पशुओं को बीमारियों से बचाना है तो बदलें यह आदतें, डॉक्टर ने बताए जरूरी टिप्स
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Animal Husbandry Tips: पशुओं को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाने के लिए उनकी नियमित देखभाल बेहद जरूरी है. कई बार पशुपालकों की छोटी-छोटी लापरवाहियां पशुओं की सेहत पर भारी पड़ सकती हैं. साफ-सफाई, संतुलित आहार, स्वच्छ पानी, समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच से बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिलती है.
Animal Husbandry News: पशुपालन में छोटी-छोटी लापरवाही भी बड़ा आर्थिक नुकसान करा सकती हैं. पशुओं के आहार में अचानक बदलाव, पर्याप्त पानी नहीं देना, समय पर कृमिनाशक दवा नहीं कराना और नवजात बछड़े को समय पर खीस (पहला दूध) नहीं पिलाना जैसी गलतियां पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सीधा असर डालती हैं. पशु चिकित्सकों का कहना है कि यदि पशुपालक कुछ सामान्य नियमों का पालन करें तो पशुओं को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी.
पशु चिकित्सक विशाल प्रजापति के अनुसार सबसे बड़ी गलती पशुओं का चारा या दाना एकदम बदल देना है. इससे पशुओं में आफरा, पेट फूलना और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए जब भी दाना या चारा बदलना हो तो इसे धीरे-धीरे 7 से 10 दिनों में बदलें. शुरुआत में पुराने चारे में केवल 10 से 20 प्रतिशत नया दाना मिलाएं और फिर प्रतिदिन उसकी मात्रा बढ़ाते जाएं. इससे पशु का पाचन तंत्र नए आहार के अनुरूप आसानी से ढल जाता है.
पानी पर निर्भर दूध उत्पादन
उन्होंने बताया कि दूध का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है. ऐसे में यदि पशु को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा तो दूध उत्पादन स्वतः कम हो जाएगा. कई पशुपालक दिन में केवल सुबह और शाम ही पानी पिलाते हैं, जबकि पशु को जब भी प्यास लगे, उसे पानी उपलब्ध होना चाहिए. इसलिए पानी की खेली या टंकी हमेशा पशु की पहुंच में रखनी चाहिए, ताकि वह दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पी सके.
कीड़े मारने की दवा जरूर दे
पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से कृमिनाशक दवा देना भी जरूरी है. विशाल प्रजापति बताते हैं कि बड़े पशुओं को हर 3 से 4 महीने में कीड़े मारने की दवा जरूर दी जानी चाहिए. वहीं गाभिन पशुओं को किसी भी प्रकार की दवा देने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है, ताकि गर्भस्थ शिशु पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
थनों में बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं
पशुशाला की साफ-सफाई और फर्श की स्थिति भी पशुओं के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाती है. यदि पशु लगातार गीले या चिकने फर्श पर बैठते हैं तो थनों में बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं, जिससे थनैला (मैस्टाइटिस) रोग होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा फिसलन वाले फर्श पर पशु चोटिल भी हो सकते हैं. इसलिए बैठने की जगह हमेशा सूखी रखें. पक्के फर्श पर रबर मैट बिछाएं या सूखी रेत एवं मिट्टी का उपयोग करें और इसे नियमित रूप से बदलते रहें.
नवजात को मां का पहला दूध यानी खीस जरूर पिलाए
विशाल प्रजापति ने नवजात बछड़ों को लेकर फैली एक गलत धारणा को भी दूर किया. उन्होंने बताया कि कई पशुपालक जेर गिरने तक बछड़े को दूध नहीं पिलाते, जबकि यह सही नहीं है. जन्म के एक से दो घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला दूध यानी खीस जरूर पिलाना चाहिए. यह प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है और बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में का काम करती है.