बाल ठाकरे को पसंद नहीं थे संजय राउत, इंटरव्यू में दी थीं जमकर गालियां; राज ठाकरे ने सुनाया पूरा किस्सा

बाल ठाकरे को पसंद नहीं थे संजय राउत, इंटरव्यू में दी थीं जमकर गालियां; राज ठाकरे ने सुनाया पूरा किस्सा


शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे और सांसद संजय राउत के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई कहानियां प्रचलित हैं. इस रिश्ते में एक ऐसा दिलचस्प मोड़ भी है, जिसने दोनों के बीच की दूरी को नजदीकी में बदलने का काम किया. एक वक्त ऐसा था जब बालासाहेब ठाकरे संजय राउत को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे. हालात यहां तक थे कि राउत को इंटरव्यू देने के नाम पर बाल ठाकरे ने कई बार नाराजगी जताई और मुलाकात के दौरान उन्हें जमकर खरी-खोटी भी सुनाई. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने बालासाहेब की राय बदल दी.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने यह दिलचस्प किस्सा सांसद संजय राउत की नई किताब ‘बोध कीर्तन’ के विमोचन कार्यक्रम में सुनाया. राज ठाकरे ने बताया कि वह संजय राउत के पत्रकारिता के शुरुआती सफर के गवाह रहे हैं. उन्होंने खुलासा किया कि बालासाहेब और संजय राउत के बीच रिश्ते की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी. बल्कि एक इंटरव्यू के दौरान बालासाहेब ने राउत को इतनी गालियां दी थीं कि राज ठाकरे को भी उन्हें दोहराना मुश्किल लग रहा था.

जब बालासाहेब को पसंद नहीं थे संजय राउत

राज ठाकरे के मुताबिक, संजय राउत का उनसे पहले उनके चाचा बालासाहेब ठाकरे से संपर्क हुआ था. शुरुआती दौर में राउत ने कई बार बालासाहेब की नाराजगी झेली थी. राज ठाकरे ने बताया कि उस समय राउत ‘लोकप्रभा’ साप्ताहिक में काम करते थे और गैंगवार से जुड़ी खबरें लिखने के लिए काफी चर्चित थे. उनकी रिपोर्टिंग इतनी शानदार होती थी कि राज ठाकरे खुद भी उनकी स्टोरी पढ़ते थे.

राज ठाकरे ने बताया कि वह उस समय अपने कार्टून लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के दफ्तर जाया करते थे. वहां उनकी मुलाकातें संजय राउत से होती थीं. उस दौर में राउत की पहचान गैंगवार पर बेहतरीन और वास्तविक घटनाओं पर आधारित रिपोर्ट लिखने वाले पत्रकार की थी.

हालांकि, संजय राउत की पत्रकारिता का एक दूसरा पहलू भी था. राज ठाकरे के अनुसार, 1988-89 के आसपास शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ की शुरुआत के दौरान राउत ने शिवसेना की आलोचना में कई लेख लिखे थे. यही वजह थी कि बालासाहेब ठाकरे उनसे खुश नहीं रहते थे. राज ठाकरे ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बालासाहेब संजय राउत के बारे में क्या कहते थे, वह यहां मंच से नहीं बता सकते.

राज ठाकरे ने कराई थी बालासाहेब और राउत की मुलाकात

राज ठाकरे ने बताया कि एक दिन संजय राउत ने उनसे ‘लोकप्रभा’ के लिए बालासाहेब ठाकरे का इंटरव्यू कराने की इच्छा जताई. राउत की पत्रकारिता से प्रभावित होने के बावजूद राज ठाकरे जानते थे कि बालासाहेब उन्हें पसंद नहीं करते. फिर भी उन्होंने एक बार पिता से बात करने का फैसला किया.

राज ठाकरे ने बताया कि जब उन्होंने बालासाहेब से पूछा कि क्या वह संजय राउत को इंटरव्यू देंगे, तो जवाब में उन्हें चार अलग-अलग तरह की गालियां सुनने को मिलीं. राज ठाकरे ने हंसते हुए कहा कि वे गालियां अब उन्हें याद नहीं हैं. इसके बावजूद उन्होंने बालासाहेब को समझाया कि एक बार संजय राउत से मिल तो लीजिए, वह अच्छा पत्रकार है और शानदार इंटरव्यू करेगा.

काफी कोशिशों के बाद आखिरकार बालासाहेब मुलाकात के लिए तैयार हो गए. इसके बाद शिवसेना भवन में राज ठाकरे, संजय राउत और बालासाहेब ठाकरे की मुलाकात हुई. संजय राउत ने इंटरव्यू के दौरान सवाल पूछने शुरू किए. राज ठाकरे के मुताबिक, राउत ने कुछ ऐसे तीखे और असहज सवाल पूछे कि बालासाहेब फिर नाराज हो गए और उन्हें इंटरव्यू के दौरान ही जमकर गालियां दे डालीं. यह पूरी बातचीत रिकॉर्ड भी हो रही थी.

बालासाहेब की गालियों को भी ज्यों का त्यों छाप दिया

इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इंटरव्यू के प्रकाशित होने के बाद सामने आया. राज ठाकरे ने बताया कि जब ‘लोकप्रभा’ में संजय राउत का इंटरव्यू छपा, तो उसमें बालासाहेब की ओर से दी गई गालियों को हटाया भी नहीं गया था. राउत ने बातचीत को उसी रूप में प्रकाशित किया, जिस तरह वह हुई थी.

राज ठाकरे के मुताबिक, बालासाहेब ने इस बात की खुलकर तारीफ तो नहीं की, लेकिन उनके मन में संजय राउत के प्रति सम्मान जरूर पैदा हुआ. उन्हें लगा होगा कि इस आदमी में दम है. राज ठाकरे ने कहा कि जो पत्रकार अपने ऊपर की गई टिप्पणी और यहां तक कि खुद को दी गई गालियों को भी बिना काटे प्रकाशित कर सकता है, उसमें एक अलग तरह की ईमानदारी और हिम्मत होती है.

राज ठाकरे ने इस प्रसंग को याद करते हुए कहा कि शायद बालासाहेब के मन में यह बात बैठ गई थी कि संजय राउत खुद पर हुए हमले को भी छिपाने की कोशिश नहीं करते. यही निर्भीकता और ईमानदारी उन्हें पसंद आई.

फिर संजय राउत के लिए खुला ‘सामना’ का रास्ता

राज ठाकरे ने बताया कि इस घटना के कुछ समय बाद संजय राउत को ‘सामना’ का संपादक बनाने को लेकर चर्चा शुरू हुई. फिर एक दिन बालासाहेब ने संजय राउत को बुलाया. दोनों के बीच मुलाकात हुई और बातचीत के बाद राउत को ‘सामना’ का संपादक बना दिया गया.

इस तरह जिस संजय राउत को कभी बालासाहेब ठाकरे इंटरव्यू देने तक के लिए तैयार नहीं थे, वही आगे चलकर उनके अखबार ‘सामना’ के संपादक बने. राज ठाकरे के सुनाए इस किस्से ने संजय राउत के पत्रकारिता के शुरुआती दिनों और बालासाहेब के साथ उनके रिश्ते के एक अनसुने पहलू को सामने ला दिया.

‘बोध कीर्तन’ के विमोचन के मौके पर सुनाया गया यह किस्सा सिर्फ एक इंटरव्यू की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पत्रकारिता में निर्भीकता और सच को जस का तस सामने रखने का अंदाज किस तरह किसी की धारणा बदल सकता है.



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