लखनऊः कभी देश की राजनीति में अपनी पैठ रखने वाले आजम खान के दिन बहुत ही दयनीय हो गए हैं. आलम यह है कि कोर्ट अभी एक मामले में जमानत देती है तो जेल के बाहर दूसरे मामले में गिरफ्तारी के लिए पुलिस इंतजार कर रही होती है. आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. कभी किसी जमाने में वह सपा के अंदर नंबर दो या फिर नंबर तीन के नेता माने जाते थे. लेकिन अब हाल ऐसा है कि पिछले कुछ सालों से उनका दिन और रात दोनों ही जेल में कट रहा है. हालांकि बीच में एक-दो बार जमानत पर जेल से बाहर आए. लेकिन फिर जेल चले गए. इसी कड़ी में बीते शनिवार को आजम खान और उनके बेटे जेल से बाहर आए तो ईडी की टीम पहले से गाड़ी लेकर खड़ी थी, उनको कस्टडी में लेने के लिए. अब इस कार्रवाई के बाद हर किसी के मन में बहुत सारे सवाल हैं, जिसके जवाब ढूंढने की हमने कोशिश की है…
आजम खान को कहां ले गई ईडी की टीम
31 अक्टूबर की रात को रामपुर जेल के बाहर से हिरासत में लेने के बाद सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की टीम आजम खान को दिल्ली लेकर चली गई है. हालांकि 1 नवंबर की सुबह ईडी की टीम 10 बजे गाजियाबाद के MP-MLA कोर्ट में आजम खान को पेश करेगी. सूत्रों के मुबतबिक रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने आजम खान को पेश किया जा सकता है. इसके बाद ईडी आजम खान की कस्टडी मांगेगी.
आजम खान पर ईडी ने क्या आरोप लगाए हैं?
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का मुख्य केंद्र रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और इसे संचालित करने वाला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट है. ईडी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया और निर्माण पर खर्च हुई बड़ी रकम का सोर्स नहीं बताया गया. ईडी की एफआईआर में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है. ठेकेदारों के जरिए रकम पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है. जिन ठेकेदारों को सरकारी काम मिले, उनसे कथित तौर पर धन और निर्माण सामग्री यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल कराई गई. सरकारी जमीन पर कब्जा करने का भी आरोप है. शत्रु संपत्ति पर कब्जा करने का भी आरोप है. निर्माण खर्च का हिसाब नहीं दिया गया.
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद क्या है, जिसको लेकर ईडी ने एफआईआर दर्ज की?
जौहर यूनिवर्सिटी का पूरा नाम मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी है. इसकी स्थापना साल 2006 में रामपुर में हुई थी. इसे मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट संचालित करता है. आजम खान इस ट्रस्ट के प्रमुख संस्थापक और यूनिवर्सिटी के चांसलर रहे हैं. आजम खान का दावा रहा है कि इस यूनिवर्सिटी की स्थापना का मकसद रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था. लेकिन उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यूनिवर्सिटी की जमीन और निर्माण को लेकर विवाद गहराता चला गया.
जमीन कब्जा करने का आरोप- बता दें कि यूनिवर्सिटी के लिए जमीन जुटाने के दौरान कई किसानों की जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगे हुए हैं. रामपुर के अजीमनगर थाने में किसानों की शिकायतों पर 26 एफआईआर दर्ज हुईं. यूनिवर्सिटी परिसर में शामिल जमीन के कुछ हिस्सों को लेकर शत्रु संपत्ति का विवाद सामने आया. प्रशासन की जांच में सिंहानखेड़ा गांव की करीब 34 एकड़ जमीन के 45 प्लॉट को लेकर अनियमितता का आरोप लगा. इस जमीन पर ट्रस्ट की लीज भी रद्द की गई और बाद में प्रशासन के माध्यम से कब्जा वापस लिया गया.
यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल का आरोप- बता दें कि यही मामला अब ईडी की कार्रवाई का बड़ा आधार बना है. एजेंसी का आरोप है कि सरकारी विभागों के निर्माण कार्यों और ठेकेदारों के जरिए मिलने वाले धन का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया. 13 अक्टूबर 2026 को ईडी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में एक नई एफआईआर दर्ज हुई. इसमें आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, दो निजी कंपनियों और अन्य लोगों को नामजद किया गया. ईडी की जांच पहले से 2019 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जुड़ी है. अब एजेंसी ने नए मामलों और वित्तीय लेनदेन को भी अपनी जांच में शामिल किया है.
अगर आजम खान ईडी के मामले में दोषी साबित हुए तो कितनी सजा होगी?
