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China Richest Women : सोचिए कि एक महिला पैसों की तंगी की वजह से स्कूल छोड़ फैक्ट्री में काम करने लगती है और एक दिन वह चीन की सबसे अमीर महिला बन जाती है. यह कहानी तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अभाव के बीच अक्सर तरक्की नहीं कर पाते. चीन की इस महिला ने राष्ट्रपति ट्रंप के भोज में एलन मस्क और टिम कुक जैसे दिग्गजों के साथ डिनर साझा किया था.
झोउ ने महज 23 साल की उम्र में खुद की फैक्ट्री लगा दी थी.
नई दिल्ली. मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे. ऐसा ही शोर चीन में तब मचा था जब डोनाल्ड ट्रंप मई महीने में चीन की यात्रा पर पहुंचे थे. ट्रंप के लिए आयोजित एक भोज में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क और ऐपल के टिम कुक के बीच एक महिला बैठी नजर आई. इस चेहरे ने दुनियाभर का ध्यान खींचा. अब इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी जमकर हो रही है. कहा जा रहा है कि आज चीन की सबसे अमीर महिला होने का रुतबा हासिल करने वाली यह महिला एक समय फैक्ट्री में काम करती थी.
चीन की सबसे अमीर महिला का नाम झोउ कुनफेई है. 28 अक्टूबर को जारी ‘हुरुन रिचेस्ट विमेन इन चाइना 2026’ सूची के अनुसार, पिछले एक साल में उनकी संपत्ति में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस बढ़त के साथ वह ‘हंसोह फार्मास्युटिकल’ की संस्थापक झोंग हुइजुआन से थोड़ा आगे निकल गई हैं, जिनकी संपत्ति का अनुमान 124 अरब युआन (लगभग 13.86 अरब पाउंड) लगाया गया है.
कभी फैक्ट्री में करती थीं काम
56 वर्षीय झोउ कुनफेई ने एक समय स्कूल और पढ़ाई छोड़कर कम उम्र में ही फैक्ट्री का रास्त पकड़ लिया था. अब वह देश की सबसे अमीर महिलाओं की सूची में शीर्ष पर आ गई हैं. चीन की सबसे बड़ी ग्लास निर्माता कंपनी ‘लेंस टेक्नोलॉजी’ की संस्थापक झोउ की कुल नेट वर्थ करीब 14.20 अरब पाउंड यानी 1.80 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है और उन्होंने 11 साल के बाद फिर से चीन की सबसे अमीर महिला होने का रुतबा हासिल कर लिया है.
2015 में भी हासिल किया था रुतबा
दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका हुरुन ने साल 1999 से ही चीन में सबसे अमीर महिलाओं की सूची प्रकाशित करना शुरू किया था. हुरुन की वेबसाइट पर साफ लिखा है कि यह लिस्ट चीन की अन्य अमीर महिलाओं की सूची से अलग है. इसमें शामिल महिलाओं की व्यक्तिगत संपत्ति को ही आधार बनाया गया है. झोउ का जन्म साल 1970 में हुनान प्रांत में हुआ था. किशोरावस्था में ही उन्हें स्कूल छोड़कर काम पर जाना पड़ा. उन्होंने शेन्जेन प्रांत की एक वॉच-ग्लास फैक्ट्री में अपना काम शुरू किया, जहां रोज करीब 110 रुपये उन्हें मिलते थे.
23 साल की उम्र में शुरू किया खुद का काम
झोउ ने कम उम्र में ही फैक्ट्री में काम शुरू किया तो उन्हें अनुभव भी जल्दी हासिल हो गया. यही वजह रही कि महज 23 साल की उम्र में उन्होंने खुद की ग्लास प्रोसेसिंग वर्कशॉप शुरू कर दी. पहले उन्होंने एडवांस्ड स्क्रीन प्रिंटिंग और कर्व्ड ग्लास बनाने की तकनीक सीखी और बाद में लेंस टेक्नोलॉजी (Lens Technology) के नाम से कंपनी बनाई, जो बाद में स्मार्टफोन को ग्लास स्क्रीन सप्लाई करने वाली प्रमुख कंपनी बन गई. उनकी किस्मत साल 2007 में तब चमकी जब आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल ने झाउ की कंपनी को ग्लास कवर सप्लाई करने का ऑर्डर दिया. साल 2014 तक कंपनी की कुल कमाई में आधा हिस्सा ऐपल का ही था.