रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई का इंतजार कर रहे समर्थकों को शनिवार को एक नया घटनाक्रम देखने को मिला. दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से जमानत और निचली अदालत से रिहाई परवाने जारी होने के बाद रामपुर जेल के बाहर हलचल तेज थी. समर्थक अपने नेता के स्वागत के लिए जुटे थे, लेकिन जेल के गेट पर ईडी की टीम पहुंचने से माहौल बदल गया. अब सवाल यह है कि जेल से बाहर आने के बाद आजम खान का अगला पड़ाव घर होगा या ईडी की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई?
आजम खान के खिलाफ ईडी से जुड़ा एक अलग मामला दर्ज है. रिपोर्टों के मुताबिक, 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में ईडी की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के सिलसिले में पुलिस ने रिमांड की मांग की है. आजम खान को इस मामले में 2 नवंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है. ऐसे में दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बावजूद उनकी कानूनी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि जेल के बाहर ईडी की टीम पहुंचने और रिहाई के बाद औपचारिक रूप से हिरासत में लिए जाने में फर्क है. उपलब्ध रिपोर्टों में ईडी टीम के जेल पहुंचने और रिमांड की मांग का जिक्र है.
आजम खान की बॉडी लैंग्वेज में क्या दिखा?
आजम खान की राजनीति में उनका बोलने का अंदाज, तीखे बयान और समर्थकों के बीच उनकी मौजूदगी हमेशा चर्चा में रही है. लेकिन जेल से बाहर आने के इस घटनाक्रम को केवल उनके चेहरे के भाव या चाल-ढाल से किसी निष्कर्ष तक पहुंचकर नहीं देखा जा सकता. यदि सामने आए वीडियो में वह कम बोलते, गंभीर नजर आते या बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ते दिख रहे हैं, तो इसे लंबे कानूनी संघर्ष और मौजूदा परिस्थितियों के बीच उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा सकता है न कि उनके मन की स्थिति का प्रमाण मानकर.
उनकी पिछली रिहाई के समय भी एक अलग तस्वीर सामने आई थी. सितंबर 2025 में सीतापुर जेल से बाहर आने पर समर्थकों ने नारे लगाए थे, लेकिन आजम खान चुपचाप गाड़ी की ओर बढ़े थे. रास्ते में रामपुर की सीमा पर पुलिस ने उनके काफिले को रोका तो विवाद और बहस की स्थिति बनी थी. यानी समर्थकों का उत्साह और आजम खान का अपेक्षाकृत कम बोलना पहले भी सुर्खियों में रहा है.
आजम खान से मुलाकात करेंगे अखिलेश यादव.
पुलिस का घेरा और समर्थकों का विरोध
इस बार घटनाक्रम में ईडी की मौजूदगी ने सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई को केंद्र में ला दिया है. हाथ में रस्सी और पुलिस के घेरे वाली तस्वीर ने भी लोगों का ध्यान खींचा है. दूसरी तरफ, जेल के बाहर समर्थकों की भीड़ और नारेबाजी बताती है कि आजम खान की रिहाई उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक और राजनीतिक रूप से अहम घटना है.
क्या लौट आया आजम खान का पुराना सियासी रंग?
आजम खान कभी रामपुर की राजनीति का बड़ा चेहरा हुआ करते थे. उनके समर्थकों की भीड़, उनके समर्थन में नारे और विरोधियों पर उनके तीखे हमले उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहे हैं. लेकिन लंबे समय तक जेल में रहने, कई मुकदमों और राजनीतिक परिस्थितियों ने उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं.
अखिलेश यादव ने आजम से मुलाकात के बाद क्या कहा था?
अक्टूबर 2026 में अखिलेश यादव ने जेल में उनसे मुलाकात के बाद कहा था, ‘आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे.’ इस बयान को सपा नेतृत्व की ओर से आजम खान के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा गया. अब रिहाई के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल अपनी कानूनी लड़ाई के साथ-साथ रामपुर और प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका तय करने का है.
आजम खान से पूछताछ करेगी ईडी.
आजम खान का चुप रहना, समर्थकों का नारे लगाना और ईडी की कार्रवाई इन तीनों ने इस पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है. लेकिन क्या यह आजम खान की पुरानी राजनीतिक सक्रियता की वापसी का संकेत है या अभी उनकी प्राथमिकता कानूनी लड़ाई ही रहेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों से मिलेगा.