आजम खान के खिलाफ ईडी की कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत हो रही है. इस कानून की धारा 3 में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध को परिभाषित किया गया है, जबकि धारा 4 में इसकी सजा का प्रावधान है. अगर अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध साबित हो जाता है तो न्यूनतम तीन साल की कठोर कैद हो सकती है. अधिकतम सात साल तक की कठोर कैद हो सकती है. इसके साथ आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है. कुछ विशेष अनुसूचित अपराधों से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग में सजा की अधिकतम अवधि 10 साल हो सकती है. इसके अलावा, नई एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। इनके तहत दोष सिद्ध होने पर अलग से सजा हो सकती है.
रामपुर जेल से बाहर आते ही ईडी आजम खान को क्यों गिरफ्तार करके ले गई?
दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड बनवाने और इस्तेमाल करने के मामले में नवंबर 2025 में सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद दोनों रामपुर जेल में बंद थे. 29 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत दे दी. हालांकि अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इसका मतलब था कि उन्हें जेल से बाहर आने की राहत तो मिल गई, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही. 31 अक्टूबर की शाम आजम खान जैसे ही रामपुर जेल से बाहर आए, ईडी की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई.
रामपुर जेल में आजम खान किस केस में बंद थे?
आजम खान रामपुर जिला जेल में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में सजा काट रहे थे. यह मामला साल 2019 में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज हुआ था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए थे. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंकिंग और आयकर से जुड़े कामों में किया गया. आरोप था कि आजम खान ने भी बेटे को इस कथित फर्जीवाड़े में मदद की थी. 17 नवंबर 2025 को रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद दोनों जेल में बंद थे. अक्टूबर 2026 में हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर जमानत दी, जिसके बाद आजम खान को 31 अक्टूबर को जेल से बाहर आने का मौका मिला.
योगी सरकार में आजम खान पर अब तक कौन-कौन से आरोप लगे हैं?
उत्तर प्रदेश में मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद आजम खान और उनके करीबियों के खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई हुई. खासतौर पर 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद उनके खिलाफ मुकदमों की संख्या तेजी से बढ़ी.
आजम खान किन-किन मामलों में जेल जा चुके हैं?
आजम खान की जेल यात्रा का सिलसिला फरवरी 2020 से शुरू हुआ था. इसके बाद उन्हें अलग-अलग मामलों में जेल जाना पड़ा.
| मामला | कार्रवाई और सजा |
|---|---|
| शत्रु संपत्ति मामला | फरवरी 2020 में आत्मसमर्पण के बाद सीतापुर जेल गए। करीब 23 महीने जेल में रहे। मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद रिहा हुए। |
| भड़काऊ भाषण मामला | अक्टूबर 2022 में तीन साल की सजा सुनाई गई। |
| छजलैट मामला | फरवरी 2023 में हाईवे पर रास्ता रोकने के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई। |
| भड़काऊ भाषण का दूसरा मामला | जुलाई 2023 में दो साल की सजा सुनाई गई। |
| दो जन्म प्रमाणपत्र मामला | अक्टूबर 2023 में आजम खान, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा हुई। |
| डूंगरपुर मामला | मार्च 2024 में सात साल की सजा सुनाई गई। |
| डूंगरपुर का दूसरा मामला | मई 2024 में 10 साल की सजा और 14 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। |
| दो पैन कार्ड मामला | नवंबर 2025 में सात साल की सजा सुनाई गई। |
आजम खान पर कितने मुकदमे दर्ज हैं और कितने मामलों में सजा हुई है?
आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए हैं. 1 नवंबर 2026 को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान के खिलाफ कुल 92 एफआईआर दर्ज हैं। इनमें से 81 मामले अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं. इसी रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें नौ मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है. हालांकि, अक्टूबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ पहले की आठ दोषसिद्धियों का उल्लेख किया था.
कौन हैं आजम खान, यूपी की राजनीति में कितना बड़ा है उनका कद?
मोहम्मद आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं. उनका जन्म 14 अगस्त 1948 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और राजनीति में आने से पहले वकालत भी की. आजम खान का राजनीतिक सफर 1980 में शुरू हुआ. वह रामपुर विधानसभा सीट से कई बार विधायक चुने गए. वह 10 बार विधायक रहे हैं. समाजवादी पार्टी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही वह मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में शामिल रहे. उत्तर प्रदेश में जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, आजम खान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. अखिलेश यादव की सरकार में भी वह कैबिनेट मंत्री रहे. इसके अलावा वह रामपुर लोकसभा सीट से सांसद भी चुने गए. आजम खान को समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में गिना जाता रहा है। रामपुर और आसपास के जिलों में उनका राजनीतिक प्रभाव रहा है.