Last Updated:
Sebi in Action : सेबी के चेयरमैन ने कहा है कि छोटे निवेशकों को बाजार में जोखिम से बचाने और पंप एंड डंप जैसे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बड़े एक्शन की तैयारी है. उन्होंने कहा कि बाजार से निष्क्रिय कंपनियों को जल्द ही बाजार हिया जाएगा. इन कंपनियों से छोटे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की आशंका रहती है.
सेबी ने निष्क्रिय कंपनियों को डी-लिस्ट करने की तैयारी कर ली है.
नई दिल्ली. शेयर बाजार में छोटे निवेशकों के साथ फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी से बचाने के लिए सेबी ने बड़े एक्शन की तैयारी कर ली है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने के लिए काम कर रहा है, जो वास्तव में किसी प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बताया है कि ऐसी कंपनियों की बाजार में मौजूदगी निवेशकों के लिए संभावित खतरा बन सकती है. लिहाजा बाजार में लिस्टेड इनएक्टिव कंपनियों को जल्द ही प्लेटफॉर्म से हटाया जाएगा.
पांडेय ने कहा कि शेयर बाजार में कई ऐसी कंपनियां सूचीबद्ध हैं, जिनकी कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं है. इन कंपनियों के शेयरों का इस्तेमाल कुछ बाजार संचालक कीमतों में आर्टिफिशियल तेजी लाने और बाद में शेयर बेचकर मुनाफा कमाने यानी ‘पंप एंड डंप’ गतिविधियों के लिए करते हैं. इससे छोटे और खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. लिहाजा ऐसी कंपनियों को बाजार से हटाना जरूरी है.
क्यों हटाई जाएंगी कंपनियां
उन्होंने कहा कि बाजार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सेबी इस दिशा में प्रयास कर रहा है. सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन समूहों के माध्यम से निवेशकों को ऐसे शेयरों में फंसाए जाने का जोखिम बना रहता है. इससे निपटने के लिए सेबी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर संदिग्ध खातों और गतिविधियों की निगरानी कर रहा है. निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं.
छोटी-मझोली कंपनियों की भी निगरानी
लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) से जुड़ी कंपनियों की लिस्टिंग व्यवस्था पर पांडेय ने कहा कि नियामक ने इस ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के लिए परामर्श पत्र के माध्यम से कई बदलाव प्रस्तावित किए हैं. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि पुरानी सूचीबद्ध कंपनियों में से कुछ अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के संदर्भ में पांडेय ने कहा कि नियामक आने वाले कुछ सप्ताह में एक और परामर्श पत्र जारी कर सकता है. इसमें खासतौर पर खुलासा संबंधी नियम और एक ही जगह निवेश या जोखिम की सीमा संबंधी प्रस्ताव को शामिल किया जाएगा.
क्यों पैसे निकाल रहे विदेशी निवेशक
सेबी चेयरमैन ने विदेशी निवेशकों पर कहा कि वे दुनिया के विभिन्न बाजारों में निवेश करते हैं और उनके निवेश संबंधी फैसले डॉलर के लिहाज से टैक्स-बाद रिटर्न पर निर्भर करते हैं. कंपनियों की कमाई की संभावनाएं, नए क्षेत्रों का विकास, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी उनके निवेश निर्णयों को प्रभावित करते हैं. सेबी का प्रयास है कि भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए पंजीकरण से लेकर निवेश जारी रखने तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुगम बनाया जाए. सेबी के इन प्रयासों का उद्देश्य एक ओर निष्क्रिय और संदिग्ध कंपनियों पर अंकुश लगाना है, वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय पूंजी बाजार की पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करना है.