Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के कथित यौन शोषण, धर्म परिवर्तन के दबाव और मामलों को दबाए जाने से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है. यूपी एसटीएफ (एसटीएफ) की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. केजीएमयू के पीआरओ (PRO) केके सिंह ने बयान जारी करते हुए दावा किया है कि एसटीएफ की रिपोर्ट में ऐसा कोई भी तथ्य नहीं है, जिससे औपचारिक रूप से ‘लव जिहाद’ की पुष्टि होती हो.
उन्होंने कहा कि दूसरे मामले में शिकायत आई थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था. एसटीएफ ने जिन 12 लोगों को पॉइंट आउट किया है, उनके मामले लव जिहाद से संबंधित नहीं हैं. ये मामले नर्सिंग, रिसर्च और अन्य कर्मचारियों के आचरण (Conduct) से जुड़े हैं. इन सभी मामलों में जल्द से जल्द विभागीय जांच कराई जाएगी.
एसटीएफ ने भेजी रिपोर्ट
बताते चले कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने, प्रेमजाल में फंसाकर यौन शोषण करने और शिकायतों को दबाने के आरोपों को लेकर एसटीएफ की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आई थी. रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के कुछ डॉक्टरों, अन्य विभागों के कर्मचारियों और विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसमें डॉक्टरों के बीच कथित गुटबाजी, रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ भेदभाव, छुट्टी देने में अलग-अलग व्यवहार और एक नेटवर्क के जरिए नए मुस्लिम छात्रों को जोड़ने जैसी बातें कही गई हैं. एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजते हुए संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है.
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश एसटीएफ मुख्यालय को उत्तर प्रदेश यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवम श्रीवास्तव की ओर से KGMU परिसर में कथित धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामलों की जांच कराने का शिकायती पत्र मिला था. इसके बाद एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल ने मामले की जांच की थी. अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था एवं एसटीएफ अमिताभ यश की ओर से 25 अगस्त 2026 को शासन के अपर मुख्य सचिव (गृह) को भेजी गई इस जांच रिपोर्ट में धर्मांतरण और लव जिहाद का खुलासा कर कई गंभीर आरोपों और घटनाओं का उल्लेख किया गया है.
इनकी शिकायत पर दर्ज हैं मुकदमे
एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक KGMU की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. देवारती मित्रा ने शिकायत की थी. इसी आधार पर 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था. इसमें शादी का झांसा देकर शोषण, धमकी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की गई. नर्सिंग स्टाफ माविया ने रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. उनके खिलाफ 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग थाने में केस दर्ज हुआ था. इसमें डॉक्टर आदिल द्वारा माविया समेत एक और हिंदू नर्सिंग स्टॉफ को प्रेम जाल में फंसाकर यौन शोषण के साथ धर्म परिवर्तन के लिए भी दबाव बनाने की बात सामने आई. एसटीएफ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि डॉ. रमीज के खिलाफ अन्य महिला डॉक्टरों से जुड़े आरोप और शिकायतें भी सामने आईं है, इसी वजह से 9 जनवरी को डॉ. रमीज को गिरफ्तार किया गया था.
पैथॉलजी में मुस्लिमों का बोलबाला – एसटीएफ
एसटीएफ जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि KGMU के पैथोलॉजी विभाग की विभागीय फैकल्टी द्वारा कतिपय कारणों से मुस्लिम फैकल्टी रेजिडेंट डॉक्टर, स्टूडेंट, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मियों को प्रश्रय (सहारा) दिया जाता है. जिससे उनके द्वारा महिला हिंदू रेजिडेंट डॉक्टर, स्टूडेंट, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य महिला कर्मियों का शारीरिक एवं मानसिक शोषण होता रहता है. यदि इनमें से किसी महिला द्वारा विरोध कर आवाज उठाई जाती है तो विभागीय फैकल्टी द्वारा उसका करियर खराब करने, मानसिक रूप से पागल घोषित करने या फिर नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी देकर मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जाती है.
KGMU के कई विभागों में सामने आई लव जिहाद और धर्मांतरण के मामले
एसटीएफ की रिपोर्ट में पैथोलॉजी के साथ गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी से जुड़े मामलों का जिक्र है. यहां वार्ड में डॉक्टर आदिल, नर्सिंग स्टॉफ नफीस और फुरकान पर हिंदू महिला नर्सिंग स्टाफ के साथ शारीरिक संबंध और मानसिक शोषण के साथ धर्म परिवर्तन के आरोप हैं. माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एक हिंदू महिला कंप्यूटर ऑपरेटर एक 50 वर्षीय मुस्लिम कर्मचारी के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया. साथ आरोप लगाया कि कार्रवाई के बजाय उसकी संविदा समाप्त कर दी गई.
इधर रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर रिजवान ने अपनी दो साथी हिंदू महिला डॉक्टरों को भी प्रेमजाल में फंसाकर और ब्लैकमेल कर धर्मांतरण का दबाव बनाया. लेकिन उनकी शिकायत पर विभागाध्यक्ष ने उनका करियर बर्बाद कर उन्हें फेल करने की धमकी दे डाली.
