प्रयागराज: यूपी में प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित बरईपुर-रामनगर गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस को एक मकान में जमीन के नीचे भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली. सूचना के आधार पर पुलिस ने 28 अक्टूबर की देर शाम राजेश यादव और राकेश यादव के मकान पर छापेमारी की. तलाशी के दौरान जमीन के नीचे दबे तीन नीले प्लास्टिक के ड्रम बरामद हुए. जब इन ड्रमों को बाहर निकाला गया तो उनके अंदर 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं.
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल आयकर विभाग को इसकी सूचना दी. इसके बाद आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बरामद नोटों की गिनती शुरू कराई गई. शुरुआत में रकम को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे, लेकिन शनिवार को गिनती पूरी होने के बाद वास्तविक आंकड़ा सामने आया. तीनों ड्रमों से कुल 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये बरामद हुए हैं.
चार दिनों से जारी है खुदाई, अब दस्तावेजों ने बढ़ाई जांच
करोड़ों रुपये मिलने के बाद आयकर विभाग की टीम ने मकान के दूसरे हिस्सों की भी जांच शुरू कर दी. अधिकारियों को आशंका है कि घर में नकदी के अलावा अन्य कीमती सामान या वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी छिपाए गए हो सकते हैं. इसी आशंका के चलते मकान के अलग-अलग कमरों और जमीन की खुदाई कराई जा रही है.
जांच के दौरान तीन प्लास्टिक पैकेट में बंद दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. आयकर विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन कागजात से नकदी के स्रोत और परिवार की आर्थिक गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है. हालांकि, दस्तावेजों की जांच पूरी होने से पहले उनके आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. आयकर विभाग के सहायक निदेशक (जांच) अभय कुमार सोनकर के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही है. तलाशी अभियान में मजदूरों को अलग-अलग शिफ्ट में लगाया गया है. मकान के अंदर और आसपास की जगहों पर भी जांच जारी है.
पुणे में काम करने से लेकर प्रयागराज में करोड़ों की संपत्ति तक की कहानी
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी नकदी कहां से आई? आयकर विभाग राजेश यादव और उनके भाई राकेश यादव की पुरानी आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रहा है. जांच में सामने आया है कि दोनों भाइयों ने पहले पुणे में एक बुलियन कारोबारी की वर्कशॉप में काम किया था. कोरोना महामारी के दौरान वे वापस प्रयागराज लौट आए थे. इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव आने की बात सामने आई है.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पिछले करीब पांच वर्षों में परिवार ने अलग-अलग स्थानों पर लगभग 22 बीघा जमीन कैसे खरीदी. इन जमीनों की कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. इसके अलावा परिवार के कारोबार और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं.
म्यूचुअल फंड, शेयर और एलआईसी में भी निवेश
आयकर विभाग की जांच में परिवार के सदस्यों के नाम पर म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और जीवन बीमा पॉलिसियों में लाखों रुपये के निवेश से संबंधित जानकारी भी सामने आई है. इसके साथ ही प्रयागराज और प्रतापगढ़ में खरीदी गई जमीनों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं. सामने आई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में प्रयागराज-लखनऊ राजमार्ग पर प्रतापगढ़ जिले में करीब सवा बिस्वा जमीन लगभग 75 लाख रुपये में खरीदी गई थी. जांच एजेंसियां अब इन निवेशों और संपत्तियों के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत का मिलान कर रही हैं. यह भी पता लगाया जा रहा है कि परिवार की घोषित आय और उसकी संपत्तियों के बीच कोई असामान्य अंतर तो नहीं है.
ट्रैक्टर, पिकअप और कारोबार में भी किया निवेश
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुणे से वापस आने के बाद यादव परिवार की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई. परिवार ने जमीन खरीदने के साथ मकान का निर्माण कराया. इसके अलावा ट्रैक्टर, पिकअप वाहन और डीजे से जुड़े उपकरण भी खरीदे गए. परिवार की ओर से सीमेंट और सरिया का कारोबार भी शुरू किया गया. जांच एजेंसियां इस कारोबार में हुए निवेश, खरीद-बिक्री और आय के रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं. अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि कारोबार से होने वाली वास्तविक आमदनी और परिवार की संपत्तियों में कितनी समानता है.
एक पड़ोसी की शिकायत से शुरू हुई थी पूरे मामले की जांच
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक आपराधिक शिकायत से हुई थी. 21 अक्टूबर को पड़ोसी अभिषेक कुमार ने नवाबगंज थाने में राजेश यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी. इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि यादव परिवार के मकान में जमीन के नीचे चोरी की रकम छिपाकर रखी गई है. इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की और तीन ड्रमों में भरी नकदी बरामद की. हालांकि, नकदी चोरी की है या किसी अन्य स्रोत से आई है, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस और आयकर विभाग दोनों ही इस बात की जांच कर रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम का वास्तविक मालिक कौन है और इसे जमीन के नीचे छिपाकर रखने की वजह क्या थी.
राजेश और राकेश से पूछताछ, परिवार की संपत्तियां भी जांच के घेरे में
आयकर विभाग की टीम राजेश यादव और राकेश यादव से लगातार पूछताछ कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, दोनों भाइयों से अलग-अलग और एक साथ भी सवाल-जवाब किए जा रहे हैं. उनके बयानों में कुछ अंतर सामने आने की बात भी जांच से जुड़े अधिकारियों ने कही है. अब जांच एजेंसियां परिवार की अन्य संपत्तियों, कारोबार और बैंकिंग लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं. जरूरत पड़ने पर परिवार के दूसरे सदस्यों से भी पूछताछ की जा सकती है.