नई दिल्ली (Prashakha Mathur IPS). राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक ही मामले की गूंज है- 40 विला और कॉटेज की खरीद से जुड़ा हाई-प्रोफाइल विवाद. राज्य सरकार की कार्रवाई की गाज बड़े अफसरों पर गिरती नजर आ रही है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को पोस्टिंग के इंतजार (APO) में भेजे जाने के बाद, अब उनकी पत्नी और 1995 बैच की वरिष्ठ आईपीएस डॉ. प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया है. कार्मिक विभाग के इस फैसले ने नौकरशाही में हलचल तेज कर दी है.
एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद देश की प्रतिष्ठित पुलिस सेवा में आईं डॉ. प्रशाखा माथुर का प्रशासनिक करियर बेहद शानदार रहा है. लेकिन संपत्ति विवाद से जुड़े इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब अफसर पति-पत्नी नई पोस्टिंग के इंतजार में हैं. एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच और राज्य सरकार की मंजूरी के बीच यह मामला अब सिर्फ संपत्ति का विवाद नहीं रह गया है. यह राजस्थान प्रशासनिक सेवा की सबसे बड़ी सुर्खियों में से एक बन चुका है.
राजस्थान का बहुचर्चित 40 विला-कॉटेज मामला क्या है?
यह पूरा विवाद एक ही परिवार की तरफ से बड़ी संख्या में अचल संपत्ति में किए गए निवेश से जुड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स और शुरुआती जांच के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों ने महज 2.5 साल के अंदर करीब 6.16 करोड़ रुपये की लागत से 40 विला और कॉटेज खरीदे. इतना ही नहीं, इन संपत्तियों को वापस उसी डेवलपर कंपनी को लीज पर देकर नियमित आय अर्जित करने का मॉडल भी सामने आया.
Dr Prashakha Mathur IPS: डॉ प्रशाखा माथुर और आईएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच चल रही है
ACB जांच और धारा 17-A की मंजूरी का असर
संपत्ति में कथित अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति का संदेह देखते हुए राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्राथमिक जांच दर्ज कर ली है. राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत जांच की फॉर्मल अनुमति दे दी है. किसी भी सेवारत वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए यह जरूरी कानूनी प्रक्रिया है. इसी कानूनी कसौटी के बीच पहले शिखर अग्रवाल और अब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) स्तर की अफसर डॉ. प्रशाखा माथुर को APO कर दिया गया है.
डॉक्टर से IPS अफसर बनी थीं प्रशाखा माथुर
मूल रूप से राजस्थान के अजमेर की रहने वाली डॉ. प्रशाखा माथुर का बैकग्राउंड बेहद प्रतिभाशाली रहा है. उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. लेकिन मेडिकल प्रोफेशन के बजाय उन्होंने देश सेवा के लिए सिविल सर्विसेज को चुना. 1995 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ. करीब तीन दशक के अपने करियर में उन्होंने सिरोही, बांसवाड़ा, पाली, अजमेर और जोधपुर जैसे जिलों में बतौर पुलिस अधीक्षक (SP) बेहतरीन सेवाएं दीं. उन्होंने राजस्थान राज्य महिला आयोग में सदस्य सचिव की भूमिका भी निभाई.
IB से फॉरेंसिक साइंस तक का लंबा अनुभव
राजस्थान कैडर की आईपीएस डॉ. प्रशाखा माथुर का प्रशासनिक अनुभव सिर्फ राज्य पुलिस तक सीमित नहीं रहा. वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नई दिल्ली स्थित इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में भी सेवाएं दे चुकी हैं. इसके अलावा, उन्होंने राजस्थान राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की निदेशक, राज्य मानवाधिकार आयोग में ADG और पुलिस मुख्यालय में योजना, पुनर्गठन, भर्ती और कल्याण जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों की कमान भी संभाली है.
राजस्थान नौकरशाही पर इस कार्रवाई का क्या असर है?
सिविल सर्विसेज में आमतौर पर एक ही परिवार या दंपति के दोनों अफसरों पर एक साथ प्रशासनिक गाज गिरना दुर्लभ माना जाता है. पहले आईएएस पति और फिर आईपीएस पत्नी को APO किए जाने से महकमे में स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और अघोषित निवेश के मामलों में सरकार सख्त रुख अपना रही है. फिलहाल दोनों सीनियर अधिकारी बिना किसी विभाग के पोस्टिंग की प्रतीक्षा में हैं. इसके साथ ही सबकी निगाहें ACB की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं.
आईपीएस प्रशाखा माथुर ने एमबीबीएस किया था, जबकि आईएएस शिखर अग्रवाल बीटेक इन सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर सिविल सर्विसेस में आए थे.