नई दिल्ली: गौशाला और गांव में गाय और भैंस बड़ी तादाद में गोबर देती हैं. वह गोबर लोग गंदगी समझ कर फेंक देते हैं. बारिश में वही गोबर सीवर और नालियों में जाकर उसे बंद कर देता है. शहर और गांव में भी गोबर से गंदगी फैलती है, जिससे बीमारियां, मक्खी और मच्छर पनपते हैं. हालांकि अब यही गोबर कमाई का जरिया बनेगा. आरएसवीसी मंडौरा ने एक ऐसी अनोखी मशीन लॉन्च की है. जो गोबर से लकड़ी बनाएगी. यह जानकारी आरएसवीसी मंडौरा सोनीपत के अध्यक्ष देव प्रकाश गोयल ने दी है.
उन्होंने बताया कि इस मशीन का नाम काउजोन है. इस पर केंद्र सरकार की ओर से 40% सब्सिडी दी जा रही है. जबकि हरियाणा सरकार की ओर से 30% सब्सिडी है. यानी कुल मिलाकर 70% सब्सिडी इस मशीन पर है. अगर कोई किसान इसे खरीदेगा तो उसे सिर्फ 20 से 25000 रुपये ही इन्वेस्टमेंट के तौर पर करना होगा. बाकी सब्सिडी से उसे मुनाफा होगा. क्योंकि इस मशीन की कीमत 85000 रुपए है.
जंगल कटने हो जाएंगे बंद
आरएसवीसी मंडौरा सोनीपत के अध्यक्ष देव प्रकाश गोयल इन दिनों दिल्ली में हैं. वह जनकपुरी दिल्ली हाट में चल रहे दिवाली मेले में आए हुए हैं. यहीं पर इस मशीन का उद्घाटन भी हुआ है. लोकल 18 से खास बातचीत में देव प्रकाश गोयल ने बताया कि लकड़ी के लिए बड़ी संख्या में जंगलों को काटा जा रहा है, जिससे हमारे देश से हरियाली खत्म होती जा रही है. इस वजह से पर्यावरण दूषित हो रहा है. प्रदूषण बढ़ रहा है. ऐसे में जंगलों को बचाने के लिए और बिना जंगल काटे लकड़ी कैसे बनाई जाए. इसी उद्देश्य के साथ काउजोन मशीन लॉन्च की गई है.
उन्होंने बताया कि अभी तक हमारे देश में जो गौशालाएं चलती हैं. वह चंदा, दान और सरकारी प्रावधान पर चलती हैं. 70 से 80% गौशालाओं का गोबर फेंक दिया जाता है, जिससे बीमारियां होती हैं, लेकिन अब इसी गोबर से लकड़ी बनाने में यह मशीन काम किया जाएगा.
इस तरह होगा मुनाफा
आरएसवीसी मंडौरा सोनीपत के अध्यक्ष देव प्रकाश गोयल ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट एक से 2 रुपए किलो आती है. लकड़ी 10 से 15 किलो के बीच में बाजार में बिकती है. उन्होंने यह भी बताया कि एक गौशाला में मान लीजिए 100 गाय हैं. एक गाय एवरेज 10 किलो गोबर प्रतिदिन देती है, तो 1000 किलो गोबर इकट्ठा हो गया. इसी तरह 100 गौशाला को 1000 किलो गोबर में 8 रुपए का मुनाफा हुआ तो उसी हिसाब से 8000 रुपए प्रतिदिन का मुनाफा हुआ.
इसके जरिए गौशाला अच्छे से चलेगी. हमारी गौशालाएं आत्मनिर्भर बनेगी. जंगल कटना बंद हो जाएंगे. गोबर से शहर और गांव में गंदगी नहीं होगी. जो भी आदमी गोबर इकट्ठा करके इस मशीन को लगाने वाले के पास लेकर के जाएगा और मान लीजिए मशीन लगाने वाले ने उसे 5 रुपए किलो गोबर लेकर रुपए दिए तो उसे भी मुनाफा होगा. इसके जरिए गांव में रोजगार आएगा. क्योंकि मान लीजिए 5 रुपए किलो उसने गोबर दिया और उसी से लकड़ी लेकर के वह बाजार गया और उसे 10 रुपए से लेकर 15 रुपए किलो में उसे बेच दिया तो उसे मुनाफा होगा.
रैक पर रखकर सुखा सकते हैं लकड़ी
अध्यक्ष देव प्रकाश गोयल ने यह भी जानकारी दी कि इस मशीन को खरीदने के लिए आप +91 98990 46810 पर कॉल कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस मशीन के साथ एक रैक भी दिया जा रहा है. जब गोबर से लकड़ी बनकर निकलेगी तो उसे किसी जमीन पर रखकर नहीं सुखाना होगा बल्कि इसमें बने हुए रैक में ही वर्टिकल रखकर आप सुखा सकते हैं. अगर इस रैक को धूप में रख देंगे तो 2 दिन में गोबर सूखकर लकड़ी बन जाएगा.
वहीं, अगर आप कमरे के अंदर पंखा चला कर रख देंगे तो 3 से 4 दिन के अंदर यह सूखकर लकड़ी बन जाएगा. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यह मशीन 1 घंटे में 500 किलो लकड़ी बना देती है. बिजली का खर्चा भी बहुत ज्यादा इससे नहीं आएगा. उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई किसान इस पर सब्सिडी लेना चाहता है और मशीन को खरीदना चाहता है तो सरकार की स्कीम में उसे आवेदन करना होगा. उन्होंने यह भी बताया कि इससे बनने वाली लकड़ी का इस्तेमाल शमशान घाट के साथ ही तंदूर और हवन की लकड़ी के तौर पर भी कर सकते हैं.