नई दिल्ली. डूबती अर्थव्यवस्था, भारी कर्ज और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों के बोझ तले दबे पाकिस्तान से एक ऐसी खबर आई है, जिससे हर कोई हैरान है. जिस पाकिस्तान में आम अवाम आटे, दाल और दवाई के लिए तरस रही है, वहां की तेल रिफाइनरियां इस समय खूब नोट छाप रही हैं. पाकिस्तानी के शेयर बाजार में लिस्टेड रिफाइनरी कंपनियों का मुनाफा 1,000% से लेकर 1,274% तक उछल चुका है. जुलाई-सितंबर तिमाही में पाकिस्तान की चार सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों का सामूहिक मुनाफा 1860% तक बढ़ गया. खास बात यह है कि एक कंपनी तो पिछले साल इसी तिमाही में घाटे में थी.
निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की प्रमुख चार तेल रिफाइनरी कंपनियों ने सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही में 57 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक का संयुक्त शुद्ध मुनाफा कमाया है. खास बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इन चारों कंपनियों का संयुक्त मुनाफा महज 2.9 अरब पाकिस्तानी रुपये था. यानी एक ही साल के भीतर इन कंपनियों के प्रॉफिट में 1,860 फीसदी का भारी-भरकम उछाल आया है. अगर हम भारत की बात करें तो देश की 3 प्रमुख सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में कुल 30,106 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है. इन कंपनियों का यह संयुक्त शुद्ध मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की तुलना में 68.3 फीसदी ज्यादा है.
अटक रिफाइनरी को सबसे ज्यादा मुनाफा
पाकिस्तान की रिफाइनरी कंपनियों में मुनाफे के मामले में अटक रिफाइनरी सबसे आगे रही. कंपनी ने जुलाई-सितंबर तिमाही में में 18.65 अरब पाकिस्तानी रुपये का बंपर शुद्ध लाभ दर्ज किया. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कंपनी के मुनाफे में 1,184 फीसदी का जोरदार उछाल आया. पाकिस्तान रिफाइनरी लिमिटेड का शुद्ध मुनाफा 1,274 फीसदी की ऐतिहासिक छलांग लगाकर 13.97 अरब पाकिस्तानी रुपये पर पहुंच गया. वैश्विक स्तर पर बढ़े रिफाइनिंग मार्जिन का सबसे सीधा फायदा पीआरएल को मिला.
सिनेर्जिको पीके (Cnergyico Pk) पिछले वित्त वर्ष की की जुलाई-सितंबर तिमाही में घाटे में थी. लेकिन इस साल उसने 12.88 अरब पाकिस्तानी रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया. नेशनल रिफाइनरी ने भी मुनाफे के मामले में चार अंकों की बढ़त हासिल की. कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1,029 फीसदी उछलकर 11.57 अरब पाकिस्तानी रुपये के स्तर पर पहुंच गया.
इन 3 वजहों से बरसे पैसे
पाकिस्तानी रिफाइनरी कंपनियों के मुनाफे में आए हैरतअंगेज मुनाफे के पीछे केवल मांग ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संकट और नीतिगत फैसलों का भी हाथ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने से दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल की सप्लाई चेन चरमरा गई है. वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्रैक स्प्रेड यानी कच्चे तेल और तैयार ईंधन के बीच का मार्जिन, कई दशकों के हाई लेवल पर पहुंच गय. इस कमी का सीधा लाभ पाकिस्तानी रिफाइनरियों ने उठाया और ऊंचे मार्जिन पर भारी मुनाफा बटोरा.
पाकिस्तान सरकार ने इस साल 18 जुलाई को दैनिक आधार पर तेल की कीमतें तय करने का ऐलान किया. इससे पहले पाक्षिक या मासिक आधार पर कीमतें तय होने से कंपनियों को विनिमय दर और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का नुकसान उठाना पड़ता था. नई डेली रेट निर्धारित होने से पाकिस्तानी कंपनियों के रिस्क को खत्म कर दिया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ते ही कंपनियों को तुरंत घरेलू बाजार से अतिरिक्त मुनाफा बटोरने की छूट मिल गई.
पुराना सस्ता स्टॉक
अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले पाकिस्तानी रिफाइनरियों ने कम दरों पर कच्चा तेल खरीदकर स्टॉक कर रखा था. जैसे ही युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल और तैयार पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के भाव में आग लगी, कंपनियों ने सस्ते कच्चे तेल से तैयार डीजल और पेट्रोल को आसमान छूते दामों पर बेचा. इस जबरदस्त इन्वेंटरी गेन ने उनकी बैलेंस शीट को कई गुना मजबूत कर दिया.
क्या लंबे समय तक होगा मुनाफा
एनर्जी सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी रिफाइनरियों की यह भारी कमाई हमेशा बरकरार नहीं रहने वाली है. यह एक अप्रत्याशित विंडफॉल गेन है जो सप्लाई संकट के चलते पैदा हुआ है. पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था में महंगाई पहले से ही चरम पर है. ऐसे में रिफाइनरियों के इस अस्वाभाविक मुनाफे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए डीजल के रिफाइनिंग मार्जिन पर सीमा (Cap) लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकारी सख्ती और वैश्विक सप्लाई लाइन सामान्य होते ही रिफाइनिंग मार्जिन में दोबारा गिरावट आ सकती है.
भारत से कैसे हुआ ज्यादा मुनाफा?
भारतीय रिफाइनरियां अपने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एफिशिएंसी के दम पर वैश्विक रिफाइनिंग सेक्टर की अगुआ हैं. भारतीय कंपनियां डिस्काउंटेड रूसी क्रूड खरीदकर भारी मुनाफा कमाती रही हैं. हालांकि, पाकिस्तानी रिफाइनरियों का बेस यानी पिछला मुनाफा इतना छोटा था कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल ने उनके मुनाफे में फीसदी के लिहाज से 1,200% से अधिक का विस्फोटक उछाल ला दिया. इनके मुकाबले भारतीय रिफाइनरियों का साइज और व्यापार बहुत बड़ा है. इसलिए प्रतिशत के लिहाज से उनका मुनाफा पाकिस्तानी रिफाइनरियों से कम है.