परदेश में 10 हजार की नौकरी से बढ़िया है ‘जल फल’ की खेती, दरभंगा के किसान ने बताया डबल मुनाफा निकालने का तरीका

परदेश में 10 हजार की नौकरी से बढ़िया है ‘जल फल’ की खेती, दरभंगा के किसान ने बताया डबल मुनाफा निकालने का तरीका


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परदेश में 10,000 की नौकरी से बढ़िया है ‘जल फल’ की खेती, किसान ने दी जानकारी

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यदि आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नए तरह की खेती करना चाहते हैं तो आप बिना मिट्टी वाली खेती कर सकते हैं. इस खेती का तौर तरीका थोड़ा अलग होगा. इसके लिए आपको अपने खेत को तालाब बनाना होगा. अब इस तालाब में आप सिंघाड़ा और मखाना की खेती कर सकते हैं.

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दरभंगा: पग-पग पोखर, माछ-माखन, यह स्लोगन मिथिलांचल क्षेत्र के लिए यूं ही नहीं कहा जाता है. यहां आपको कदम-कदम पर पोखर यानी तालाब देखने को मिल जाएंगे और इन तालाबों से अच्छी कमाई कैसे की जाती है, यह यहां के किसानों को बखूबी पता है. दरभंगा के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर जल फल यानी सिंघाड़े की खेती से बंपर कमाई कर रहे हैं. ऐसे ही एक किसान हैं जिन्होंने अपने खेतों में 3 फीट पानी में सिंघाड़े की फसल लगा रखी है. लगभग दो बीघा में उन्होंने सिंघाड़े और मखाने की खेती कर रखी है और इससे अच्छी आमदनी ले रहे हैं.

स्थानीय किसान सुनील साहनी बताते हैं कि उन्होंने दो बीघा में सिंघाड़े की फसल लगा रखी है. वह बताते हैं कि पिछले 6 सालों से वह लगातार सिंघाड़े की खेती यहां पर कर रहे हैं. इससे  उन्हें इतनी आमदनी हो जाती है जितनी बाहर प्रदेश में जाकर 10 से 12 हजार की नौकरी करने पर भी नहीं होती.

सुनील बताते हैं कि अभी एक महीने तक इसमें तोड़ाई चलेगी, उसके बाद पूरा फायदा और नुकसान का आकलन किया जा सकेगा लेकिन अभी तक फसल बहुत अच्छी है. अभी मार्केट में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के दर से वह थोक में सिंघाड़ा बेच रहे हैं. इससे उनके रोज के पारिवारिक खर्च का कुछ हिस्सा निकल आता है.

किसान का कहना है कि छठ पर्व के समय में इसके दाम और भी ज्यादा बढ़ जाएंगे. छठ में सिंघाड़े की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि पूजा में इसका इस्तेमाल होता है. उस समय यही सिंघाड़ा 50 से 60 रुपये किलो तक बिकता है. इसलिए छठ के समय किसानों को दोगुना मुनाफा मिलता है. इससे उन्हें मेहनताना निकालने के बाद थोड़ी बहुत बचत भी हो जाती है.

कम लागत और कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा देने वाली यह फसल अब मिथिला के किसानों के लिए वरदान बन गई है. जहां पहले खेतों में पानी भरा होने से किसान परेशान होते थे, वहीं अब उसी पानी में सिंघाड़े और मखाने की खेती कर वे लाखों कमा रहे हैं. मजेदार बात यह है कि सिंघाड़ा और मखाना दोनों ही पानी में होने वाली खेती हैं. यानी इसके लिए बहुत सेटअप बदलना नहीं है.



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