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Lake that Burns at Night: इंडोनेशिया के कावाह इजेन ज्वालामुखी में प्रकृति का ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो किसी दूसरी दुनिया जैसा लगता है. यहां दुनिया की सबसे बड़ी हाइपर-एसिडिक झील मौजूद है, जिसका पानी बेहद खतरनाक है. रात होते ही ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसें नीली आग की लपटों में बदल जाती हैं. ये नजारा अंतरिक्ष से भी साफ-साफ देखा जा सकता है.
कुदरत ने धरती पर ऐसे-ऐसे चमत्कार किए हैं, जिनके बारे में हमें तब तक जानकारी नहीं होती, जब तक हम इनकी तस्वीरें या वीडियो नहीं देखते. इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में स्थित कावाह इजेन क्रेटर झील दुनिया की सबसे बड़ी हाइपर-एसिडिक झील मानी जाती है. दूर से देखने पर इसका चमकीला फिरोजी रंग बेहद खूबसूरत लगता है, लेकिन इसकी असलियत काफी डरावनी है. झील के पानी में सल्फ्यूरिक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा बहुत अधिक होती है. इसकी अम्लीय प्रकृति इतनी तीव्र है कि इसे बैटरी के एसिड जैसा खतरनाक माना जाता है.
यह झील किसी सामान्य पहाड़ी इलाके में नहीं, बल्कि एक सक्रिय ज्वालामुखी के क्रेटर के अंदर मौजूद है. धरती की गहराई से गर्म हाइड्रोथर्मल तरल पदार्थ ऊपर आते रहते हैं. ये अपने साथ कई तरह के खनिज और रासायनिक तत्व लेकर आते हैं, जो झील के पानी को अत्यधिक अम्लीय बनाते हैं. यही भूगर्भीय गतिविधियां इस जगह को दुनिया के सबसे अनोखे प्राकृतिक स्थलों में शामिल करती हैं.
कावाह इजेन में तेज बारिश होने पर क्रेटर की झील का पानी बाहर निकलकर पश्चिम दिशा की ओर बहने लगता है. यह पानी आगे चलकर बन्युपाहित नदी तक पहुंचता है. बन्युपाहित का अर्थ ही कड़वा पानी होता है. इस पानी में मौजूद अम्लीय तत्व आसपास की मिट्टी, पेड़-पौधों और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं यानी ज्वालामुखी के अंदर मौजूद खतरा आसपास के इलाकों तक फैल जाता है.
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इतने खतरनाक माहौल के बावजूद यहां स्थानीय मजदूर रोजाना काम करने पहुंचते हैं. वे ज्वालामुखी के अंदर से सल्फर निकालते हैं और भारी टोकरियों में भरकर हाथों से बाहर तक ले जाते हैं. जहरीली गैसों, तेज गर्मी और कठिन रास्तों के बीच उनका काम बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. कई मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम करना पड़ता है. यह खूबसूरत प्राकृतिक जगह उनके लिए रोजी-रोटी कमाने का कठिन मैदान भी है.
कावाह इजेन की सबसे बड़ी पहचान यहां दिखाई देने वाली नीली आग है. ज्वालामुखी की दरारों से निकलने वाली सल्फर से भरपूर गैसें ऑक्सीजन के संपर्क में आकर जलने लगती हैं. इससे चमकीली नीली लपटें दिखाई देती हैं. यह नजारा रात के अंधेरे में सबसे ज्यादा आकर्षक लगता है. खास बात यह है कि यह सामान्य लावा नहीं, बल्कि जलती हुई सल्फर गैसों की लपटें होती हैं.
नीली आग के पीछे एक और दिलचस्प प्राकृतिक प्रक्रिया चलती है. जब गर्म सल्फर गैसें ठंडी होती हैं तो उनसे सल्फर तरल रूप में जमने लगता है. कुछ समय तक यह पिघले हुए लावे की तरह बहता दिखाई देता है. बाद में ठंडा होकर चमकीले पीले रंग के ठोस जमाव में बदल जाता है. इसी वजह से ज्वालामुखी के आसपास की जमीन पीले सल्फर की परतों से ढकी नजर आती है.
कावाह इजेन ऐसी जगह है, जहां प्रकृति के कई अलग-अलग रूप एक साथ देखने को मिलते हैं. एक ओर चमकीली नीली झील है, दूसरी ओर पीले सल्फर के पहाड़ और रात में जलती नीली लपटें. यहां की जियोलॉजिकल एक्टिविटी वैज्ञानिकों के लिए भी खास महत्व रखती हैं. हालांकि इस खूबसूरती के पीछे गंभीर खतरे छिपे हैं. यही वजह है कि कावाह इजेन को धरती के सबसे अनोखे और जोखिम भरे प्राकृतिक अजूबों में गिना जाता है.