मुश्किलों से नहीं मानी हार, 25 साल से ज्यादा के सफर में पत्थरों को दी पहचान, ऐसी है धनीराम की जर्नी

मुश्किलों से नहीं मानी हार, 25 साल से ज्यादा के सफर में पत्थरों को दी पहचान, ऐसी है धनीराम की जर्नी


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Traditional Art Stone Carving: छत्तीसगढ़ के कुम्हली गांव के मूर्तिकार धनीराम साहू 1999 से पत्थरों को तराशकर आकर्षक मूर्तियां बना रहे हैं. वे हनुमान, शिवलिंग, दुर्गा, शेर और हाथी की प्रतिमाएं तैयार करते हैं. उनकी मूर्तियों की कीमत 900 रुपये से शुरू होती है. अब तक उनकी साढ़े पांच फीट की सबसे बड़ी मूर्ति 65 हजार रुपये में बिकी है. उनकी कला की मांग दूसरे राज्यों में भी है.

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Traditional Art Stone Carving: पत्थरों को तराशना और उन्हें खूबसूरत मूर्तियों का आकार देना आसान काम नहीं है. इसके लिए हुनर, धैर्य और दिन-रात की मेहनत की जरूरत होती है. लेकिन छत्तीसगढ़ के कुम्हली गांव के रहने वाले मूर्तिकार धनीराम साहू ने अपनी कला और मेहनत से पत्थरों को ऐसी पहचान दी है कि उनकी बनाई मूर्तियों की मांग अब छत्तीसगढ़ के साथ दूसरे राज्यों में भी होने लगी है. खास बात यह है कि उनकी बनाई सबसे बड़ी मूर्ति साढ़े पांच फीट की है, जिसे उन्होंने 65 हजार रुपये में बेचा है.

धनीराम साहू बलवा लाल पत्थरों और चट्टानों को तराशकर भगवान हनुमान, शिवलिंग, दुर्गा देवी, शेर, हाथी सहित कई तरह की आकर्षक मूर्तियां तैयार करते हैं. इन मूर्तियों के लिए पत्थर वे बिलासपुर के आसपास के गांवों से मंगवाते हैं. इसके बाद अपनी कलाकारी और मेहनत से साधारण पत्थरों को खूबसूरत प्रतिमाओं में बदल देते हैं.

मूर्तिकला कब से शुरू किया
धनीराम साहू बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 1999 से मूर्तिकला सीखना शुरू किया था और तभी से इस काम में जुटे हुए हैं. शुरुआती दिनों में उन्हें मूर्तियां बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. काम में उतनी कुशलता नहीं थी और मूर्तियों की मांग भी कम रहती थी. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने हुनर को निखारते रहे. पिछले छह वर्षों में उनके काम को अच्छी पहचान मिली है और मूर्तियों की मांग में भी तेजी आई है.

क्या है मूर्तियों की कीमत
धनीराम की बनाई मूर्तियां अलग-अलग आकार और कीमत में उपलब्ध हैं. एक फीट की छोटी मूर्ति की कीमत करीब 900 रुपये से शुरू होती है. वहीं दो फीट की मूर्ति कम से कम 10 हजार रुपये और तीन फीट की मूर्ति करीब 19 हजार रुपये तक में बिकती है. अब तक उन्होंने सबसे बड़ी साढ़े पांच फीट की मूर्ति तैयार की है, जिसके बदले उन्हें 65 हजार रुपये मिले

धनीराम साहू का कहना है कि पत्थर की मूर्ति तैयार करना काफी कठिन काम है. इसके लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है. पत्थरों को मनचाहा आकार देने में काफी समय और धैर्य लगता है. इस काम में कई तरह की कठिनाइयां भी आती हैं. उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी इस तरह की पारंपरिक कलाकारी सीखने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही है. ऐसे में इस हुनर को आगे बढ़ाना भी एक बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद धनीराम अपनी कला के जरिए पत्थरों को नई पहचान देने में जुटे हुए हैं.



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