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बलिया जनपद के साहोडीह गांव के रहने वाले अनिल गुप्ता बहुत पहले मध्यप्रदेश के सिंहलौरी में दुकान चलाते थे. इन्होंने कक्षा 8 वीं तक पढ़ाई की है. इसके आगे की पढ़ाई यह दुलार में नहीं कर पाए, क्योंकि घर में इनको सब कोई बहुत मानता था. यह मध्यप्रदेश से सफलता न मिलने के कारण लगभग 1990 में बलिया अपने गृह जनपद आ गए और इनको लगा कि यह सबसे बड़े बेवकूफ है, तो इन्होंने अपनी दुकान का नाम ही बेवकूफ पान भंडार रख दिया, जो आज दूर दूर तक फेमस हो गई हैं
बलिया: आपने बेशक कई प्रकार के पान खाए और देखें होंगे, लेकिन आज हम आपको जिस पान की दुकान के बारे में बताने जा रहे हैं, उसका न केवल नाम हैरान करने वाला है, बल्कि पान भी बड़ा पसंद किया जाता है. हम बात कर रहे हैं बलिया के फेमस बेवकूफ पान भंडार की, जिसकी कहानी बड़ी रोचक है. सफलता से मायूस सफलता के लिए बार-बार प्रयास में असफलता के बाद इस शख्स ने अपने आप को बेवकूफ समझ कर उसी को जीवन का आधार बना लिया और आज दूर-दूर तक फेमस हो गया है.
अब इसी पान की दुकान से अच्छी खासी कमाई कर बढ़िया जीवन यापन कर रहा है. बेरोजगार को मात देते हुए आज पान की दुकान से यह व्यक्ति अपना छोटा बड़ा रोजगार खड़ा कर दिया है. आइए विस्तार से जानते हैं.
मध्यप्रदेश में पान की दुकान नहीं चली
बेवकूफ पान भंडार के मालिक अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि, वह बलिया जनपद के साहोडीह गांव के रहने वाले हैं. यह बहुत पहले मध्यप्रदेश के सिंहलौरी में दुकान चलाते थे. इन्होंने कक्षा 8 वीं तक पढ़ाई की है. इसके आगे की पढ़ाई यह दुलार में नहीं कर पाए, क्योंकि घर में इनको सब कोई बहुत मानता था. यह मध्यप्रदेश से सफलता न मिलने के कारण लगभग 1990 में बलिया अपने गृह जनपद आ गए और इनको लगा कि यह सबसे बड़े बेवकूफ है, तो इन्होंने अपनी दुकान का नाम ही बेवकूफ पान भंडार रख दिया, जो आज दूर दूर तक फेमस हो गई हैं. यह देसी, मगही, हरा पत्ता और बनारसी पान जैसे लगभग पांच प्रकार के पान बनाते हैं. यह ₹8 से लेकर ₹25 तक का पान लगाते हैं.
50 साल से यहां पान खा रहे ग्राहक
बांसडीह रोड तिराहे पर दुकान होने से यहां बहुत ही ज्यादे दूर दूर के लोग आते हैं, कई लोग तो बताते हैं कि आपका पान खाने के लिए और दुकान का नाम देखने के लिए रुक गए हैं. लोग आते हैं पूछते हैं कि अपनी दुकान का नाम बेवकूफ क्यों रखा, तो यह बताते हैं भाई यह न केवल दुकान का नाम है, बल्कि इसमें इनका कर्म छिपा है. सुरहिया सहतवार निवासी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि, यहां एक ऐसे ग्राहक थे, जो यहां तब से पान खाते हैं, जबसे यह दुकान खुली है. यह उधर आते और जाते दोनों समय यहां पान खाते हैं. यह सन 1976 से पान खा रहे हैं. पहले जर्दा में हलचल, चौड़ी 64, लखनऊआ काला जर्दा मिलता था, जो अब नहीं है.