सतना. अगर आप सतना में रहते हैं और भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इसके लिए आपको कई दिनों की छुट्टी लेने की जरूरत नहीं है. आप सुबह जल्दी घर से निकलकर एक ही दिन में चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के दर्शन कर सकते हैं और रात तक वापस सतना भी लौट सकते हैं. सतना से चित्रकूट की दूरी करीब 75 से 85 किलोमीटर है. यहां जाने के लिए बस, निजी कार और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है. साधारण बस से सफर करने पर एक व्यक्ति का किराया करीब 95 से 150 रुपये तक हो सकता है. निजी वाहन से करीब दो से ढाई घंटे में चित्रकूट पहुंचा जा सकता है. अगर आप पहली बार चित्रकूट जा रहे हैं और समझ नहीं पा रहे कि कहां से शुरुआत करें, कौन सा रास्ता सही रहेगा और किन जगहों को पहले घूमना चाहिए, तो यह एक दिवसीय ट्रैवल प्लान आपके काम आ सकता है.
चित्रकूट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि रामायण काल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पवित्र भूमि है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने 14 साल के वनवास के दौरान करीब साढ़े 11 साल इसी क्षेत्र में बिताए थे. यही वह स्थान है, जहां भरत भगवान राम को अयोध्या वापस ले जाने के लिए आए थे. इस प्रसंग को राम-भरत मिलाप के नाम से जाना जाता है. विंध्य पर्वत की खूबसूरत पहाड़ियों, घने जंगलों और मंदाकिनी नदी के किनारे बसे चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत, रामघाट, गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा और सती अनुसूया आश्रम जैसे कई प्रसिद्ध स्थल हैं.
सतना से चित्रकूट जाने का सही रास्ता
सतना से चित्रकूट जाने के लिए सबसे प्रमुख रास्ता सतना-चित्रकूट रोड है. इस मार्ग पर सेमरिया और मजगवां की तरफ से होते हुए आगे बढ़ा जा सकता है. इसके बाद यह रास्ता एनएच-35 यानी प्रयागराज-बांदा हाईवे से जुड़ता है. इस रूट से दूरी करीब 64 से 80 किलोमीटर के आसपास पड़ती है. हालांकि सामान्य यात्रा की योजना बनाते समय 75 से 85 किलोमीटर की दूरी मानकर चलना बेहतर रहेगा. सड़क की स्थिति और ट्रैफिक के अनुसार करीब दो से ढाई घंटे का समय लग ही जाता है.
कितना है बस का किराया?
अगर आप बस से जाना चाहते हैं, तो सतना बस स्टैंड से सुबह करीब 5:30 बजे से चित्रकूट के लिए बसें मिलना शुरू हो जाती हैं. दोपहर करीब 2:45 बजे तक सीधी बसों की सुविधा रहती है. साधारण नॉन एसी बस का किराया लगभग 95 से 150 रुपये प्रति व्यक्ति हो सकता है. वहीं निजी वाहन या टैक्सी से जाने वाले लोग सुबह 6 बजे तक निकलें ताकि समय पर पहुंचकर घूमने की शुरुआत कर सकें.
पहला पड़ाव- कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा
चित्रकूट पहुंचने के बाद सबसे पहले कामदगिरि पर्वत के दर्शन करें. इसे चित्रकूट का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है. यहां करीब पांच किलोमीटर की परिक्रमा की जाती है. परिक्रमा मार्ग पर कई छोटे-बड़े मंदिर हैं. इसी रास्ते में भरत मिलाप मंदिर भी स्थित है, जहां भगवान राम और भरत के मिलन से जुड़ी मान्यताएं हैं. सुबह का समय परिक्रमा के लिए बेहतर रहता है क्योंकि इस दौरान मौसम ठंडा होता है और ज्यादा धूप भी नहीं रहती.
दूसरा पड़ाव- जानकी कुंड और स्फटिक शिला
कामदगिरि की परिक्रमा के बाद मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित जानकी कुंड पहुंचें. इसके बाद स्फटिक शिला के दर्शन करें. इन दोनों जगहों का संबंध भगवान श्रीराम और माता सीता के वनवास काल से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां उनके पदचिह्न भी मौजूद हैं. नदी और पहाड़ियों के बीच बसा यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है.
तीसरा पड़ाव- सती अनुसूया आश्रम
इसके बाद सती अनुसूया आश्रम जा सकते हैं. घने जंगलों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह आश्रम धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. यहां माता अनुसूया से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं. साथ ही मंदाकिनी नदी के उद्गम स्थल के दर्शन भी किए जा सकते हैं. यहां कुछ समय रुककर आराम करें और भंडारे रूपी स्थानीय सात्विक भोजन का आनंद लें.
चौथा पड़ाव- गुप्त गोदावरी की रहस्यमयी गुफाएं
दोपहर बाद गुप्त गोदावरी पहुंचें. यहां पहाड़ के अंदर बनी दो प्राकृतिक गुफाएं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. इन गुफाओं के अंदर पानी बहता रहता है और कई जगह टखनों तक पानी में चलना पड़ता है. भगवान राम और लक्ष्मण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण भी इस जगह का विशेष महत्व है. गुफाओं के अंदर का ठंडा पानी और प्राकृतिक बनावट यहां आने वाले लोगों को अलग अनुभव देती है.
पांचवां पड़ाव- हनुमान धारा और रोपवे की सैर
गुप्त गोदावरी के बाद हनुमान धारा पहुंचें. यह पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. यहां तक पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा मिलती है, जिससे पहाड़ी पर चढ़ना आसान हो जाता है. मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा पर प्राकृतिक जलधारा गिरती है, जिससे पहाड़ी से चित्रकूट का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है.
अंतिम पड़ाव- रामघाट की आरती और नौका विहार
अपनी यात्रा का समापन शाम को मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित रामघाट पर करें. यह चित्रकूट के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां आप नाव से नदी की सैर कर सकते हैं. शाम के समय होने वाली भव्य आरती में शामिल होना न भूलें. नदी में जलते दीप, मंदिरों की घंटियां और घाट का शांत वातावरण आपकी यात्रा को यादगार बना देगा.
सुबह निकलें और रात तक लौट आएं सतना
एक दिन में चित्रकूट घूमने के लिए सुबह 5:30 बजे या 6 बजे सतना से निकलना बेहतर रहेगा. सुबह करीब 8 बजे से 8:30 बजे तक पहुंचकर कामदगिरि से दर्शन शुरू करें. इसके बाद जानकी कुंड, स्फटिक शिला, सती अनुसूया आश्रम, गुप्त गोदावरी और हनुमान धारा घूमते हुए शाम को रामघाट पहुंचें. आरती और नौका विहार के बाद रात में सतना लौट सकते हैं. सही प्लानिंग के साथ आप बिना होटल में रुके एक ही दिन में चित्रकूट की धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं.