Haridwar News : 1915 में हरिद्वार आए बापू…गांधी जी के जीवन का वो टर्निंग पॉइंट, जिसने उन्हें बनाया महात्मा

Haridwar News : 1915 में हरिद्वार आए बापू…गांधी जी के जीवन का वो टर्निंग पॉइंट, जिसने उन्हें बनाया महात्मा


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Mahatma Gandhi in Haridwar : धर्मनगरी हरिद्वार को कौन नहीं जानता. देश-विदेश से श्रद्धालु यहां मोक्ष की कामना लेकर आते हैं. राष्ट्रपति महात्मा गांधी भी यहां कई बार आए, लेकिन 1915 के दौरान हर की पौड़ी के किनारे कुछ ऐसा हुआ था, जिसने उनके पूरे जीवन की दिशा को बदल दिया. गंगा के घाट पर कुछ ऐसा हुआ जिसने बापू के अंतर्मन को भीतर तक झकझोर दिया. हरिद्वार के गांधीवादी विद्वान पंडित पुरुषोत्तम शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद बापू अपने राजनीतिक गुरु गोखले के कहने पर भारत को समझने के लिए देश भ्रमण करते हुए 1915 के हरिद्वार कुंभ भी पहुंचे. वे खुली बोगी वाली ट्रेन से 50-60 स्वयंसेवकों के साथ हरिद्वार आए. श्रवणनाथ नगर के बाग में कैंप लगाया गया.

हरिद्वार. धर्मनगरी हरिद्वार को पूरी दुनिया मां गंगा के पवित्र घाट और धार्मिक आस्था के सबसे बड़े केंद्र के रूप में जानती है. देश-विदेश से हर रोज श्रद्धालु यहां मोक्ष की कामना और गंगा स्नान के लिए आते हैं, लेकिन इसी पवित्र स्थल पर एक ऐसा गहरा और अनसुलझा रहस्य छिपा है जिसकी जानकारी कम ही लोगों को है. यह अनोखा रहस्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और साल 1915 में हुए ऐतिहासिक कुंभ मेले से जुड़ा हुआ है. बापू कई बार हरिद्वार आए लेकिन 1915 के दौरान हर की पौड़ी के किनारे कुछ ऐसा हुआ था, जिसने मोहनदास करमचंद गांधी के पूरे जीवन की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया. आखिर हरिद्वार में गंगा के घाट पर ऐसा क्या हुआ जिसने बापू के अंतर्मन को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था.

किसके कहने पर आए यहां

हरिद्वार के वरिष्ठ पुरोहित और गांधीवादी विद्वान पंडित पुरुषोत्तम शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि धर्मनगरी हरिद्वार और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संबंध बेहद गहरा और ऐतिहासिक रहा है. दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद बापू अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर भारत को समझने के लिए देश भ्रमण करते हुए 1915 के हरिद्वार कुंभ में आए ताकि उन्हें लघु भारत के दर्शन हो सकें. वे खुली बोगी वाली ट्रेन से 50-60 स्वयंसेवकों के साथ हरिद्वार आए और श्रवणनाथ नगर के बाग में सेवा कैंप लगाया. पुरुषोत्तम शर्मा बताते हैं कि हर की पौड़ी पर एक पंडित ने बापू से पूजा कराई, लेकिन उनसे दक्षिणा लेने से मना कर दिया. 1915 के हरिद्वार कुंभ में महात्मा गांधी ने गरीब जनता और महिलाओं के फटेहाल वस्त्र देखे तो वह व्यथित हो गए. इसके बाद उन्होंने हर की पौड़ी पर ही अपनी पैंट शर्ट त्यागकर केवल एक धोती धारण कर ली, जो बाद में पूरे जीवन उनका पहनावा बन गई.

जिस रास्ते से गुजरे, बापू के नाम पर पड़ा

पुरुषोत्तम शर्मा कहते हैं कि हरिद्वार से बापू का संबंध केवल 1915 तक ही सीमित नहीं रहा. उन्होंने इसके बाद भी कई बार हरिद्वार की यात्रा की. आर्य समाज के बड़े नेता और गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद बापू को कांगड़ी में गुरुकुल ले गए थे, जहां महात्मा गांधी ने छात्रों से मुलाकात की. जब स्वामी श्रद्धानंद का निधन हुआ तो बापू पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ उन्हें श्रद्धांजलि देने हरिद्वार आए. हरिद्वार रेलवे स्टेशन से मायापुर, शंकराचार्य चौक और कनखल होते हुए गुरुकुल जाने वाले जिस रास्ते से बापू वहां गए, उसे आज महात्मा गांधी मार्ग कहा जाता है. पुरुषोत्तम शर्मा कहते हैं कि जिस महामानव को पूरी दुनिया नमन करती है, उनकी जीवन दिशा बदलने में हरिद्वार का महती योगदान रहा है.



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