दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लागू किए गए नए ट्रैफिक नियमों का असर पहले ही दिन सड़कों पर दिखाई देने लगा. रविवार को गुरुग्राम और नोएडा से दिल्ली आने वाले हजारों यात्रियों को भारी जाम का सामना करना पड़ा. नेशनल हाईवे-48 पर सरहौल टोल प्लाजा के पास गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच के चलते शंकर चौक से फ्लाईओवर, सर्विस रोड और दिल्ली की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ. वहीं दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर कालिंदी कुंज बॉर्डर से भी गैर BS-6 वाहनों को वापस किया जा रहा है, जिस कारण वहां भी लंबा जाम दिख रहा है.
दो घंटे से जाम में फंसे लोग
दरअसल, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से गैर-BS-VI पेट्रोल और डीजल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है. यह नियम 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा. रविवार को इस नियम के पहले दिन गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर ट्रैफिक पुलिस की टीमें तैनात रहीं. दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों के दस्तावेज जांचे गए. नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के चालान काटे गए और उन्हें वापस भेजा गया. इसी वजह से बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही धीमी पड़ गई और लंबा जाम लग गया.
दिल्ली में किन गाड़ियों की एंट्री पर लगी है रोक?
दिल्ली सरकार के नए नियमों के मुताबिक, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश नहीं मिलेगा, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते. इसमें BS-III और BS-IV श्रेणी के वाहन भी शामिल हैं. हालांकि, BS-VI मानक वाले पेट्रोल-डीजल वाहन, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस पाबंदी से छूट दी गई है.
यह प्रतिबंध केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है. हल्के, मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों पर भी ये नियम लागू होंगे. जिन वाहनों का दिल्ली में कोई गंतव्य नहीं है और जो केवल राजधानी से होकर गुजरना चाहते हैं, उन्हें ईस्टर्न या वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. सरकार ने सर्दियों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया है.
सरहौल टोल पर क्यों लगा लंबा जाम?
गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर रविवार सुबह से ही ट्रैफिक पुलिस की टीमें वाहनों की जांच में जुटी रहीं. दिल्ली की ओर जाने वाली गाड़ियों को आगे बढ़ने से पहले जांच से गुजरना पड़ा. जिन वाहनों को नए नियमों के तहत प्रवेश की अनुमति नहीं थी, उन्हें चालान जारी कर वापस भेजा गया. इस पूरी प्रक्रिया के चलते सरहौल टोल प्लाजा के आसपास वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई और देखते ही देखते लंबी कतारें लग गईं.
जाम का असर केवल टोल प्लाजा तक सीमित नहीं रहा. शंकर चौक से आने वाले फ्लाईओवर और सर्विस रोड पर भी गाड़ियां फंसी रहीं. दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को कई किलोमीटर तक रुक-रुककर चलना पड़ा. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से दो घंटे ज्यादा समय लग गया.
यात्रियों ने बताई परेशानी
जाम में फंसी रेशमा पटेल ने बताया कि वह दिल्ली की ओर जा रही थीं और करीब दो घंटे तक ट्रैफिक में फंसी रहीं. शंकर चौक के फ्लाईओवर से लेकर सरहौल टोल प्लाजा तक उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा.
वहीं, मारुति कुंज से दिल्ली की ओर जा रहे कैब ड्राइवर विकास कुमार ने बताया कि उन्हें जाम में एक घंटे से ज्यादा समय बिताना पड़ा. सेक्टर-54 के रहने वाले लोकेश वर्मा ने भी करीब दो घंटे की देरी की शिकायत की. यात्रियों का कहना था कि वाहन जांच के चलते बॉर्डर पर ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी हो गई थी.
‘दिल्ली चलो’ मार्च से भी बढ़ा ट्रैफिक का दबाव
रविवार को गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर जाम की एक वजह दिल्ली में INDIA ब्लॉक का ‘दिल्ली चलो’ प्रदर्शन भी रहा. इस रैली में शामिल होने के लिए हरियाणा से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लेकर 100 से ज्यादा बसें गुरुग्राम पहुंचीं. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राज बब्बर के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे कुछ कार्यकर्ताओं ने कुछ समय के लिए बैरिकेडिंग हटा दी, जिससे कुछ वाहनों को निकलने का रास्ता मिल गया. हालांकि, पुलिस ने बाद में बैरिकेडिंग दोबारा लगा दी.
ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के बाद अधिकारियों ने अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया. उन्होंने वाहनों की जांच में तेजी लाने और जाम को नियंत्रित करने की कोशिश की. कई घंटों तक परेशानी झेलने के बाद दोपहर करीब 3 बजे ट्रैफिक की रफ्तार में सुधार होना शुरू हुआ.
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के पहले दिन गुरुग्राम बॉर्डर पर पैदा हुई स्थिति ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आने वाले दिनों में वाहन जांच और ट्रैफिक प्रबंधन के बीच तालमेल कैसे बनाया जाएगा, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के साथ यात्रियों को लंबी कतारों से भी राहत मिल सके.