बिहार के शशि का शहद के बिजनेस से ₹10 करोड़ टर्नओवर, 30 साल पहले 10 बॉक्स से शुरू किया था मधुमक्खी पालन


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Business Success Story: बिहार के गया के शशि कुमार ने 30 साल पहले महज 10 बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया था. आज उनका सालाना टर्नओवर लगभग 10 करोड़ रुपये पहुंच गया है. वे हर साल 35 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन करते हैं. उनसे बिहार के 200 से अधिक किसान जुड़कर काम कर रहे हैं.

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शहद से ₹10 करोड़ टर्नओवर, 30 साल पहले 10 बॉक्स से शुरू किया था मधुमक्खी पालनZoom

गयाजीः जिले के मानपुर प्रखंड क्षेत्र के रहने वाले शशि कुमार 30 साल पहले 10 हजार रुपए की लागत से 10 बॉक्स में मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी. आज गया ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के सबसे बड़े मधुमक्खी पालक में से एक हैं. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले शशि कुमार साइकिल से अपने व्यवसायिक को शुरू किया था. आज उनके पास तीन फोर व्हीलर और एक बड़ा घर है. शहद उत्पादन से इनका सालाना टर्नओवर लगभग 10 करोड रुपए प्रति वर्ष है.

पहली बार नहीं मिली थी सफलता
मूल रूप से जहानाबाद जिले के विर्रा गांव के रहने वाले हैं और बचपन से ही खेत में काम करने का शौक था. खेती-बाड़ी को करीब से समझा था. 15 वर्ष की उम्र में पढ़ाई के सिलसिले में गया आए थेके. मिस्ट्री में डिग्री ली. लेकिन मन हमेशा खेती से जुड़ा रहा, नौकरी की बजाय कुछ ऐसा करने की चाहत थी. जिसमें पूंजी कम लगे और मुनाफा बेहतर हो. यहीं से इन्हे मधुमक्खी पालन की प्रेरणा मिली. शुरुआत में इन्हे सफलता नहीं मिली, लेकिन 1996 में दोबारा मधुमक्खी पालन को शुरू किया.

1998 में खादी बोर्ड के साथ जुड़कर किसानों को प्रशिक्षित किया. देश के कई राज्यों में ले जाकर उन्हें प्रशिक्षण दिलाने लगे. 1998 मे ही इन्हे धारवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोग्रेसिव बी कीपर्स का अवार्ड मिला. जबकि गया के बैंक ऑफ़ बड़ौदा के द्वारा सर्वश्रेष्ठ उद्यमी पुरस्कार दिया गया. मधुमक्खी पालन में उन्होंने ऐसा काम किया कि वर्ष 1999, 2003, 2007 और 2009 में राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा से प्रगतिशील किसान का सम्मान मिला.

2004 में एपिडा एवं नेशनल बी बोर्ड दिल्ली के द्वारा प्रगतिशील पुरस्कार दिया गया. जबकि 2008 में एनजी रंगा फार्मर अवॉर्ड फॉर डायवर्सिफाइड एग्रीकल्चर के लिए सम्मानित किया गया. 2013-15 तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर के सदस्य रहे. अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए 1997 में एक लाख रुपए का लोन लिया था. जिसका उपयोग इन्होंने पैकेजिंग इकाई स्थापित करने के लिए किया था.

2004 में शुरू की कंपनी
2004 में इन्होंने शिवा एग्रो नेचुरल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी शुरू की. जिसकी परियोजना लागत 45 लाख रुपए थी. इससे इन्होंने एक प्रसंस्करण, परीक्षण, पैकेजिंग संयंत्र स्थापित किया और शिवा एग्रो के ब्रांड नाम से मार्केटिंग शुरू की. वर्तमान में शशि कुमार के साथ बिहार के 200 से अधिक मधुमक्खी पालक इनके साथ जुड़कर काम कर रहे हैं.

लोकल 18 से बातचीत में शशि कुमार बताते हैं कि आज उनके यहां शहद का उत्पादन सालाना 35 मेट्रिक टन है और टर्नओवर 10 करोड रुपए से अधिक है. इन्होंने बताया इस व्यवसाय में काफी परेशानियों से भी गुजरना पड़ा. शुरुआत में साइकिल से आवागमन करना पड़ता था. मधुमक्खी पालन में खुले आसमान के नीचे तंबू में रात गुजारने पड़ते थे. लेकिन आज ऐसो आराम की जिंदगी जी रहे हैं और बच्चे भी अच्छी नौकरी कर रहे हैं.



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