क्वाड बैठक में भारत का डंका, 8.5 करोड़ डॉलर के AI फंड से 6G तक 10 बड़े ऐलान
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अमेरिका के अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक हुई. इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए 10 बड़े ऐतिहासिक ऐलान किए गए. इनमें 8.5 करोड़ डॉलर का AI फंड, 6G तकनीक, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और पहला ‘क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम’ शामिल है. बैठक में संकट के वक्त नेपाल को सबसे पहले मदद पहुंचाने के लिए भारत की जमकर तारीफ हुई. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने चीन की मनमानी नीतियों पर चिंता जताई. साथ ही समुद्री सुरक्षा, साइबर क्राइम और क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग पर मिलकर काम करने की रणनीति बनाई.
क्वाड मीटिंग में 10 बड़े ऐलान
अमेरिका के अटलांटा में हुई क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की इस ऐतिहासिक मीटिंग में भारत के कूटनीतिक दबदबे और वैश्विक लीडरशिप का लोहा पूरी दुनिया ने माना है. 31 अक्टूबर 2026 को हुई इस हाई-लेवल समिट में अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दिशा बदलने वाले 10 बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. संकट के वक्त नेपाल में बाढ़ राहत के लिए सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में भारत की वैश्विक तारीफ से लेकर, 8.5 करोड़ डॉलर के भारी-भरकम एआई (AI) फंड, 6G संचार तकनीक, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स तक, क्वाड ने हर मोर्चे पर अपनी ताकत दिखाई है.
- पहली बार आयोजित होगा ‘क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम’, आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई धार : क्वाड देशों ने व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए पहली बार ‘क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम’ के गठन की घोषणा की है. इस ऐतिहासिक फोरम में चारों देशों के दिग्गज उद्योगपति, सरकारी प्रतिनिधि और नीति एक्सपर्ट्स एक साथ एक मंच पर आएंगे. इसका मुख्य उद्देश्य क्वाड देशों के सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच सीधा तालमेल बैठाना और महत्वपूर्ण उद्योगों में नए व्यापारिक समझौतों तथा भारी-भरकम निवोश को बढ़ावा देना है.
- टोक्यो में जुटने वाली है ‘एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसियों’ की बैठक, आर्थिक सहयोग की नई राहें : आर्थिक सहयोग के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 18 नवंबर को जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड देशों की एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसियों की एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी. ये बैठक साल 2024 में हुए मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन की नींव पर आधारित है. इसमें चारों देश आपस में व्यावहारिक और जमीनी आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे, जिससे व्यापार को सुगम बनाया जा सके और व्यापारिक जोखिमों को कम किया जा सके.
- आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोर: चीन की मनमानी नीतियों पर जताई गहरी चिंता : अटलांटा बैठक के साझा बयान में चारों देशों ने माना कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के लिए ‘आर्थिक सुरक्षा’ सबसे बड़ी शर्त है. इसके लिए भरोसेमंद, स्वतंत्र और फ्लेक्सिबल ग्लोबल सप्लाई चेन तैयार करने पर खास तौर पर जोर दिया गया. इसके साथ ही क्वाड मंत्रियों ने दुनिया के कुछ देशों की नीतियों पर सवाल भी उठाया जो दूसरे देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर काम निकलवाते हैं. इसके अलावा सभी ने मनमाने निर्यात प्रतिबंधों पर भी चिंता जाहिर की. बिना नाम लिए चीन की ओर इशारा करते हुए बयान में कहा गया कि महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन करने और गैर-बाजार आधारित नीतियों के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा पर मुहर : क्वाड नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और समुद्री ट्रेड रूट की सुरक्षा को बेहद सेंसेटिव माना. बयान में कहा गया कि वैश्विक वाणिज्य के निर्बाध प्रवाह, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री क्रू की सुरक्षा के लिए ‘नेविगेशन की आजादी’ का सम्मान होना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र के UNCLOS कानूनों का हवाला देते हुए चारों देशों ने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या मनमाना टैक्स वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वहां जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
- ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने के लिए अमेरिका देगा 1 करोड़ डॉलर और भारत और आसियान को फायदा : मई 2026 में घोषित क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क के तहत चारों देशों ने रीसाइक्लिंग और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के प्रयासों को और तेज कर दिया है. इस दिशा में अमेरिका ने भारत और आसियान (ASEAN) देशों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे और स्क्रैप से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और रीसाइक्लिंग के लिए 1 करोड़ डॉलर की तकनीकी मदद देने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसका क्वाड ने स्वागत किया. इस भारी-भरकम फंड का इस्तेमाल भारत में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को विकसित करने के लिए किया जाएगा, ताकि दुर्लभ खनिजों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके.