मामलों को दबाने और आरोपियों को बचाने के आरोप
एसटीएफ की रिपोर्ट में KGMU के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर सुरेश बाबू पर डॉ. सुमायरा कयूम के प्रभाव में फैसले लेने का आरोप है. रिपोर्ट में डॉ. देवारती मित्रा के परिजनों से बातचीत के दौरान उन्हें साइकोपैथ बताया गया था. वहीं, डॉ. रमीज को निर्दोष बताया गया था. आरोप है कि इससे देवारती के परिजन दबाव में आ गए और समझौते के लिए मजबूर महसूस करने लगे.
डॉ. रमीज को क्लीन चिट देने की कोशिश
एसटीएफ के मुताबिक, विभागीय बैठक में भी डॉ. रमीज को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई. इस दौरान डॉ. देवारती को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया. रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग में रेजिडेंट डॉक्टरों की सूची कैटेगरी के आधार पर तैयार कराई गई थी. एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है. उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने रिपोर्ट में डॉ. रमीज की गिरफ्तारी और जांच का जिक्र किया है. साथ ही, अन्य संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई की सिफारिश की गई है. इसके बाद शासन ने KGMU के कुलपति और कुलसचिव को पत्र भेजा. इसमें संबंधित अध्यापकों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर जानकारी देने को कहा गया है.
डॉ. सुमायरा कयूम पर रेजिडेंट डॉक्टरों से भेदभाव के आरोप
डॉ. सुमायरा कयूम KGMU के पैथोलॉजी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू ने रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टी मंजूर करने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी थी. एसटीएफ का आरोप है कि छुट्टी देने में हिंदू और मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता था. रिपोर्ट में 2023 बैच की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. सबीना का उदाहरण दिया गया है. आरोप है कि ट्रामा लैब में तैनाती के बावजूद डॉ. सबीना को छुट्टी दे दी गई. उनकी जगह काम करने वाले डॉ. हर्षित जैन से अतिरिक्त ड्यूटी कराई गई. उनकी नकारात्मक रिपोर्टिंग भी की गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. हर्षित ने छठ पूजा और अपने दादा-दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगी थी. आरोप है कि इस दौरान उनसे अपमानजनक बातें कही गईं. एसटीएफ ने दावा किया है कि मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टरों को नमाज, शादी और निजी कामों के लिए आसानी से छुट्टी मिल जाती थी.
डॉ. देवारती मित्रा के मामले में भी भूमिका पर सवाल
एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. देवारती मित्रा से जुड़े मामले का भी जिक्र है. आरोप है कि डॉ. सुमायरा कयूम ने इस मामले में डॉ. रमीज का समर्थन किया था. डॉ. देवारती को साइकोपैथ कहकर हतोत्साहित किया गया. जब वह अस्पताल में भर्ती थीं, तब उनके बैच के अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों के सामने घटना को छोटी बात बताया गया. डॉक्टरों से कहा गया कि इस मामले को ज्यादा तूल न दिया जाए. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि डॉ. देवारती का समर्थन करने वाले कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों को धमकाया गया था.
छुट्टी मांगने पर अपमानजनक टिप्पणी का आरोप
एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. वाहिद अली का भी नाम है. वह KGMU की पैथोलॉजी विभाग की बायोकेमिस्ट्री लैब के प्रभारी बताए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, लैब में एक HPLC लैब भी है. एसटीएफ ने आरोप लगाया है कि इस जगह का इस्तेमाल कुछ मुस्लिम छात्रों और महिलाओं के बैठने तथा नमाज पढ़ने के लिए किया जाता था. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि डॉ. वाहिद अली वहां मुस्लिम छात्रों के साथ बैठकें करते थे. डॉ. सबीना की छुट्टी के बाद उनकी जगह काम करने वाले डॉ. हर्षित जैन से डबल ड्यूटी कराई गई.
आरोप है कि डॉ. हर्षित ने छठ पूजा और अपने दादा-दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगी थी. इस दौरान उनसे अपमानजनक टिप्पणी की गई. रिपोर्ट में दावा है कि मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टरों को नमाज, शादी और निजी कामों के लिए आसानी से छुट्टी मिल जाती थी.
क्या है ‘इस्लामिक मेडिकोज’ का मामला?
एसटीएफ की रिपोर्ट में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक समूह का भी जिक्र है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस समूह में KGMU लखनऊ और आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज से जुड़े कुछ मुस्लिम मेडिकल छात्र और डॉक्टर शामिल थे. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समूह के नाम से एक किताब प्रकाशित की गई थी. इसमें 2012 से 2016 बैच तक के मुस्लिम मेडिकल छात्रों का विवरण दर्ज होने की बात कही गई है. एसटीएफ की रिपोर्ट में KGMU के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक, डॉ. अदनान अंसारी और डॉ. सैम अनीस के नाम भी शामिल हैं.