तेहरान: ईरान और अमेरिका ने भले ही सीजफायर के नाम पर हथियार नीचे कर लिए हों, लेकिन दोनों देश हर सेकेंड एक-दूसरे की गर्दन दबोचने की कोशिश में जुट गए हैं. एक तरफ ट्रंप सीक्रेट तैयारी कर रहे हैं, दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अचानक चीख पड़े हैं. उन्होंने अपनी सेना के लिए एक खौफनाक आदेश जारी किया है. जिसके बाद ये तय हो गया है कि ईरान-अमेरिका युद्ध उस मुकाम तक पहुंच गया है कि जिसके बाद इसका कोई ओर-झोर नहीं रह जाएगा. ईरान गुस्से में आकर जिस देश पर चाहे अटैक कर देगा क्योंकि मोजतबा ने ‘भौगोलिक पाबंदी’ हटा दी है.
क्या है मोजतबा खामेनेई का वो आदेश?
दरअसल, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की सेना को आदेश दिया है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देश ईरान पर हमला करते हैं, तो उस पर बिना किसी भौगोलिक पाबंदी के तुरंत और तगड़ा किया जाए.
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी खूनी जंग के बीच ये आदेश आग में घी डालने का काम कर रहा है. ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे वेस्ट को भीषण युद्ध में झोंक सकती है. मोजतबा खामेनेई का ये कड़ा संदेश न केवल अपनी सेना का हौसला बढ़ाने के लिए है, बल्कि वाशिंगटन और तेल अवीव को ये चेतावनी भी है कि अगर इस बार हमला हुआ, तो जंग सिर्फ किसी एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहेगी.
‘नो ज्योग्राफिकल लिमिटेशंस’: आखिर इस आदेश का क्या मतलब है?
ईरान के टॉप कमांडरों के साथ हुई एक हाई लेवल बैठक में मोजतबा खामेनेई ने ये निर्देश दिया. ईरानी सरकारी मीडिया और उनके आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान के अनुसार, सेना से कहा गया है कि किसी भी संभावित दुश्मन के खतरे का तुरंत और बेहद प्रभावी जवाब दिया जाए.
भौगोलिक सीमा का न होना: जब ईरान कहता है कि जवाब की ‘कोई भौगोलिक सीमा नहीं होगी’, तो इसका सीधा मतलब है कि अगर अमेरिका या इजराइल ईरान की सरजमीं पर हमला करते हैं, तो ईरान सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा. वो मिडिल ईस्ट में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इजराइली ठिकानों और समुद्र में गश्त लगा रहे पश्चिमी देशों के युद्धपोतों व तेल टैंकरों पर कहीं भी हमला कर सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का क्या हाल होगा?
मोजतबा खामेनेई का ये बयान ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. अगर ईरान ने वाकई भौगोलिक सीमाएं लांघ दी दुनिया की तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता तबाह हो जाएगा.
तेल टैंकरों में आग: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) आए दिन तेल टैंकरों को उड़ा देते हैं. कभी उन पर नए नियमों का उल्लंघन का आरोप लगाया जाता तो कभी समुद्री माइन्स काल बन जाती हैं.
समुद्री हमला: एक अन्य समुद्री रिपोर्ट के अनुसार, एक क्रूड ऑयल टैंकर जब इस रणनीतिक जलमार्ग से बाहर निकल रहा था, तब उस पर किसी अज्ञात मिसाइल या प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जरा सी भी रुकावट या जहाजों पर हमले से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. जंग के इस दौर में ये जलमार्ग लगातार संघर्ष का सेंटर बना हुआ है.
क्या है ईरान-अमेरिका जंग की टाइमलाइन
- 28 फरवरी का बड़ा हमला: 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे. इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था.
- अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत: इस शुरुआती हमले के दौरान ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इस घटना ने ईरान की राजनीति और पूरे मिडिल ईस्ट के समीकरणों को हिलाकर रख दिया.
- नया नेतृत्व और कड़ा रुख: अपने पिता की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में कमान संभाली. पद संभालते ही उन्होंने इजराइल और क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर तीखे पलटवार किए.
समझौते का टूटना और पीस टॉक फेल
शुरुआती भीषण संघर्ष के बाद जून में एक अस्थायी समझौता हुआ था. इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे खोलना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित और बहाल करना था.
हालांकि, ये व्यवस्था ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. दोनों पक्षों के बीच अविश्वास इतना बढ़ चुका था कि वार्ता की कोशिशें टूट गईं. कूटनीति के विफल होते ही एक बार फिर सैन्य तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आकर खड़े हो गए.
इजराइल और अमेरिका का इरादा: क्या फिर से होंगे हमले?
- बेंजामिन नेतन्याहू का रुख: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है. इजराइल ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को अपने अस्तित्व के लिए सीधा खतरा मानता है.
- वाशिंगटन के संकेत: अमेरिकी प्रशासन ने भी साफ कर दिया है कि अगर ईरान या उसके प्रॉक्सी समूहों ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो सैन्य विकल्प पूरी तरह से टेबल पर मौजूद हैं.
इन धमकियों के बीच कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थ देश पर्दे के पीछे से दोनों पक्षों को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता हाथ लगती नहीं दिख रही है.
दुनिया पर इस जंग का क्या पड़ेगा असर?
अगर ईरान अपने नए आदेश के तहत पूरे मिडिल ईस्ट या उसके बाहर अमेरिकी व इजराइली ठिकानों को निशाना बनाता है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
- ईंधन संकट और महंगाई: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने या वहां जहाजों पर हमले जारी रहने से भारत समेत दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.
- चौतरफा युद्ध का खतरा: ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क जैसे हिजबुल्लाह, हूती और सीरिया और इराक के उग्रवादी समूह एक साथ मिलकर अलग-अलग मोर्चों पर हमला कर सकते हैं, जिससे ये जंग वैश्विक रूप ले सकती है.
लाल सागर और फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ठप होने से लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पूरी तरह से टूट जाएगी.