‘मौन भी एक आवाज है’, अब अपमान नहीं, अधिकार और सम्मान की बात; पटना में ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगों को लेकर लोकमंच की मौन पदयात्रा

‘मौन भी एक आवाज है’, अब अपमान नहीं, अधिकार और सम्मान की बात; पटना में ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगों को लेकर लोकमंच की मौन पदयात्रा


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Lokmanch Brahmin Community March Patna: पटना के मिलर हाई स्कूल मैदान में लोकमंच संगठन की ओर से मौन संकल्प पदयात्रा का आयोजन हो रहा है. ब्राह्मण समाज के स्वाभिमान, एकता और सामाजिक जागृति के बैनर तले हो रही इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं. संगठन ने 15 सूत्री मांगों को लेकर यह मौन पदयात्रा बुलाई है. नारा दिया गया है – मौन भी एक आवाज है, जब संकल्प जनता का हो. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िए.

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पटना में ब्राह्मण समाज का मौन संकल्प पदयात्रा, सरकार के सामने रखीं 15 मांगें

पटना. बिहार की राजधानी पटना में रविवार (1 नवंबर) को ब्राह्मण समाज के संगठन लोकमंच की ओर से 15 सूत्री मांगों को लेकर मौन संकल्प पदयात्रा निकाली जा रही है. मिलर हाई स्कूल मैदान से आयोजित इस पदयात्रा के जरिए संगठन ने ब्राह्मण समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं. लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार बब्लू के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के ब्राह्मण समाज को एकजुट और संगठित करना बताया गया है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी दूसरे समाज के विरोध में खड़ा होना नहीं, बल्कि अपने समाज के अधिकार, सम्मान और हितों की आवाज उठाना है.

ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन समेत 15 मांगें

लोकमंच की ओर से जारी मांगपत्र में बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन की मांग प्रमुखता से शामिल है. संगठन ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर बिहार में भी ऐसा बोर्ड बनाने की मांग की है. इसके साथ ही ब्राह्मण समाज की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का सर्वेक्षण कराकर सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने भगवान परशुराम जयंती यानी अक्षय तृतीया पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने, पटना में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित करने और संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण की मांग भी उठाई है.

शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी पर जोर

लोकमंच ने ब्राह्मण समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और सरकारी पदों पर उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है. इसके अलावा केंद्रीय स्तर पर सवर्ण आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा है. मांगपत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने की बात कही गई है. गरीब बच्चों के लिए कोचिंग की व्यवस्था, यूपीएससी और बिहार लोक सेवा आयोग जैसी परीक्षाओं में समान अवसर तथा विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा देने की मांग भी शामिल है. संगठन ने ब्राह्मण युवाओं के लिए ऋण, अनुदान, प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने की मांग उठाई है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें.

लोकमंच की मौन संकल्प पदयात्रा में संगठन ने अपना 15 सूत्री प्रमुख मांग पत्र जारी कर दिया है. समाज, सम्मान, अधिकार, विकास के नारे के साथ ब्राह्मण समाज की एकजुटता दिखाने के लिए यह पदयात्रा बुलाई गई है. पोस्टर पर साफ लिखा है – अब मौन नहीं, अधिकार और सम्मान की बात.

भूमि विवाद और ऐतिहासिक विरासत का मुद्दा भी उठाया

लोकमंच ने वर्ष 1990 से 2005 के बीच ब्राह्मण समाज की खेती योग्य जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जों की विशेष जांच कराने और वास्तविक रैयतों को उनकी जमीन वापस दिलाने की मांग की है. इसके साथ ही भारतीय मंडन मिश्र के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी मांग भी उठाई गई है.

लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार बब्लू के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के ब्राह्मण समाज को एकजुट और संगठित करना बताया गया है, इसके तहत ब्राह्मणों के मान-सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए कल्याण बोर्ड से लेकर सवर्ण आयोग तक की मांग की जा रही है.

समाज को एकजुट करने का संदेश

लोकमंच की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि समाज के लोग अलग-अलग रहकर अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते. इसके लिए एकजुट होकर संगठित आवाज उठाने की जरूरत है. संगठन ने ब्राह्मण समाज के लोगों से मौन संकल्प पदयात्रा में शामिल होकर समाज के अधिकार, सम्मान और हितों के लिए अपनी भूमिका निभाने की अपील की है. लोकमंच का कहना है कि यह पदयात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, स्वाभिमान और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संकल्प है.



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