अश्वगंधा से हल्दी-मेथी तक, मुंबई की नौकरी छोड़ मंटू ने बनाए 15 प्रकार के हर्बल लड्डू; स्वाद से बनाई नई पहचान

अश्वगंधा से हल्दी-मेथी तक, मुंबई की नौकरी छोड़ मंटू ने बनाए 15 प्रकार के हर्बल लड्डू; स्वाद से बनाई नई पहचान


पटना: फास्ट फूड और मिलावटी खान-पान के दौर में एक बार फिर लोग अपने पारंपरिक स्वाद की ओर लौट रहे हैं. दादी-नानी के नुस्खे, देसी घी और गुड़ से बने लड्डू अब सिर्फ पुरानी यादों में नही रह गए हैं, बल्कि रोजगार और उद्यमिता की नई कहानी भी लिख रहे हैं. बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में मंटू चंद्रवंशी इसी सोच के साथ पारंपरिक खान-पान को एक नई पहचान देने में जुटे हैं. उनके प्रयास से श्री नारायणी स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 15 तरह के हर्बल और पारंपरिक लड्डू तैयार किए जा रहे हैं. इनमें बिहार के पुराने खान-पान की झलक देखने को मिलती है.

दादा की डायरी और पुरानी रेसिपी से शुरू हुआ सफर
मंटू चंद्रवंशी लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि उनके दादा वैद्य थे. बचपन से ही उन्होंने घर में कई तरह के पारंपरिक व्यंजन और औषधीय जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल को देखा और समझा था. दादा के समय की जानकारी और पुरानी डायरी में दर्ज नुस्खों को आधार बनाकर उन्होंने बिहार के उन पारंपरिक व्यंजनों पर काम करना शुरू किया, जो धीरे-धीरे लोगों की थाली से गायब होते जा रहे थे.

मंटू पहले मुंबई में रहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उन्हें वहां से वापस बिहार लौटना पड़ा. काफी समय तक घर पर रहने के बाद उन्होंने अपने राज्य में ही कुछ नया करने का फैसला किया. करीब 40-50 हजार रुपये की शुरुआती लागत से उन्होंने पारंपरिक लड्डू बनाने का काम शुरू किया. बाद में उनकी पत्नी जीविका से जुड़ीं और उन्होंने इस काम को श्री नारायणी समूह के ब्रांड के रूप में आगे बढ़ाया.

15 तरह के लड्डू, हर एक की अपनी खासियत
श्री नारायणी समूह की खासियत है कि यहां एक-दो नहीं, बल्कि करीब 15 तरह के लड्डू तैयार किए जाते हैं. इनमें अश्वगंधा लड्डू, हल्दी-मेथी लड्डू, अलसी-तीसी लड्डू, गोंद लड्डू, ड्राई फ्रूट लड्डू, सोंठ लड्डू और बल-बुद्धि वर्धक भोग जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. मंटू की मानें तो इन लड्डुओं को देसी घी और गुड़ के साथ तैयार किया जाता है. उनका दावा है कि उत्पादों में कृत्रिम रंग और रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. गोंद का लड्डू 400 ग्राम के पैकेट में करीब 300 रुपये में उपलब्ध है. वहीं, 21 तरह की जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार एक अन्य उत्पाद भी 300 रुपये में मिलता है. इसमें आंवला, हर्रे, बहेड़ा, अजवाइन, मेथी और सौंफ जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है.

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए अलग-अलग ऑप्शन
इस समूह के प्रोडक्ट में अलग-अलग सामग्री के कॉम्बिनेशन देखने को मिलते हैं. बल-बुद्धि वर्धक भोग में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा, सफेद मूसली और शतावरी जैसी जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं. वहीं, बच्चों के मानसिक विकास के उद्देश्य से तैयार लड्डू में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी, अश्वगंधा, कच्ची हल्दी और तुलसी का मिश्रण बताया गया है. इसके अलावा सर्दी-जुकाम के मौसम को ध्यान में रखकर सोंठ का लड्डू भी तैयार किया जाता है. इसमें सोंठ के साथ मुलेठी, पिप्पली, लौंग, इलायची और दालचीनी जैसी सामग्री मिलाई जाती है. ड्राई फ्रूट लड्डू में अलग अलग प्रकार के सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है.

15-20 महिलाओं को मिला रोजगार, जीविका से जुड़ा है समूह
मंटू चंद्रवंशी ने बताया कि सासाराम में करीब 15-20 महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई हैं. महिलाएं उत्पादन और लड्डू तैयार करने का काम संभालती हैं, जबकि मंटू खुद इनके बिक्री के लिए अलग-अलग जगहों पर जाते हैं. उनका कहना है कि जीविका से जुड़ने के बाद इस काम को एक संगठित पहचान मिली है. हालांकि, जीविका का कोई स्थायी बिक्री प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें महिला बाजार, हाट, मॉल और अन्य आयोजनों के माध्यम से अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना पड़ता है.

पटना के खादी मॉल में भी उपलब्ध हैं लड्डू
अगर आप इन पारंपरिक लड्डुओं का स्वाद चखना चाहते हैं तो पटना में भी इन्हें खरीद सकते हैं. मंटू ने बताया कि उनके उत्पाद गांधी मैदान के गेट नंबर 7 के पास स्थित खादी मॉल में उपलब्ध हैं. इसके अलावा दूसरे शहरों के लोग भी फोन पर ऑर्डर देकर कूरियर के माध्यम से उत्पाद मंगा सकते हैं. ऑर्डर और जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 6299280880 पर संपर्क करें.



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