Fish Farming: सर्दी में मछलियों को बचाना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

Fish Farming: सर्दी में मछलियों को बचाना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी


Last Updated:

Winter Fish Farming Tips: सर्दियों में मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब की देखभाल में लापरवाही भारी पड़ सकती है. तापमान में गिरावट के कारण मछलियां कम सक्रिय होती हैं और पहले की तुलना में कम भोजन करती हैं. इस दौरान तालाब में ऑक्सीजन की कमी और पानी की गुणवत्ता खराब होने से मछलियों के बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है. भीलवाड़ा में मत्स्य विभाग मछली पालकों को ठंड के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मछलियों को उनकी जरूरत के अनुसार ही दाना देना चाहिए और बचा हुआ भोजन तालाब में जमा नहीं होने देना चाहिए. पानी में ऑक्सीजन बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर एयरेटर का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि मछलियां पानी की सतह पर बार-बार मुंह खोलती दिखाई दें तो यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. तालाब की सफाई, पानी की जांच और बीमार मछलियों की समय पर पहचान से नुकसान कम किया जा सकता है.

भीलवाड़ा. सर्दी का मौसम शुरू होते ही मछली पालकों की चिंता बढ़ने लगी है. तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं का असर अब तालाबों के पानी पर भी पड़ने लगा है. ठंड बढ़ने से मछलियों की एक्टिविटी धीमी हो जाती है और वे पहले की तुलना में कम भोजन करने लगती हैं. ऐसे में मछलियों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उनके बीमार होने का खतरा भी बढ़ जाता है. खासकर तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी और पानी की गुणवत्ता खराब होने से मछलियों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए मछली पालकों को पहले से ही कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए.

भीलवाड़ा का मत्स्य विभाग भी लगातार मछली पलकों को सर्दी में सजक और अलर्ट लेने की सलाह दे रहा है. इसके साथ ही मछली पालकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में जानकारी दी जा रही है. भीलवाड़ा के आसींद क्षेत्र के रहने वाले भेरूलाल ने बताया कि सर्दियों के मौसम में मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. तापमान कम होने के कारण मछलियों का शरीर सामान्य दिनों की तुलना में कम सक्रिय रहता है. इससे उनकी भोजन करने की क्षमता भी घट जाती है.

मछली पालक इन बातों का रखें खास ध्यान

उन्होंने बताया कि मछली पालकों को पहले की तरह ज्यादा मात्रा में दाना नहीं डालना चाहिए. मछलियों को उनकी जरूरत और गतिविधियों के अनुसार ही भोजन देना चाहिए. अगर मछलियां दाना नहीं खा रही है तो अतिरिक्त भोजन तालाब में नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि बचा हुआ दाना पानी में सड़कर उसकी गुणवत्ता खराब कर सकता है. इससे मछलियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है. इसके अलावा तालाब के पानी की नियमित जांच करना भी जरूरी है. पानी में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार एयरेटर का इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि तालाब में मछलियां पानी की सतह पर आकर बार-बार मुंह खोलती दिखाई दें तो यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने के उपाय करने चाहिए। सर्दियों में तालाब में जरूरत से ज्यादा मछलियां रखने से भी बचना चाहिए, क्योंकि अधिक संख्या में मछलियां होने से ऑक्सीजन की खपत बढ़ जाती है.

मछलियों को ठंड में ऐसे रख सकते हैं सुरक्षित

तालाब के आसपास गंदगी और सड़े हुए जैविक पदार्थ जमा नहीं होने देने चाहिए. समय-समय पर तालाब की सफाई और पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है. मछलियों के शरीर पर दाग, घाव, सफेद धब्बे या असामान्य व्यवहार दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसी स्थिति में मत्स्य विभाग के अधिकारी या पशु चिकित्सा अधिकारी से सलाह लेनी चाहिए. बिना सलाह के तालाब में दवाइयों या रसायनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही अचानक पानी बदलने या तापमान में बड़ा बदलाव करने से भी बचना चाहिए. मछली पालक अगर सर्दियों में पानी, ऑक्सीजन और भोजन का सही प्रबंधन करें तो मछलियों को बीमारियों से बचाने के साथ उनके नुकसान को भी कम कर सकते हैं.



Source link