Business Idea: जिस कचरे को लोग फेंकते हैं, जयपुर के युवाओं ने उससे खड़ी की 250 करोड़ की कंपनी, Forbes तक पहुंचा नाम

Business Idea: जिस कचरे को लोग फेंकते हैं, जयपुर के युवाओं ने उससे खड़ी की 250 करोड़ की कंपनी, Forbes तक पहुंचा नाम


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Jaipur Waste Management Startup: कचरे की समस्या को कारोबार और रोजगार के अवसर में बदलने की कहानी जयपुर के दो युवा उद्यमियों ने लिखी है. अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर वशिष्ठ ने 2016 में कॉलेज कैंपस में सफाई अभियान और वेस्ट अवेयरनेस कैंपेन से शुरुआत की. इसके बाद 2018 में ‘वीवॉइस लैब’ की नींव रखी. आज यह स्टार्टअप 250 करोड़ रुपए का क्लीन-टेक कारोबार बन चुका है और देश के 25 शहरों में अपनी सेवाएं दे रहा है. कंपनी हर साल 6 से 7 लाख टन से अधिक कचरे को प्रोसेस करती है. इसका स्मार्ट सिस्टम RFID टैग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रूट मैनेजर सॉफ्टवेयर पर आधारित है. इससे कचरा संग्रहण, कर्मचारियों की उपस्थिति और पिकअप की रियल टाइम मॉनिटरिंग होती है. कंपनी कचरे के पुनर्चक्रण के साथ पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही है.

जयपुर के युवाओं के स्टार्टअप का डंका अब दुनियाभर में बज रहा है. छोटे स्तर पर शुरू हुए स्टार्टअप आज करोड़ों रुपए की सफल कंपनियों के रूप में संचालित हो रहे हैं. ऐसे ही जयपुर के दो युवा अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर वशिष्ठ हैं, जिन्होंने ‘वीवॉइस लैब’ के नाम से कचरे और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े स्टार्टअप की शुरुआत की. आज उनके इस स्टार्टअप का टर्नओवर 250 करोड़ रुपए है. ‘वीवॉइस लैब’ का स्टार्टअप राजस्थान सहित देश के 25 शहरों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है.

‘वीवॉइस लैब’ के क्लीन-टेक स्टार्टअप की कहानी जयपुर के इन दोनों युवाओं के 2016 में कॉलेज कैंपस सफाई अभियान और वेस्ट अवेयरनेस कैंपेन से शुरू हुई थी. उस समय अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर ने कॉलेज के इस सफाई अभियान को केवल एक प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा, बल्कि कचरे और सफाई की समस्या के स्थायी समाधान पर विचार करना शुरू किया. इसी सोच के साथ 2018 में ‘वीवॉइस लैब’ स्टार्टअप की शुरुआत हुई, जो अब शहरों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है.

जयपुर के अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर के स्टार्टअप ‘वीवॉइस लैब’ की सफलता अब एक सफल स्टार्टअप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस स्टार्टअप का नाम फोर्ब्स अंडर-30 की लिस्ट तक पहुंच चुका है. जयपुर की ‘वीवॉइस लैब’ कंपनी एक अपशिष्ट प्रबंधन कंपनी है, जो कचरे के संग्रहण, ट्रैकिंग, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग करती है. साथ ही, कंपनी का फोकस टेक्सटाइल अपशिष्ट को दोबारा उपयोगी संसाधनों में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है. यह एक व्यवस्थित और तकनीक आधारित स्टार्टअप है.

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आपको बता दें कि ‘वीवॉइस लैब’ का स्टार्टअप वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर आधारित है. 9 साल पहले शुरू हुआ ‘वीवॉइस लैब’ आज 250 करोड़ रुपए का क्लीन-टेक स्टार्टअप बन चुका है. यह 25 शहरों में काम कर रहा है और हर साल 6 से 7 लाख टन से ज्यादा वेस्ट प्रोसेस करता है. आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल 62 मिलियन टन कचरा निकलता है, जिसे या तो खुले में फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है. लेकिन ‘वीवॉइस लैब’ का वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लाखों टन कचरे को रिसाइकिल करने में मदद करता है.

”वीवॉइस लैब’ का स्टार्टअप पूरी तरह इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित है. जिसमें हर घर, होटल, हॉस्पिटल को ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ टैग दिया जाता है. जिससे कचरे के उठने से लेकर प्रोसेस होने तक रियल टाइम मॉनिटरिंग होती है कि कचरा कब उठा, किसने उठाया और कितना उठा. इसके अलावा वर्कर की उपस्थिति, परफॉर्मेंस और प्रोसेस पर भी खास मॉनिटरिंग होती है. कंपनी में सुव्यवस्थित अलर्ट प्रबंधन प्रणाली वाला मोबाइल ऐप है, जिसकी मदद से निर्धारित पिकअप से पहले हर बार सूचना मिल जाती है.

‘वीवॉइस लैब’ के वर्कर्स द्वारा एकत्रित कचरे का अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. गीले कचरे को खाद बनाने के लिए भेजा जाता है, जबकि सूखे कचरे को कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और वस्त्र जैसी सामग्रियों के आधार पर अलग किया जाता है. कंपनी की ‘रीसूत्र’ यूनिट में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो कपड़ा अपशिष्ट को ट्रैक और प्रोसेस कर पुनः उपयोग योग्य उत्पादों में परिवर्तित करती है. साथ ही, कंपनी लैंडफिल स्थलों पर कचरे के ढेर को रोकने के लिए नगर निकायों की लगातार मदद कर रही है.

‘वीवॉइस लैब’ का स्टार्टअप वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर आधारित है, लेकिन इसके साथ ही यह लगातार अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है. कंपनी एक स्मार्ट सिस्टम के जरिए काम करती है. इसमें खास रूट मैनेजर सॉफ्टवेयर की मदद से कचरा संग्रहण के लिए रूट निर्धारित किए जाते हैं, ताकि कर्मचारी लोगों के घरों तक पहुंचकर समय पर सेवा प्रदान कर सकें. इस तरह कंपनी पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी लगातार सफलता के साथ आगे बढ़ रही है.



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