहां के खस्ताहाल स्वास्थ व्यवस्था की लापरवाहियां उजागर होती रहती हैं. अब तो बिहार के बांका में पूर्व विधायक ने ही स्वास्थ व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. और बांका का सदर अस्पताल में बच्चों के ईलाज को लेकर पूर्व विधायक का गंभीर आरोप।पिछले दो माह ईलाज के दौरान 125 से अधिक बच्चों की हुई मौत।पीड़ित परिजनों से मिलकर पूर्व विधायक ने किया दावा. कटोरिया के पूर्व विधायक राजकिशोर उर्फ पप्पू यादव ने प्रेस वार्ता कर दी जानकारी.

दो महीने के अंदर लगभग 125 बच्चों की मौत हुई है. बांका सदर अस्पताल के बारे में उन्होंने बताया कि इमरजेंसी से लेकर अन्य वार्डों में भर्ती हुए कई बच्चों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि रोज कम 10 से अधिक नवजात बच्चों की मौत हो रही है. विधायक ने कहा कि 17 तारीख को एक दिन में 13 नवजात बच्चों की मौत हो गई. इसी तरह एक अन्य दिन एक दिन में 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई है. इन घटनाओं और लापरवाही पर किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है. विधायक ने कहा कि लोगों के 2 किलो, 3 किलो के स्वस्थ बच्चों की मौत हो जा रही है. विधायक जी ने बच्चों की मौत से जुड़ी सभी लापरवाहियों का साक्ष्य और वीडियो आदि सबूत देने का भी दावा किया है.

विधायक से पूछा गया कि इसका दोषी कौन है..सिविल सर्जन या सिस्टम तो उन्होंने इसमें डीएम को निर्दोष मानते हुए बांका के किसी हेड को दोषी बताया है और सीएस को दोषी माना है.

आपको बता दें कि यह बात इसलिए तूल पकड़ ली क्योंकि मुद्दा विधायक ने उठाया है. यह हाल वर्षों से अस्पतालों में है. कहीं अस्पताल नहीं है तो कहीं डॉक्टर नही हैं. मरीजों को सामान्य इलाज के लिए दूसरे जिलों और शहरों में जाना पड़ता है. इससे उनके इलाज का खर्च बेवजह बढ़ जाता है. वहां उन्हें रहने खाने की मुश्किल होती है वह अलग दिक्कत है. अपने शहर में लोगों को कई चीजों की सुविधा और राहत मिल जाती है.



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