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Kim Jong Un Diplomacy: किम जोंग उन पिछले कुछ दिनों से अमेरिका के खिलाफ चीन और रूस के करीब जाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाएं और रूस के साथ बढ़ती नजदीकी दोनों देशों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही हैं. चीन ने किम जोंग उन की बीजिंग यात्रा को सीमित करके अपनी नाराजगी के संकेत दिए हैं, जबकि रूस से भी किम को उम्मीद के मुताबिक कूटनीतिक समर्थन नहीं मिला है.
किंम जोंग उन. (रॉयटर्स)
Kim Jong Un Diplomacy: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन लंबे समय से अमेरिका के खिलाफ चीन और रूस को अपनी ताकत मानते रहे हैं, लेकिन अब उनकी विदेश नीति की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत कराने की उम्मीद थी, लेकिन इस दिशा में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली. दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की उनकी कोशिश भी सफल नहीं हुई. हालिया घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि चीन और रूस के साथ उत्तर कोरिया के रिश्तों में पहले जैसी सहजता नहीं रह गई है.
दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक किम जोंग उन 24 अक्टूबर को अचानक चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग पहुंचे थे. माना जा रहा था कि वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता तैयार करना चाहते थे. उनकी नजर नवंबर में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन पर भी थी. हालांकि इस दौरे में उनकी शी जिनपिंग से मुलाकात नहीं हुई. किम का स्वागत चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के चौथे सबसे वरिष्ठ नेता वांग हुनिंग ने किया. उन्होंने किम के साथ युद्ध स्मारक का दौरा किया और एक बस निर्माण कारखाने का निरीक्षण भी कराया.
उत्तर कोरिया की कूटनीति फेल होती नजर आ रही है. (फोटो क्रेडिट- रॉयटर्स)
रूस से भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली मदद
- किम जोंग उन ने पिछले कुछ वर्षों में रूस के साथ सैन्य और रणनीतिक रिश्ते काफी मजबूत किए हैं. यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार और सैनिक उपलब्ध कराए. इसके बदले उसे आर्थिक और सैन्य तकनीक से जुड़ी मदद मिलने की उम्मीद रही है.
- दोनों देशों के बीच 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी की संधि भी हुई थी, जिसमें सैन्य सहायता का प्रावधान शामिल है. अमेरिकी कांग्रेस की शोध सेवा के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस को गोला-बारूद, बैलिस्टिक मिसाइलें और सैनिक उपलब्ध कराए हैं.
- हालांकि रूस के साथ बढ़ती नजदीकी के बावजूद किम को अमेरिका के साथ बातचीत में कोई बड़ी कूटनीतिक सफलता नहीं मिली. पुतिन की ओर से मध्यस्थता की उम्मीद भी अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है.
चीन क्यों बढ़ा रहा है दूरी?
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी चिंता कोरियाई आइलैंड में बढ़ता सैन्य तनाव है. उत्तर कोरिया लगातार परमाणु हथियारों, मिसाइलों और सैन्य तकनीक का विस्तार कर रहा है.रूस के साथ उसकी बढ़ती सैन्य साझेदारी भी बीजिंग के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है. इसके अलावा उत्तर कोरिया की रूस पर बढ़ती निर्भरता से चीन का प्रभाव कमजोर होने की आशंका भी है. विश्लेषकों के मुताबिक बीजिंग चाहता है कि उत्तर कोरिया केवल सैन्य ताकत बढ़ाने के बजाय आर्थिक विकास और व्यापार पर भी ध्यान दे.
किम के सामने कूटनीतिक चुनौती
किम जोंग उन के लिए चीन और रूस दोनों का समर्थन महत्वपूर्ण है. चीन उत्तर कोरिया का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जबकि रूस उसे सैन्य सहयोग दे रहा है. ऐसे में दोनों देशों के साथ रिश्तों में किसी भी तरह की दूरी उत्तर कोरिया की रणनीति को प्रभावित कर सकती है. हालांकि चीन और रूस ने उत्तर कोरिया से पूरी तरह दूरी बना ली है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन बीजिंग में शी जिनपिंग से मुलाकात न होना और रूस से अमेरिकी वार्ता में प्रगति न हो पाना सवाल जरूर खड़ा करता है.