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के लिए 8.5 करोड़ डॉलर का फंड : क्वाड देशों ने आधुनिक दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ‘पैक्स सिलिका’ जैसी पहलों को आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन माना. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भरोसेमंद और सुरक्षित एआई तकनीक की पहुंच बढ़ाने के लिए क्वाड ने 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया है. ये फंड ‘क्वाड एआई एक्सीलेटर’ के जरिए मुहैया कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र के छोटे और विकासशील देश भी सुरक्षित AI का फायदा उठा सकेंगे.
- साइबर क्राइम और ऑनलाइन घोटालों के खिलाफ आर-पार की जंग : वैश्विक स्तर पर तेजी से पैर पसार रहे साइबर घोटालों और ऑनलाइन फ्रॉड पर क्वाड ने कड़ा रुख अपनाया है. चारों देशों ने उन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों की कड़ी निंदा की जो लोगों की तस्करी करके उनसे जबरन साइबर फ्रॉड करवा रहे हैं. ये सिंडिकेट हर साल चारों देशों के नागरिकों से मेहनत की कमाई के अरबों डॉलर चुरा रहे हैं. क्वाड देशों ने कसम खाई है कि वो इन ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ग्रुप्स का नेटवर्क पूरी तरह तबाह कर देंगे और उनके आकाओं को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाएंगे.
- नेपाल में आई भीषण बाढ़ में भारत की भूमिका की सराहना: बना ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ : क्वाड मंत्रियों ने 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही में मारे गए लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया. संकट के समय में अपने पड़ोसी और सहयोगी देशों की मदद करने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए क्वाड ने संकटग्रस्त नेपाल में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देश के रूप में भारत की अग्रणी और मानवीय भूमिका की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही नेपाल को क्वाड के चारों देशों की ओर से दी गई सामूहिक सहायता को भी हाईलाइट किया गया.
- सेमीकंडक्टर और 6G तकनीक पर मजबूत होगी पकड़ : भविष्य की संचार तकनीकों को सुरक्षित रखने के लिए क्वाड ने ‘Call to Action for 6G Leadership and Security’ पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. चारों देश मिलकर 5G, 6G और ओपन आरएएन (Open RAN) जैसी सुरक्षित तकनीकों को विकसित करेंगे. इसके अलावा सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवोयर की सप्लाई चेन में आने वाली किसी भी रुकावट या चोकपॉइंट्स की पहले से पहचान करने के लिए एक नई पहल शुरू करने की घोषणा की गई, ताकि दुनिया में चिप संकट दोबारा न पैदा हो.
- हिंद-प्रशांत की सुरक्षा: समंदर में पहली बार साझा गश्ती और राहत अभ्यास : समुद्री सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हाल ही में 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 के बीच चेन्नई से पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) तक भारतीय तटरक्षक पोत पर चारों देशों के प्रतिनिधियों ने ‘क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर’ मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके अलावा ‘सी ड्रैगन 2027’ अभ्यास में भी चारों देश समुद्री निगरानी साझा करेंगे. प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए नवंबर में भारत में होने वाले संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास (AJHE-26) में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के सुपरवाइजर/ऑब्जर्वर हिस्सा लेंगे, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होगा.