Bhopal: जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर 9.60 करोड़ का बीमा घोटाला, सीआईडी जांच में 121 क्लेम फर्जी पाए गए

Bhopal: जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर 9.60 करोड़ का बीमा घोटाला, सीआईडी जांच में 121 क्लेम फर्जी पाए गए


रिपोर्ट: आचार्य शिवकांत

Bhopal News: मध्य प्रदेश में आम लोगों के कल्याण के लिए चल रही सरकारी बीमा योजना में एक हैरान करने वाला घोटाला सामने आया है. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के नाम पर 9 करोड़ 60 लाख रुपये के कथित घोटाले ने सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ठगों के एक नेटवर्क ने जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाया, उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए और बीमा कंपनियों से क्लेम की बड़ी रकम निकाल ली.

कैसे रचा गया 9.60 करोड़ के घोटाले का खेल?
फर्जीवाड़े का यह नेटवर्क किसी एक शहर तक सीमित नहीं था. ग्वालियर, मुरैना और रतलाम जैसे जिलों में सैकड़ों फर्जी या संदिग्ध बैंक खाते खुलवाए गए. इन्हीं खातों का इस्तेमाल करके अलग-अलग बीमा कंपनियों से पॉलिसियां ली गईं. पॉलिसी लेने के महज एक महीने से लेकर एक साल के भीतर ही पॉलिसी धारकों को मृत घोषित कर दिया जाता था. इसके बाद बीमा कंपनियों में क्लेम दाखिल कर पूरी रकम निकाल ली जाती थी.

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बने सबसे बड़ा हथियार
इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे प्रमुख हथियार बने. नगर निगम और स्थानीय निकायों से जारी दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनियों से क्लेम पास करवाए गए.

ऐसे हुआ भंडाफोड़
जालसाजों ने चालाकी दिखाते हुए एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों की मौत दर्ज कराई. कभी एक हफ्ते तो कभी एक महीने के भीतर मौतों का यह खेल दिखाया गया. मौतों के इस असामान्य और संदेहास्पद पैटर्न ने अधिकारियों का ध्यान खींचा, जिसके बाद मौतों के इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ.

कहां-कहां से जारी हुए फर्जी डेथ सर्टिफिकेट?
सीआईडी की जांच में अब तक जो 121 फर्जी क्लेम रिकॉर्ड पकड़ में आए हैं, उनमें लगे मृत्यु प्रमाण पत्रों का ब्योरा बेहद चौंकाने वाला है:

28 मृत्यु प्रमाण पत्र राजस्थान के सवाई माधौपुर से बनवाए गए थे.
13 मृत्यु प्रमाण पत्र ग्वालियर नगर निगम से जारी करवाए गए थे.
07 मृत्यु प्रमाण पत्र भिंड जिले के मालनपुर से बनवाए गए थे.
06 मृत्यु प्रमाण पत्र गोहद से बनवाए गए थे.
04 मृत्यु प्रमाण पत्र श्योपुर जिले के बड़ौदा से बनवाए गए थे.
01 मृत्यु प्रमाण पत्र मुरैना जिले के कैलारस से बनवाया गया था.

482 संदिग्ध बैंक खातों की जांच जारी
इस संगठित फर्जीवाड़े के खिलाफ सीआईडी ने अब तक 2 एफआईआर दर्ज की हैं. सीआईडी की जांच में 121 क्लेम रिकॉर्ड में साफ तौर पर फर्जीवाड़ा साबित हो चुका है. इसके अलावा कुल 482 संदिग्ध बैंक खातों की जांच अभी जारी है. सीआईडी के स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जिंदा लोगों को कागजों पर मृत बनाकर बीमा क्लेम हासिल किया गया है.

जिस योजना का मुख्य उद्देश्य परिवार के कमाने वाले सदस्य की असमय मौत पर परिजनों को आर्थिक सुरक्षा देना था, उसी योजना को ठगी का जरिया बना लिया गया. अब जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल खड़े हैं. इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है? फर्जी डेथ सर्टिफिकेट किसने और कैसे बनवाए? बैंक खाते खोलते समय सत्यापन में चूक कहां हुई? और बीमा कंपनियों ने बिना जमीनी जांच के क्लेम की राशि कैसे जारी कर दी? जांच में यह साफ होना अभी बाकी है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं.



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