दरभंगा के ओमप्रकाश की मुंबई में पहचान, 10×10 कमरे से जवान-पंचायत-आश्रम 3 तक, फिल्म कैमरा टेक्नीशियन तक का सफर

दरभंगा के ओमप्रकाश की मुंबई में पहचान, 10×10 कमरे से जवान-पंचायत-आश्रम 3 तक, फिल्म कैमरा टेक्नीशियन तक का सफर


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कुछ समय पहले तक फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बना पाना बड़े संघर्ष का काम था. हालांकि, अब ओटीटी, सोशल मीडिया और यूट्यूब के दौर में तो लोग अपने गांव, घर और शहर में रहकर ही कंटेंट बनाकर अपनी पहचान बना रहे हैं. हालांकि, कुछ चीजें आसान हुई हैं लेकिन, सफलता के लिए और अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष और सीखने का काम तो आज भी करना ही पड़ेगा. पहले मुंबई जाने वाले लोगों को वहां रहने से लेकर खाने और काम पाने तक हर स्तर पर संघर्ष करना पड़ता था. आज की तारीख में आप काम तो अपने गांव-घर से ही कर सकते हैं लेकिन, काम क्या करना है इसका अनुभव कोई अनुभवी ही दे सकता है. तो आज हम आपको मुंबई की फिल्मी दुनिया में जगह बनाने वाले और बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में काम करने वाले दरभंगा के एक अनुभवी शख्स से मिलाते हैं. उनकी बातों और अनुभव से आप भी सीख ले सकते हैं. हमने बात की है दरभंगा जिले से जुड़े ओमप्रकाश चौधरी से…

आपको बता दें कि ओमप्रकाश चौधरी वैसे तो मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले नही है, लेकिन दरभंगा से उनका गहरा नाता रहा है. ओमप्रकाश एक छोटे से गांव से निकलकर आज मुंबई में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. उन्होंने कई बॉलीवुड, हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में काम किया है. फिल्मी दुनिया में लोग अपनी पसंद के हिसाब से हीरो-हिरोइन से लेकर कैमरामैन, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, म्यूजिशियन आदि तमाम तरह की भूमिका निभाते हैं. ओमप्रकाश चौधरी फिल्मी जगत में बतौर फिल्म कैमरा टेक्नीशियन के पद पर काम करते हैं. बड़े-बड़े कलाकार, जिनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार करते हैं, उनके साथ काम करने का अनुभव ओमप्रकाश को मिला है.

गांव आने पर लोगों का रिएक्शन कैसा होता है, इस पर ओमप्रकाश बताते हैं कि मुंबई तक पहुंचने का सफर बहुत कठिन और संघर्ष भरा रहा है. वहां पहुंचने के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं होता. 10×10 के छोटे से कमरे में रहकर अपने सपनों को पूरा करना पड़ता है. ओमप्रकाश बताते हैं कि उनके भाई पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री में काम करते थे. उन्हीं के जरिए उन्हें एक प्लेटफॉर्म मिला. शुरुआत में उन्होंने एक ऑफिस में फिल्म कैमरा टेक्नीशियन के तौर पर अप्रेंटिस के रूप में काम सीखना शुरू किया. साल 2019 में लॉकडाउन से पहले उनका मुंबई का सफर शुरू हुआ था.

फिल्म कैमरा टेक्नीशियन का काम बेहद जिम्मेदारी भरा होता है. शूटिंग से पहले और शूटिंग के बाद कैमरे की हर एक परत को बारीकी से जांचना होता है. अगर शूटिंग के दौरान कैमरे में कोई भी समस्या आती है तो उसे तुरंत ठीक करना ही कैमरा टेक्नीशियन की जिम्मेदारी होती है.

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इस सवाल पर ओमप्रकाश बताते हैं कि उन्होंने शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म ‘जवान’, अर्जुन कपूर की फिल्म ‘लेडीज गैंगस्टर’, सुपरहिट वेब सीरीज ‘पंचायत’ में काम किया है. हाल ही में वह बॉबी देओल की चर्चित सीरीज ‘आश्रम-3’ के फर्स्ट शेड्यूल की शूटिंग करके लौटे हैं, जिसकी शूटिंग अयोध्या में चल रही है. इसके अलावा उन्होंने रजनीकांत की ‘जेलर-2’ और ऋतिक रोशन की फिल्मों में भी काम किया है.

संघर्ष के उन दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं कि उनके पिता आज भी किसान हैं और उनका परिवार आज भी खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है. एक किसान परिवार से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है.

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