Last Updated:
Dehradun News: उत्तराखंड के चमोली में हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद से अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि ऑरेन्ज अलर्ट के बावजूद उड़ान की परमिशन क्यों दी गई. इस साल चारधाम यात्रा में भले ही ये पहला हादसा हो, लेकिन साल 2009 से 2026 के बीच उत्तराखण्ड में 15 हेलीकॉप्टर हादसे हुए, जबकि कई बार हेली की इमरजेन्सी लैंडिग भी हुई.
चमोली हेलीकॉप्टर हादसा
देहरादून: चमोली हेलीकॉप्टर हादसे की जांच में अलग-अलग जांच एजेन्सी लगी हुई है. लेकिन घटना को लेकर जो सबसे बड़ा सवाल है वो यूकाडा पर उठ रहा है. ऑरेन्ज अलर्ट के बावजूद उड़ान की परमिशन देना गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है. क्यों आखिर अधिकारी डिपॉर्टमेन्ट को सीरियसली नहीं लेते. इस साल चारधाम यात्रा में भले ही ये पहला हादसा हो, लेकिन साल 2009 से 2026 के बीच उत्तराखण्ड में 15 हेलीकॉप्टर हादसे हुए, जबकि कई बार हेली की इमरजेन्सी लैंडिग भी हुई.
शुक्रवार को घटी हेली क्रैश घटना की भले ही जांच चल रही हो. लेकिन अधिकारियों की लापरवाही को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता, जिन्होने खराब वेदर कंडीशन में भी उड़ान की परमिशन दे दी. इससे पहले भी यूकाडा को अधिकारियों ने सीरयसली नहीं लिया, चाहे देहरादून की पूर्व डीएम रही सोनिका हो या वर्तमान में देहरादून डीएम आशीष चौहान, दोनों के ही कार्यकाल में हेली हादसे चर्चा में रहे.
सीईओ ने उठाई जांच की मांग
सेंसिटिव डिपॉर्टमेन्ट में शामिल यूकाडा में हल्की सी लापरवाही भारी पड़ जाती है. हालांकि अब सीईओ जांच की बात कह रहे है. वेदर कंडीशन पर कहते हैं कि खराब मौसम की वजह से शुक्रवार को 12 बजे उड़ान नहीं भरी गई थी. जबकि ऐविएशन सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि अधिकारियों को लगता है कि यूकाडा में आना पनिशमेन्ट पोस्टिंग है. काम के बहुत स्कोप तो है, लेकिन कोई करना नहीं चाहता.य हां काम को समझने के लिए एविएशन सेक्टर का जानकार ही होना चाहिए.
हर 10 मिनट पर मिले पायलट को मौसम का अपडेट
वहीं पायलट मानते हैं कि वैली में मौसम पल-पल में बदलता है, जिसके लिए जरूरी है कि सिस्टम भी अपडेट हो. पायलट को वेदर का अपडेट हर 10 मिनट में मिलना चाहिये. कई बार ऐसा होता है कि एक घंटे पुराना अपडेट मिलता है. बहरहाल यह घटना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है. क्या उत्तराखण्ड में नियमों का पालन हो रहा है, क्या जो घटनाएं घट रही हैं, उसको लेकर संवेदनशीलता है. हर बार की तरह जांच भी सिर्फ खानापूर्ति तक सिमटी है. क्या अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए.